अन-नूर · 8/64
अनुवाद उच्चारण — अन-नूर
وَيَدْرَأُ عَنْهَا الْعَذَابَ أَن تَشْهَدَ أَرْبَعَ شَهَادَاتٍ بِاللَّهِ ۙ إِنَّهُ لَمِنَ الْكَاذِبِينَ ۝٨
Wa yadra`u anhal `azaaba an tashhada arba`a shahaa daatim billaahi innahoo laminal kaazibeen
📖 हिंदी अर्थ
और औरत (के सर से) इस तरह सज़ा टल सकती है कि वह चार मरतबा ख़ुदा की क़सम खा कर बयान कर दे कि ये शख्स (उसका शौहर अपने दावे में) ज़रुर झूठा है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَدْرَأُ: टालना, दूर करना।
  • الْعَذَابَ: यहाँ पर इसका अर्थ है ज़िना की सज़ा (रज्म यानी पत्थरों से मारना)।
  • أَرْبَعَ شَهَادَاتٍ: चार बार गवाही देना।
  • لَمِنَ الْكَاذِبِينَ: बिल्कुल झूठ बोलने वालों में से है।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब पति अपनी पत्नी पर ज़िना (व्यभिचार) का इल्ज़ाम लगाता है और उसके पास चार गवाह नहीं होते, तो शरीयत का नियम यह है कि पति की गवाही को क़बूल किया जाता है, और पत्नी पर ज़िना की सज़ा (रज्म) लागू हो जाती है। लेकिन अल्लाह ने अपनी रहमत से पत्नी को भी यह हक़ दिया है कि वह अपने ऊपर से इस सज़ा को टाल सकती है। यह सज़ा उससे तभी दूर होगी जब वह चार बार अल्लाह की क़सम खाकर गवाही दे कि उसका पति उसके बारे में झूठ बोल रहा है। यानी वह चार बार यह कहे: "मैं अल्लाह की क़सम खाकर गवाही देती हूँ कि मेरा पति झूठा है।" इसके बाद पाँचवीं बार वह यह कहेगी कि "अगर मेरा पति सच्चा है तो मुझ पर अल्लाह का ग़ज़ब नाज़िल हो।" इस तरह उसकी यह गवाही उस पर लगने वाली सज़ा को टाल देती है, और उसे ज़िना की सज़ा से बचा लिया जाता है। इसके बाद दोनों के बीच तलाक़ हो जाता है और वे हमेशा के लिए अलग हो जाते हैं।

दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

इस आयत में अल्लाह तआला ने एक बहुत बड़ी रहमत और इंसाफ़ की मिसाल पेश की है। इस्लाम ने औरत की इज़्ज़त की हिफ़ाज़त के लिए ऐसा क़ानून बनाया है कि अगर पति झूठा इल्ज़ाम लगाए, तो पत्नी को अपनी बेगुनाही साबित करने का पूरा मौक़ा दिया जाता है। यह अल्लाह का कितना बड़ा एहसान है कि उसने अपने बंदों के लिए न्याय और सच्चाई का रास्ता खोला। हमें चाहिए कि हम अल्लाह के दीन को समझें और उस पर अमल करें, क्योंकि इसी में हमारी दुनिया और आख़िरत की भलाई है। अल्लाह ने कुरआन में हर मुश्किल का हल रखा है, और यह किताब हमारे लिए रहनुमा और रहमत है। जो लोग अल्लाह के क़ानूनों पर चलते हैं, वे दुनिया में भी सुकून पाते हैं और आख़िरत में भी कामयाब होते हैं।



📜 आयत 6-10 — अन-नूर

6وَالَّذِينَ يَرْمُونَ أَزْوَاجَهُمْ وَلَمْ يَكُن لَّهُمْ شُهَدَاءُ إِلَّا أَنفُسُهُمْ فَشَهَادَةُ أَحَدِهِمْ أَرْبَعُ شَهَادَاتٍ بِاللَّهِ ۙ إِنَّهُ لَمِنَ الصَّادِقِينَ
और जो लोग अपनी बीवियों पर (ज़िना) का ऐब लगाएँ और (इसके सुबूत में) अपने सिवा उनका कोई गवाह न हो तो ऐसे लोगों में से एक की गवाही चार मरतबा इस तरह होगी कि वह (हर मरतबा) ख़ुदा की क़सम खाकर बयान करे कि वह (अपने दावे में) जरुर सच्चा है
7وَالْخَامِسَةُ أَنَّ لَعْنَتَ اللَّهِ عَلَيْهِ إِن كَانَ مِنَ الْكَاذِبِينَ
और पाँचवी (मरतबा) यूँ (कहेगा) अगर वह झूट बोलता हो तो उस पर ख़ुदा की लानत
8وَيَدْرَأُ عَنْهَا الْعَذَابَ أَن تَشْهَدَ أَرْبَعَ شَهَادَاتٍ بِاللَّهِ ۙ إِنَّهُ لَمِنَ الْكَاذِبِينَ
और औरत (के सर से) इस तरह सज़ा टल सकती है कि वह चार मरतबा ख़ुदा की क़सम खा कर बयान कर दे कि ये शख्स (उसका शौहर अपने दावे में) ज़रुर झूठा है
9وَالْخَامِسَةَ أَنَّ غَضَبَ اللَّهِ عَلَيْهَا إِن كَانَ مِنَ الصَّادِقِينَ
और पाँचवी मरतबा यूँ करेगी कि अगर ये शख्स (अपने दावे में) सच्चा हो तो मुझ पर खुदा का ग़ज़ब पड़े
10وَلَوْلَا فَضْلُ اللَّهِ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَتُهُ وَأَنَّ اللَّهَ تَوَّابٌ حَكِيمٌ
और अगर तुम पर ख़ुदा का फज़ल (व करम) और उसकी मेहरबानी न होती तो देखते कि तोहमत लगाने वालों का क्या हाल होता और इसमें शक ही नहीं कि ख़ुदा बड़ा तौबा क़ुबूल करने वाला हकीम है
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अनुवाद — अन-नूर 8

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Tuesday, August 18, 2026

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