अन-नूर · 10/64
अनुवाद उच्चारण — अन-नूर
وَلَوْلَا فَضْلُ اللَّهِ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَتُهُ وَأَنَّ اللَّهَ تَوَّابٌ حَكِيمٌ ۝١٠
Wa law laa fadlul laahi `alaikum wa rahmatuhoo wa annal laaha Tawwaabun Hakeem
📖 हिंदी अर्थ
और अगर तुम पर ख़ुदा का फज़ल (व करम) और उसकी मेहरबानी न होती तो देखते कि तोहमत लगाने वालों का क्या हाल होता और इसमें शक ही नहीं कि ख़ुदा बड़ा तौबा क़ुबूल करने वाला हकीम है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَضْلُ اللَّهِ: अल्लाह की कृपा और उपकार
  • رَحْمَتُهُ: उसकी दया और रहमत
  • تَوَّابٌ: बहुत अधिक तौबा क़बूल करने वाला
  • حَكِيمٌ: पूर्ण ज्ञान और हिकमत वाला

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ ईमान वालों! अगर अल्लाह का फ़ज़ल (कृपा) और उसकी रहमत तुम पर न होती, और यह कि वह तौबा क़बूल करने वाला और हिकमत वाला न होता, तो तुम पर कठोर सज़ा नाज़िल हो जाती और तुम्हारे गुनाह तुम्हें रुसवा कर देते। लेकिन अल्लाह ने अपनी असीम कृपा और दया से तुम्हारे लिए नर्मी और आसानी का रास्ता अपनाया।

यह आयत उस संदर्भ में आई है जब पति-पत्नी के बीच इल्ज़ाम (आरोप) के मामले में लिआन (आपसी सौगंध) का क़ानून बताया गया। अल्लाह ने चाहा होता तो झूठ बोलने वाले को तुरंत सज़ा देता और उसे दुनिया में ही रुसवा कर देता, लेकिन उसने अपनी रहमत से लोगों को मौका दिया, उनके गुनाहों पर पर्दा डाला, और तौबा का दरवाज़ा खुला रखा।

अल्लाह तआला तौबा क़बूल करने वाला है—यानी जो बंदा अपने गुनाह से सच्चे दिल से तौबा करता है, अल्लाह उसे माफ कर देता है और उसके गुनाहों को नेकियों में बदल देता है। वह हकीम है—यानी उसका हर फैसला, हर हुक्म और हर क़ानून पूरी हिकमत और मसलहत पर आधारित है। वह जो कुछ भी करता है, उसमें गहरी समझदारी और बेहतरीन मक़सद होता है।

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह की रहमत और कृपा का दामन कभी नहीं छोड़ना चाहिए। जब हमसे गलती हो जाए, तो निराश न हों, बल्कि तौबा करें, क्योंकि अल्लाह तौबा क़बूल करने वाला है। उसकी रहमत हर चीज़ से बढ़कर है, और उसकी हिकमत हर मामले में हमारे भले के लिए है। यही अल्लाह का फ़ज़ल है कि उसने हमें माफी का रास्ता दिखाया और हम पर अपनी रहमत का दामन बिछाए रखा।

अल्लाह के इस एहसान को याद रखें और उसके शुक्रगुज़ार बनें, क्योंकि उसकी कृपा और रहमत ही है जो हमें हर बुराई से बचाती है और हमारी ज़िंदगी को सुकून और बरकत से भर देती है।

🎧 सुनें

📜 आयत 8-12 — अन-नूर

8وَيَدْرَأُ عَنْهَا الْعَذَابَ أَن تَشْهَدَ أَرْبَعَ شَهَادَاتٍ بِاللَّهِ ۙ إِنَّهُ لَمِنَ الْكَاذِبِينَ
और औरत (के सर से) इस तरह सज़ा टल सकती है कि वह चार मरतबा ख़ुदा की क़सम खा कर बयान कर दे कि ये शख्स (उसका शौहर अपने दावे में) ज़रुर झूठा है
9وَالْخَامِسَةَ أَنَّ غَضَبَ اللَّهِ عَلَيْهَا إِن كَانَ مِنَ الصَّادِقِينَ
और पाँचवी मरतबा यूँ करेगी कि अगर ये शख्स (अपने दावे में) सच्चा हो तो मुझ पर खुदा का ग़ज़ब पड़े
10وَلَوْلَا فَضْلُ اللَّهِ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَتُهُ وَأَنَّ اللَّهَ تَوَّابٌ حَكِيمٌ
और अगर तुम पर ख़ुदा का फज़ल (व करम) और उसकी मेहरबानी न होती तो देखते कि तोहमत लगाने वालों का क्या हाल होता और इसमें शक ही नहीं कि ख़ुदा बड़ा तौबा क़ुबूल करने वाला हकीम है
11إِنَّ الَّذِينَ جَاءُوا بِالْإِفْكِ عُصْبَةٌ مِّنكُمْ ۚ لَا تَحْسَبُوهُ شَرًّا لَّكُم ۖ بَلْ هُوَ خَيْرٌ لَّكُمْ ۚ لِكُلِّ امْرِئٍ مِّنْهُم مَّا اكْتَسَبَ مِنَ الْإِثْمِ ۚ وَالَّذِي تَوَلَّىٰ كِبْرَهُ مِنْهُمْ لَهُ عَذَابٌ عَظِيمٌ
बेशक जिन लोगों ने झूठी तोहमत लगायी वह तुम्ही में से एक गिरोह है तुम अपने हक़ में इस तोहमत को बड़ा न समझो बल्कि ये तुम्हारे हक़ में बेहतर है इनमें से जिस शख्स ने जितना गुनाह समेटा वह उस (की सज़ा) को खुद भुगतेगा और उनमें से जिस शख्स ने तोहमत का बड़ा हिस्सा लिया उसके लिए बड़ी (सख्त) सज़ा होगी
12لَّوْلَا إِذْ سَمِعْتُمُوهُ ظَنَّ الْمُؤْمِنُونَ وَالْمُؤْمِنَاتُ بِأَنفُسِهِمْ خَيْرًا وَقَالُوا هَٰذَا إِفْكٌ مُّبِينٌ
और जब तुम लोगो ने उसको सुना था तो उसी वक्त ईमानदार मर्दों और ईमानदार औरतों ने अपने लोगों पर भलाई का गुमान क्यो न किया और ये क्यों न बोल उठे कि ये तो खुला हुआ बोहतान है
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अनुवाद — अन-नूर 10

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Tuesday, August 18, 2026

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