अल-फुरकान · 31/77
अनुवाद उच्चारण — अल-फुरकान
وَكَذَٰلِكَ جَعَلْنَا لِكُلِّ نَبِيٍّ عَدُوًّا مِّنَ الْمُجْرِمِينَ ۗ وَكَفَىٰ بِرَبِّكَ هَادِيًا وَنَصِيرًا ۝٣١
Wa kazaalika ja`alnaa likulli Nabiyyin `aduwwam minal mujrimeen; wa kafaa bi Rabbika haadiyanw wa naseeraa
📖 हिंदी अर्थ
और हमने (गोया ख़ुद) गुनाहगारों में से हर नबी के दुश्मन बना दिए हैं और तुम्हारा परवरदिगार हिदायत और मददगारी के लिए काफी है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • मुजरिमीन (المجرمين): अपराधी, पापी, जो लोग सत्य का इनकार करें और ज़ुल्म करें।
  • हादियन (هادياً): मार्गदर्शक, सत्य का रास्ता दिखाने वाला।
  • नसीरन (نصيراً): सहायक, मददगार, रक्षक।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! जिस प्रकार तुम्हारे लिए तुम्हारी क़ौम के अपराधियों को दुश्मन बनाया गया है, ठीक उसी प्रकार हमने तुमसे पहले आने वाले हर नबी के लिए भी उसकी क़ौम के अपराधियों को दुश्मन बनाया था। यह कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह अल्लाह की सुन्नत (रीति) रही है कि सत्य के दावेदारों के रास्ते में बाधाएँ और विरोधी खड़े किए जाते रहे हैं। यह परीक्षा का एक हिस्सा है, ताकि सच्चे और झूठे लोगों में फ़र्क़ स्पष्ट हो सके।

जब तुम्हें यह मालूम है कि तुमसे पहले के सभी नबियों को भी इसी तरह के विरोध और शत्रुता का सामना करना पड़ा, तो तुम्हें धैर्य रखना चाहिए और हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। तुम्हारा रब ही तुम्हारे लिए काफ़ी है — वही तुम्हें सही रास्ता दिखाने वाला है और वही तुम्हारी मदद करने वाला है। जब अल्लाह तुम्हारे साथ हो, तो किसी दुश्मन का डर नहीं होना चाहिए। वह तुम्हें हिदायत देगा और तुम्हारी हर मुश्किल में तुम्हारा साथ देगा।

यह आयत नबी ﷺ के लिए एक बड़ी तसल्ली और दिलासा है, और हर उस इंसान के लिए भी सबक़ है जो सत्य के रास्ते पर चलता है — कि जब अल्लाह तुम्हारा हामी और मददगार हो, तो दुनिया की तमाम ताक़तें मिलकर भी तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ सकतीं। यही वह चीज़ है जो मोमिन को मज़बूत बनाती है और उसे हर मुश्किल का सामना करने की ताक़त देती है।

दावत और नसीहत:

ऐ अल्लाह के बंदो! जब तुम्हें पता है कि अल्लाह तुम्हारे साथ है, तो तुम्हें किसी की परवाह नहीं करनी चाहिए। अल्लाह पर भरोसा रखो, उसी से मदद माँगो, और याद रखो — जो लोग अल्लाह के रास्ते में आने वाली रुकावटों से घबरा जाते हैं, वे कभी कामयाब नहीं होते। लेकिन जो सब्र करते हैं और अल्लाह पर भरोसा रखते हैं, उनके लिए अल्लाह हर मुश्किल से निकलने का रास्ता बनाता है। यही वह रास्ता है जो इस दुनिया में इज़्ज़त और आख़िरत में कामयाबी दिलाता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 29-33 — अल-फुरकान

29لَّقَدْ أَضَلَّنِي عَنِ الذِّكْرِ بَعْدَ إِذْ جَاءَنِي ۗ وَكَانَ الشَّيْطَانُ لِلْإِنسَانِ خَذُولًا
बेशक यक़ीनन उसने हमारे पास नसीहत आने के बाद मुझे बहकाया और शैतान तो आदमी को रुसवा करने वाला ही है
30وَقَالَ الرَّسُولُ يَا رَبِّ إِنَّ قَوْمِي اتَّخَذُوا هَٰذَا الْقُرْآنَ مَهْجُورًا
और (उस वक्त) रसूल (बारगाहे ख़ुदा वन्दी में) अर्ज़ करेगें कि ऐ मेरे परवरदिगार मेरी क़ौम ने तो इस क़ुरान को बेकार बना दिया
31وَكَذَٰلِكَ جَعَلْنَا لِكُلِّ نَبِيٍّ عَدُوًّا مِّنَ الْمُجْرِمِينَ ۗ وَكَفَىٰ بِرَبِّكَ هَادِيًا وَنَصِيرًا
और हमने (गोया ख़ुद) गुनाहगारों में से हर नबी के दुश्मन बना दिए हैं और तुम्हारा परवरदिगार हिदायत और मददगारी के लिए काफी है
32وَقَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا لَوْلَا نُزِّلَ عَلَيْهِ الْقُرْآنُ جُمْلَةً وَاحِدَةً ۚ كَذَٰلِكَ لِنُثَبِّتَ بِهِ فُؤَادَكَ ۖ وَرَتَّلْنَاهُ تَرْتِيلًا
और कुफ्फार कहने लगे कि उनके ऊपर (आख़िर) क़ुरान का कुल (एक ही दफा) क्यों नहीं नाज़िल किया गया (हमने) इस तरह इसलिए (नाज़िल किया) ताकि तुम्हारे दिल को तस्कीन देते रहें और हमने इसको ठहर ठहर कर नाज़िल किया
33وَلَا يَأْتُونَكَ بِمَثَلٍ إِلَّا جِئْنَاكَ بِالْحَقِّ وَأَحْسَنَ تَفْسِيرًا
और (ये कुफ्फार) चाहे कैसी ही (अनोखी) मसल बयान करेंगे मगर हम तुम्हारे पास (उनका) बिल्कुल ठीक और निहायत उम्दा (जवाब) बयान कर देगें
अल-फुरकानकुरान सूची
77आयत
मक्कीRevelation
31आयत

अनुवाद — अल-फुरकान 31

सूरा अल-फुरकान आयत 31 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने (गोया ख़ुद) गुनाहगारों में से हर नबी के…

सूरा आयत 31/77 — अल-फुरकान الفرقان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-फुरकान सुनें, अल-फुरकान अनुवाद, अल-फुरकान mp3, अल-फुरकान pdf. आयत 29–33. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए