अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الزُّورَ (अज़-ज़ूर): झूठ, बातिल, झूठी गवाही, और हर वह चीज़ जो सत्य के विपरीत हो। इसमें शिर्क (ईश्वर के साथ साझीदार बनाना) भी शामिल है, क्योंकि यह सबसे बड़ा झूठ है।
- اللَّغْوِ (अल-लग़्व): बेकार की बातें, व्यर्थ के काम, गलत कार्य, और हर वह चीज़ जिसमें कोई भलाई न हो।
- كِرَامًا (किरामन): सम्मान के साथ, अपनी इज़्ज़त बचाते हुए, ख़ुद को पाक और उच्च रखते हुए।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत अल्लाह के उन नेक बंदों का एक और खूबसूरत गुण बयान करती है जो जन्नत के वारिस होंगे। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि उसके प्यारे बंदे वे हैं:
- वे झूठ के पास नहीं जाते: "और जो लोग झूठ की गवाही नहीं देते" — यानी वे न तो ख़ुद झूठ बोलते हैं, न झूठी गवाही देते हैं, और न ही झूठ के मजलिसों (सभाओं) में शरीक होते हैं। वे बातिल (असत्य) के हर रूप से दूर रहते हैं। चाहे वह झूठी गवाही हो, झूठी बातें हों, या फिर शिर्क जैसा बड़ा झूठ — वे हर चीज़ से बचते हैं। यह उनकी सच्चाई और पाकीज़गी की निशानी है।
- वे व्यर्थ चीज़ों से किनारा करते हैं: "और जब वे व्यर्थ (बेकार) चीज़ों के पास से गुज़रते हैं, तो सम्मान के साथ गुज़र जाते हैं" — यानी जब वे किसी बेकार की बात, गलत काम, या ऐसी जगह से गुज़रते हैं जहाँ लोग व्यर्थ बातें कर रहे हों या गलत काम हो रहे हों, तो वे वहाँ रुकते नहीं, उसमें दिलचस्पी नहीं लेते, बल्कि अपनी इज़्ज़त और पवित्रता बचाते हुए उससे दूर निकल जाते हैं। वे उसे अपने लिए बुरा समझते हैं और दूसरों के लिए भी उसे पसंद नहीं करते।
यह आयत हमें सिखाती है कि एक सच्चे मुसलमान की पहचान यह है कि वह न केवल गुनाह से बचता है, बल्कि गुनाह के माहौल और उसकी जगहों से भी दूर रहता है। वह अपने वक़्त को कीमती समझता है और उसे बेकार की चीज़ों में बर्बाद नहीं करता। वह अपनी ज़बान, अपनी आँखों और अपने कानों को हर उस चीज़ से बचाता है जो अल्लाह को नापसंद है।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
प्यारे भाइयों और बहनों! देखिए, अल्लाह तआला अपने बंदों को कितनी ऊँची शान देता है। जो लोग अपनी ज़बान को झूठ से बचाते हैं और अपनी आँखों को गलत चीज़ों से दूर रखते हैं, अल्लाह उन्हें "किरामन" (सम्मानित) कहता है। यह दुनिया में इज़्ज़त की बात है और आख़िरत में जन्नत की खुशखबरी। आज के ज़माने में जहाँ हर तरफ़ झूठ, फरेब, और बेकार की बातों का बोलबाला है, अल्लाह के ये बंदे उन चंद लोगों में से हैं जो अपनी पहचान बचाए हुए हैं। अल्लाह हमें भी इन्हीं लोगों में शामिल करे — आमीन।
📜 आयत 70-74 — अल-फुरकान
अनुवाद — अल-फुरकान 72
सूरा अल-फुरकान आयत 72 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और वह लोग जो फरेब के पास ही नही खड़े…सूरा आयत 72/77 — अल-फुरकान الفرقان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-फुरकान सुनें, अल-फुरकान अनुवाद, अल-फुरकान mp3, अल-फुरकान pdf. आयत 70–74. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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