अल-फुरकान · 73/77
अनुवाद उच्चारण — अल-फुरकान
وَالَّذِينَ إِذَا ذُكِّرُوا بِآيَاتِ رَبِّهِمْ لَمْ يَخِرُّوا عَلَيْهَا صُمًّا وَعُمْيَانًا ۝٧٣
Wallazeena izaa zukkiroo bi Aayaati Rabbihim lam yakhirroo `alaihaa summanw wa`umyaanaa
📖 हिंदी अर्थ
और वह लोग कि जब उन्हें उनके परवरदिगार की आयतें याद दिलाई जाती हैं तो बहरे अन्धें होकर गिर नहीं पड़ते बल्कि जी लगाकर सुनते हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • ذُكِّرُوا – उन्हें नसीहत दी गई, याद दिलाई गई।
  • آيَاتِ رَبِّهِمْ – अपने रब की निशानियाँ (क़ुरआन की आयतें और क़ुदरत के नज़ारे)।
  • لَمْ يَخِرُّوا – वे नहीं गिरते, नहीं झुकते (यहाँ मतलब: वे उस पर इस तरह नहीं गुज़र जाते)।
  • صُمًّا – बहरे होकर (जो सुनकर भी न सुनें)।
  • عُمْيَانًا – अंधे होकर (जो देखकर भी न देखें)।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में अपने नेक बंदों की एक और खूबसूरत सिफ़त बयान कर रहे हैं। ये वे लोग हैं जिन्हें जब अल्लाह की आयतें सुनाई जाती हैं — चाहे वे क़ुरआन की आयतें हों या क़ुदरत के नज़ारे — तो वे उनसे ग़ाफ़िल नहीं होते, न ही उन्हें अनसुना कर देते हैं। वे उन आयतों पर इस तरह नहीं गुज़र जाते जैसे कोई बहरा और अंधा गुज़र जाए — यानी उनके कानों ने सुना ही न हो और आँखों ने देखा ही न हो।

बल्कि उनका तरीक़ा यह है कि जैसे ही उन्हें अल्लाह की कोई आयत याद दिलाई जाती है, उनका दिल उसके लिए खुल जाता है, उनकी आँखें आँसुओं से भर जाती हैं, और वे अल्लाह के सामने सजदे में झुक जाते हैं। वे आयतों को सुनकर उन पर अमल करते हैं, उनसे सबक़ लेते हैं, और उनके आगे अपने आपको पूरी तरह अल्लाह के हवाले कर देते हैं।

यही वे लोग हैं जिनके दिल ज़िंदा हैं, जिनकी आँखें देखने वाली और कान सुनने वाले हैं। वे अल्लाह की निशानियों को पढ़कर उन पर ग़ौर करते हैं, और हर आयत उनके ईमान को मज़बूत करती है। वे कभी अल्लाह की आयतों से मुँह नहीं मोड़ते, न ही उन्हें सुनकर लापरवाही बरतते हैं।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि क़ुरआन सिर्फ़ पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि सुनने, समझने और उस पर अमल करने के लिए है। जब हम क़ुरआन की कोई आयत सुनें, तो हमें चाहिए कि हमारा दिल उसके लिए नर्म हो जाए, हमारी आँखें खुल जाएँ और हम उस पर अमल करने की कोशिश करें। अल्लाह उन लोगों से बहुत प्यार करता है जो उसकी आयतों को सुनकर उनके आगे झुक जाते हैं — यानी अपने अहंकार को छोड़कर अल्लाह की बात मान लेते हैं।

आज हममें से कई लोग क़ुरआन सुनते हैं, लेकिन दिल पर कोई असर नहीं होता। इसकी वजह यह है कि हम बहरों और अंधों की तरह उसके सामने से गुज़र जाते हैं। अल्लाह हमें उन नेक बंदों में शामिल करे जो आयतों को सुनकर सजदे में गिर जाते हैं, और उन्हें अपनी ज़िंदगी में लागू करते हैं। आमीन।



📜 आयत 71-75 — अल-फुरकान

71وَمَن تَابَ وَعَمِلَ صَالِحًا فَإِنَّهُ يَتُوبُ إِلَى اللَّهِ مَتَابًا
और जिस शख्स ने तौबा कर ली और अच्छे अच्छे काम किए तो बेशक उसने ख़ुदा की तरफ (सच्चे दिल से) हक़ीकक़तन रुजु की
72وَالَّذِينَ لَا يَشْهَدُونَ الزُّورَ وَإِذَا مَرُّوا بِاللَّغْوِ مَرُّوا كِرَامًا
और वह लोग जो फरेब के पास ही नही खड़े होते और वह लोग जब किसी बेहूदा काम के पास से गुज़रते हैं तो बुर्ज़ुगाना अन्दाज़ से गुज़र जाते हैं
73وَالَّذِينَ إِذَا ذُكِّرُوا بِآيَاتِ رَبِّهِمْ لَمْ يَخِرُّوا عَلَيْهَا صُمًّا وَعُمْيَانًا
और वह लोग कि जब उन्हें उनके परवरदिगार की आयतें याद दिलाई जाती हैं तो बहरे अन्धें होकर गिर नहीं पड़ते बल्कि जी लगाकर सुनते हैं
74وَالَّذِينَ يَقُولُونَ رَبَّنَا هَبْ لَنَا مِنْ أَزْوَاجِنَا وَذُرِّيَّاتِنَا قُرَّةَ أَعْيُنٍ وَاجْعَلْنَا لِلْمُتَّقِينَ إِمَامًا
और वह लोग जो (हमसे) अर्ज़ करते हैं कि परवरदिगार हमें हमारी बीबियों और औलादों की तरफ से ऑंखों की ठन्डक अता फरमा और हमको परहेज़गारों का पेशवा बना
75أُولَٰئِكَ يُجْزَوْنَ الْغُرْفَةَ بِمَا صَبَرُوا وَيُلَقَّوْنَ فِيهَا تَحِيَّةً وَسَلَامًا
ये वह लोग हैं जिन्हें उनकी जज़ा में (बेहश्त के) बाला ख़ाने अता किए जाएँगें और वहाँ उन्हें ताज़ीम व सलाम (का बदला) पेश किया जाएगा
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अनुवाद — अल-फुरकान 73

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Tuesday, August 18, 2026

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