अश-शुआरा · 51/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
إِنَّا نَطْمَعُ أَن يَغْفِرَ لَنَا رَبُّنَا خَطَايَانَا أَن كُنَّا أَوَّلَ الْمُؤْمِنِينَ ۝٥١
Innaa natma`u ai yaghfira lanaa Rabbunna khataa yaanaaa an kunnaaa awwalal mu`mineen
📖 हिंदी अर्थ
हम चँकि सबसे पहले ईमान लाए है इसलिए ये उम्मीद रखते हैं कि हमारा परवरदिगार हमारी ख़ताएँ माफ कर देगा
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • नत्मअु (نَطْمَعُ) – हम आशा रखते हैं, हमें उम्मीद है।
  • ख़तायाना (خَطَايَانَا) – हमारी ग़लतियाँ, हमारे पाप।
  • अन कुन्ना (أَن كُنَّا) – इसलिए कि हम थे, इस बात की वजह से कि हम बन गए।
  • अव्वलल मोमिनीन (أَوَّلَ الْمُؤْمِنِينَ) – सबसे पहले ईमान लाने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब जादूगरों ने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) के सामने अपनी जादूगरी का प्रदर्शन किया और अल्लाह के आदेश से उनका जादू बेकार हो गया, तो उन्होंने सच्चाई को पहचान लिया और तुरंत ईमान ले आए। फ़िरऔन ने उन्हें सज़ा की धमकी दी, लेकिन उन्होंने बड़ी ही दृढ़ता और साहस के साथ यह घोषणा की कि उन्हें फ़िरऔन की सज़ा की कोई परवाह नहीं, क्योंकि उनका रुझान अब अपने रब की ओर है।

इस आयत में वे कह रहे हैं: "हमें अपने रब से यह आशा है कि वह हमारी सारी ग़लतियों और पापों को माफ़ कर देगा, क्योंकि हमने आपके (फ़िरऔन के) ज़माने में सबसे पहले मूसा (अलैहिस्सलाम) पर ईमान लाकर सच्चाई का साथ दिया है।"

यह एक बहुत बड़ी बात है कि जिन लोगों ने पूरी ज़िंदगी जादूगरी जैसे काम में बिताई, जब उन्हें सच्चाई का पता चला तो उन्होंने फ़ौरन उसे क़बूल कर लिया। उन्होंने यह नहीं सोचा कि हमारी पुरानी ग़लतियाँ बहुत बड़ी हैं, बल्कि उन्होंने अल्लाह की रहमत पर भरोसा किया और उससे माफ़ी की उम्मीद की। यह हमारे लिए एक बहुत बड़ा सबक़ है कि अल्लाह की रहमत उसके बंदों पर बहुत वसीअ (व्यापक) है। चाहे हमने कितनी ही ग़लतियाँ की हों, अगर हम सच्चे दिल से तौबा करें और ईमान लाएँ, तो अल्लाह हमें माफ़ कर सकता है।

इस आयत से हमें यह भी सीख मिलती है कि ईमान की सबसे पहले दौड़ लगाने वालों का दर्जा बहुत ऊँचा है। जो लोग सच्चाई को पहचानते ही उस पर अमल करना शुरू कर देते हैं, अल्लाह उनकी ग़लतियों को माफ़ करके उन्हें अपनी रहमत से नवाज़ता है। यही वजह है कि इन जादूगरों ने फ़िरऔन की धमकियों के बावजूद ईमान को नहीं छोड़ा और अल्लाह की रहमत की उम्मीद पर क़ायम रहे।

प्यारे भाइयों और बहनों! हमें भी चाहिए कि जब हमें सच्चाई का पता चले, तो हम उसे फ़ौरन क़बूल करें और अल्लाह से अपनी ग़लतियों की माफ़ी माँगें। अल्लाह की रहमत से कभी निराश न हों, क्योंकि वह बहुत बड़ा माफ़ करने वाला और दयालु है।

🎧 सुनें

📜 आयत 49-53 — अश-शुआरा

49قَالَ آمَنتُمْ لَهُ قَبْلَ أَنْ آذَنَ لَكُمْ ۖ إِنَّهُ لَكَبِيرُكُمُ الَّذِي عَلَّمَكُمُ السِّحْرَ فَلَسَوْفَ تَعْلَمُونَ ۚ لَأُقَطِّعَنَّ أَيْدِيَكُمْ وَأَرْجُلَكُم مِّنْ خِلَافٍ وَلَأُصَلِّبَنَّكُمْ أَجْمَعِينَ
फिरऔन ने कहा (हाए) क़ब्ल इसके कि मै तुम्हें इजाज़त दूँ तुम इस पर ईमान ले आए बेशक ये तुम्हारा बड़ा (गुरु है जिसने तुम सबको जादू सिखाया है तो ख़ैर) अभी तुम लोगों को (इसका नतीजा) मालूम हो जाएगा कि हम यक़ीनन तुम्हारे एक तरफ के हाथ और दूसरी तरफ के पाँव काट डालेगें और तुम सब के सब को सूली देगें
50قَالُوا لَا ضَيْرَ ۖ إِنَّا إِلَىٰ رَبِّنَا مُنقَلِبُونَ
वह बोले कुछ परवाह नही हमको तो बहरहाल अपने परवरदिगार की तरफ लौट कर जाना है
51إِنَّا نَطْمَعُ أَن يَغْفِرَ لَنَا رَبُّنَا خَطَايَانَا أَن كُنَّا أَوَّلَ الْمُؤْمِنِينَ
हम चँकि सबसे पहले ईमान लाए है इसलिए ये उम्मीद रखते हैं कि हमारा परवरदिगार हमारी ख़ताएँ माफ कर देगा
52۞ وَأَوْحَيْنَا إِلَىٰ مُوسَىٰ أَنْ أَسْرِ بِعِبَادِي إِنَّكُم مُّتَّبَعُونَ
और हमने मूसा के पास वही भेजी कि तुम मेरे बन्दों को लेकर रातों रात निकल जाओ क्योंकि तुम्हारा पीछा किया जाएगा
53فَأَرْسَلَ فِرْعَوْنُ فِي الْمَدَائِنِ حَاشِرِينَ
तब फिरऔन ने (लश्कर जमा करने के ख्याल से) तमाम शहरों में (धड़ा धड़) हरकारे रवाना किए
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अनुवाद — अश-शुआरा 51

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Tuesday, August 18, 2026

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