अश-शुआरा · 50/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
قَالُوا لَا ضَيْرَ ۖ إِنَّا إِلَىٰ رَبِّنَا مُنقَلِبُونَ ۝٥٠
Qaaloo la daira innaaa ilaa Rabbinaa munqalliboon
📖 हिंदी अर्थ
वह बोले कुछ परवाह नही हमको तो बहरहाल अपने परवरदिगार की तरफ लौट कर जाना है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لا ضَيْرَ – कोई हानि नहीं, कोई नुक़्सान नहीं।
  • مُنقَلِبُونَ – हम लौटने वाले हैं, पलटकर जाने वाले हैं।

तफ़सीर:

जब फ़िरऔन ने जादूगरों को सज़ा ए मौत की धमकी दी और कहा कि मैं तुम्हारे हाथ और पैर उल्टे काटूँगा और तुम्हें सूली पर चढ़ा दूँगा, तो उन जादूगरों ने — जिन्होंने अभी-अभी मूसा (अलैहिस्सलाम) के हाथों सत्य का चमत्कार देखा था और जिनके दिलों में ईमान की रोशनी जगमगा उठी थी — बड़े ही साहस और दृढ़ता के साथ जवाब दिया।

उन्होंने कहा: "कोई हानि नहीं!" यानी तुम जो भी सज़ा दोगे, जो भी अज़ाब दोगे, उससे हमें कोई नुक़्सान नहीं। क्योंकि यह सज़ा तो बस चंद लम्हों की है, मिटने वाली है, ख़त्म हो जाने वाली है। लेकिन जो चीज़ हमें मिली है — ईमान — वह हमेशा रहने वाली है। हमारी आँखें खुल गई हैं, हमने सत्य को पहचान लिया है।

फिर उन्होंने कहा: "हम तो अपने रब की तरफ लौटने वाले हैं।" यानी मौत के बाद हमें अपने परवरदिगार की तरफ लौटना है, और वहाँ उसकी रहमत और इनाम हमारा इंतज़ार कर रहा है। तुम्हारी सज़ा तो इसी दुनिया में ख़त्म हो जाएगी, लेकिन उसका इनाम हमेशा रहेगा। हम उस रब की तरफ लौटेंगे जो अपने बंदों पर बेहद मेहरबान है, जो सच्चे ईमान वालों को जन्नत की नेमतों से नवाज़ेगा।

यह वही लोग थे जो कुछ देर पहले फ़िरऔन के जादूगर थे और उसके दिए हुए इनामों के भूखे थे। लेकिन जब ईमान की रोशनी उनके दिलों में दाख़िल हुई, तो उन्होंने दुनिया की हर चीज़ को ठुकरा दिया। उन्होंने फ़िरऔन की धमकियों को हँसी में उड़ा दिया और सच्चाई के साथ खड़े हो गए। यही ईमान की ताक़त है — जब इंसान का दिल सच्चे रब से जुड़ जाता है, तो उसे दुनिया की कोई ताक़त डरा नहीं सकती।

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि ईमान की राह में आने वाली मुश्किलें और तकलीफें चाहे कितनी भी बड़ी हों, वे अस्थायी हैं। जो चीज़ हमेशा रहने वाली है, वह है अल्लाह की रज़ा और उसका इनाम। जिसे यह यक़ीन हो जाए कि उसकी मंज़िल अल्लाह की तरफ है, उसे दुनिया की कोई सज़ा या अज़ाब हिला नहीं सकता। यही वह दृढ़ विश्वास है जो मुसलमान को हर हाल में सब्र और इस्तिक़ामत पर क़ायम रखता है।



📜 आयत 48-52 — सूरा अश-शुआरा

48رَبِّ مُوسَىٰ وَهَارُونَ
जो मूसा और हारुन का परवरदिगार है
49قَالَ آمَنتُمْ لَهُ قَبْلَ أَنْ آذَنَ لَكُمْ ۖ إِنَّهُ لَكَبِيرُكُمُ الَّذِي عَلَّمَكُمُ السِّحْرَ فَلَسَوْفَ تَعْلَمُونَ ۚ لَأُقَطِّعَنَّ أَيْدِيَكُمْ وَأَرْجُلَكُم مِّنْ خِلَافٍ وَلَأُصَلِّبَنَّكُمْ أَجْمَعِينَ
फिरऔन ने कहा (हाए) क़ब्ल इसके कि मै तुम्हें इजाज़त दूँ तुम इस पर ईमान ले आए बेशक ये तुम्हारा बड़ा (गुरु है जिसने तुम सबको जादू सिखाया है तो ख़ैर) अभी तुम लोगों को (इसका नतीजा) मालूम हो जाएगा कि हम यक़ीनन तुम्हारे एक तरफ के हाथ और दूसरी तरफ के पाँव काट डालेगें और तुम सब के सब को सूली देगें
50قَالُوا لَا ضَيْرَ ۖ إِنَّا إِلَىٰ رَبِّنَا مُنقَلِبُونَ
वह बोले कुछ परवाह नही हमको तो बहरहाल अपने परवरदिगार की तरफ लौट कर जाना है
51إِنَّا نَطْمَعُ أَن يَغْفِرَ لَنَا رَبُّنَا خَطَايَانَا أَن كُنَّا أَوَّلَ الْمُؤْمِنِينَ
हम चँकि सबसे पहले ईमान लाए है इसलिए ये उम्मीद रखते हैं कि हमारा परवरदिगार हमारी ख़ताएँ माफ कर देगा
52۞ وَأَوْحَيْنَا إِلَىٰ مُوسَىٰ أَنْ أَسْرِ بِعِبَادِي إِنَّكُم مُّتَّبَعُونَ
और हमने मूसा के पास वही भेजी कि तुम मेरे बन्दों को लेकर रातों रात निकल जाओ क्योंकि तुम्हारा पीछा किया जाएगा
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
50आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 50

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Friday, October 2, 2026

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