अश-शुआरा · 52/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
۞ وَأَوْحَيْنَا إِلَىٰ مُوسَىٰ أَنْ أَسْرِ بِعِبَادِي إِنَّكُم مُّتَّبَعُونَ ۝٥٢
Wa awhainaaa ilaa Moosaaa an asri bi`ibaadeee innakum muttaba`oon
📖 हिंदी अर्थ
और हमने मूसा के पास वही भेजी कि तुम मेरे बन्दों को लेकर रातों रात निकल जाओ क्योंकि तुम्हारा पीछा किया जाएगा

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَسْرِ – रात में चलना, रात के समय प्रस्थान करना।
  • عِبَادِي – मेरे बंदे (यहाँ अल्लाह ने बनी इस्राईल को अपने बंदे कहकर सम्मानित किया)।
  • مُتَّبَعُونَ – तुम्हारा पीछा किया जाएगा, अर्थात शत्रु तुम्हारा पीछा करेंगे।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने अपने नबी मूसा (अलैहिस्सलाम) की ओर वह्य भेजी कि वे रात के समय अपने बंदों (बनी इस्राईल) को लेकर मिस्र से निकल जाएँ। यह आदेश उस समय दिया गया जब फ़िरऔन का ज़ुल्म अपनी इंतिहा पर था और मूसा (अलैहिस्सलाम) को डर था कि फ़िरऔन उन्हें रोक न दे। अल्लाह ने उन्हें आश्वस्त किया कि तुम्हारा पीछा अवश्य किया जाएगा, लेकिन यह पीछा तुम्हारे लिए अल्लाह की क़ुदरत का ज़ाहिर होने का ज़रिया बनेगा।

इस आयत में अल्लाह ने बनी इस्राईल को "मेरे बंदे" कहकर उन्हें सम्मानित किया, जो दर्शाता है कि जब कोई क़ौम अल्लाह के दीन पर चलती है, तो अल्लाह उन्हें अपनी ख़ास निस्बत से नवाज़ता है। यहाँ अल्लाह ने मूसा (अलैहिस्सलाम) को हिदायत दी कि वे चुपके से रात के अंधेरे में निकलें, ताकि फ़िरऔन को भनक न लगे और वे सुरक्षित समुद्र की तरफ बढ़ सकें।

यह वाक़या हमें सिखाता है कि अल्लाह पर भरोसा रखते हुए हिकमत और तदबीर से काम लेना चाहिए। अल्लाह अपने बंदों की हिफ़ाज़त करता है, चाहे रास्ते में कितनी ही मुश्किलें क्यों न आएँ। फ़िरऔन का पीछा करना और उसका लश्कर — यह सब अल्लाह के इंतज़ाम का हिस्सा था, ताकि उसकी क़ुदरत के नमूने सामने आएँ और ईमानवालों का दिल मज़बूत हो।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि जब अल्लाह किसी काम का हुक्म देता है, तो वह उसके नतीजे की ज़िम्मेदारी भी लेता है। मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अल्लाह के हुक्म पर अमल किया और अल्लाह ने उन्हें फ़िरऔन के ज़ुल्म से निजात दिलाई। यह हमारे लिए भी रहनुमाई है कि हम अल्लाह के हुक्मों पर अमल करें और उसकी रहमत पर भरोसा रखें। अल्लाह कभी अपने बंदों को अकेला नहीं छोड़ता, बल्कि हर मुश्किल में उनका साथ देता है और उनके लिए रास्ते खोलता है।



📜 आयत 50-54 — सूरा अश-शुआरा

50قَالُوا لَا ضَيْرَ ۖ إِنَّا إِلَىٰ رَبِّنَا مُنقَلِبُونَ
वह बोले कुछ परवाह नही हमको तो बहरहाल अपने परवरदिगार की तरफ लौट कर जाना है
51إِنَّا نَطْمَعُ أَن يَغْفِرَ لَنَا رَبُّنَا خَطَايَانَا أَن كُنَّا أَوَّلَ الْمُؤْمِنِينَ
हम चँकि सबसे पहले ईमान लाए है इसलिए ये उम्मीद रखते हैं कि हमारा परवरदिगार हमारी ख़ताएँ माफ कर देगा
52۞ وَأَوْحَيْنَا إِلَىٰ مُوسَىٰ أَنْ أَسْرِ بِعِبَادِي إِنَّكُم مُّتَّبَعُونَ
और हमने मूसा के पास वही भेजी कि तुम मेरे बन्दों को लेकर रातों रात निकल जाओ क्योंकि तुम्हारा पीछा किया जाएगा
53فَأَرْسَلَ فِرْعَوْنُ فِي الْمَدَائِنِ حَاشِرِينَ
तब फिरऔन ने (लश्कर जमा करने के ख्याल से) तमाम शहरों में (धड़ा धड़) हरकारे रवाना किए
54إِنَّ هَٰؤُلَاءِ لَشِرْذِمَةٌ قَلِيلُونَ
(और कहा) कि ये लोग मूसा के साथ बनी इसराइल थोड़ी सी (मुट्ठी भर की) जमाअत हैं
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
52आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 52

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Friday, October 2, 2026

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