अन-नमल · 76/93
अनुवाद उच्चारण — अन-नमल
إِنَّ هَٰذَا الْقُرْآنَ يَقُصُّ عَلَىٰ بَنِي إِسْرَائِيلَ أَكْثَرَ الَّذِي هُمْ فِيهِ يَخْتَلِفُونَ ۝٧٦
Inna haazal Qur-aana yaqussu `alaa Baneee israaa`eela aksaral lazee hum feehi yakhtalifoon
📖 हिंदी अर्थ
इसमें भी शक नहीं कि ये क़ुरान बनी इसराइल पर उनकी अक्सर बातों को जिन में ये इख्तेलाफ़ करते हैं ज़ाहिर कर देता है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يَقُصُّ — सुनाना, बयान करना
  • بَنِي إِسْرَائِيلَ — हज़रत याक़ूब (अलैहिस्सलाम) की औलाद, यहूदी
  • أَكْثَرَ الَّذِي هُمْ فِيهِ يَخْتَلِفُونَ — अधिकतर वे चीज़ें जिनमें वे मतभेद रखते हैं

तफ़सीर:

यह आयत मक्का के काफ़िरों को संबोधित करते हुए बताती है कि यह क़ुरआन कोई साधारण किताब नहीं, बल्कि वह सत्य और सच्चाई का आईना है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यह क़ुरआन, जो हमारे प्यारे नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पर उतारा गया है, बनी इस्राईल (यहूदियों) को उन अधिकतर मामलों की सच्चाई बताता है जिनमें वे आपस में मतभेद और झगड़े करते हैं।

यहूदी अपने धर्म में कई बातों पर अलग-अलग राय रखते थे — जैसे हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) के बारे में, उनके जन्म, उनके उठाए जाने, उनके मरने या न मरने के मसले पर, और तौरात की कई आयतों की ताबीर (व्याख्या) में। क़ुरआन ने इन सभी विवादों में वही बताया जो सच्चाई है, और जो अल्लाह की ओर से तयशुदा है।

यह आयत हमें यह सिखाती है कि क़ुरआन सिर्फ़ मुसलमानों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत के लिए हिदायत और सच्चाई का ज़रिया है। जो लोग सच्चाई की तलाश में हैं, वे क़ुरआन में उसे पा सकते हैं। यह किताब उन सारे झगड़ों और मतभेदों को ख़त्म करने की ताक़त रखती है जो इंसानों के बीच पैदा हो जाते हैं।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह हमारे लिए कितनी बड़ी नेमत है कि अल्लाह ने हमें ऐसी किताब दी जो हर विवाद में सच्चाई बताती है। आओ, हम क़ुरआन को पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें, ताकि हमारे जीवन के सारे झगड़े ख़त्म हों और हम सच्चाई की राह पर चलें। क़ुरआन वह रहनुमा है जो हमें जहालत की अंधेरों से निकालकर हिदायत की रोशनी की ओर ले जाता है।



📜 आयत 74-78 — अन-नमल

74وَإِنَّ رَبَّكَ لَيَعْلَمُ مَا تُكِنُّ صُدُورُهُمْ وَمَا يُعْلِنُونَ
और इसमें तो शक नहीं जो बातें उनके दिलों में पोशीदा हैं और जो कुछ ये एलानिया करते हैं तुम्हारा परवरदिगार यक़ीनी जानता है
75وَمَا مِنْ غَائِبَةٍ فِي السَّمَاءِ وَالْأَرْضِ إِلَّا فِي كِتَابٍ مُّبِينٍ
और आसमान व ज़मीन में कोई ऐसी बात पोशीदा नहीं जो वाज़ेए व रौशन किताब (लौहे महफूज़) में (लिखी) मौजूद न हो
76إِنَّ هَٰذَا الْقُرْآنَ يَقُصُّ عَلَىٰ بَنِي إِسْرَائِيلَ أَكْثَرَ الَّذِي هُمْ فِيهِ يَخْتَلِفُونَ
इसमें भी शक नहीं कि ये क़ुरान बनी इसराइल पर उनकी अक्सर बातों को जिन में ये इख्तेलाफ़ करते हैं ज़ाहिर कर देता है
77وَإِنَّهُ لَهُدًى وَرَحْمَةٌ لِّلْمُؤْمِنِينَ
और इसमें भी शक नहीं कि ये कुरान ईमानदारों के वास्ते अज़सरतापा हिदायत व रहमत है
78إِنَّ رَبَّكَ يَقْضِي بَيْنَهُم بِحُكْمِهِ ۚ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْعَلِيمُ
(ऐ रसूल) बेशक तुम्हारा परवरदिगार अपने हुक्म से उनके आपस (के झगड़ों) का फैसला कर देगा और वह (सब पर) ग़ालिब और वाक़िफकार है
अन-नमलकुरान सूची
93आयत
मक्कीRevelation
76आयत

अनुवाद — अन-नमल 76

सूरा अन-नमल आयत 76 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : इसमें भी शक नहीं कि ये क़ुरान बनी इसराइल पर…

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पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

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