अन-नमल · 84/93
अनुवाद उच्चारण — अन-नमल
حَتَّىٰ إِذَا جَاءُوا قَالَ أَكَذَّبْتُم بِآيَاتِي وَلَمْ تُحِيطُوا بِهَا عِلْمًا أَمَّاذَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ ۝٨٤
Hattaaa izaa jaaa`oo qaala akazzabtum bi Aayaatee wa lam tuheetoo bihaa `ilman ammaazaa kuntum ta`maloon
📖 हिंदी अर्थ
यहाँ तक कि जब वह सब (ख़ुदा के सामने) आएँगें और ख़ुदा उनसे कहेगा क्या तुम ने हमारी आयतों को बगैर अच्छी तरह समझे बूझे झुठलाया-भला तुम क्या क्या करते थे और चूँकि ये लोग ज़ुल्म किया करते थे

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَكَذَّبْتُم – क्या तुमने झुठलाया?
  • آيَاتِي – मेरी आयतें (निशानियाँ और प्रमाण)
  • وَلَمْ تُحِيطُوا بِهَا عِلْمًا – और तुमने उन्हें ज्ञान से घेरा नहीं (अर्थात् उनकी सत्यता या असत्यता का पूर्ण ज्ञान प्राप्त नहीं किया)
  • أَمَّاذَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ – बल्कि तुम क्या करते रहे?

तफ़सीर (व्याख्या):

जब सभी लोग हिसाब के मैदान में इकट्ठे हो जाएँगे, और हर उम्मत के वे लोग भी आ जाएँगे जिन्होंने अल्लाह की आयतों को झुठलाया था, तो अल्लाह तआला उन्हें डाँटते हुए और उन्हें बेनकाब करते हुए फरमाएगा: "क्या तुमने मेरी आयतों को झुठलाया?" — यानी जो आयतें मैंने अपने रसूलों पर उतारीं, और जो निशानियाँ मैंने अपनी वहदानियत (एकता) और अपनी इबादत के हक़दार होने पर कायम कीं, क्या तुमने उन सबको झुठला दिया?

फिर अल्लाह उनसे कहता है: "और तुमने उन्हें ज्ञान से घेरा भी नहीं" — अर्थात् तुमने न तो उन आयतों पर ग़ौर-फ़िक्र किया, न उनकी सत्यता को जानने की कोशिश की, न ही तुम्हें यह ज्ञान था कि वे बातिल हैं। तुमने बिना किसी जाँच-पड़ताल के, सिर्फ अहंकार और अंधी दुश्मनी की बिना पर उन्हें झुठला दिया। यह उनके खिलाफ सबसे बड़ी गवाही है कि उनका इनकार किसी दलील पर आधारित नहीं था, बल्कि महज़ हठधर्मी और जिद थी।

फिर अल्लाह फरमाता है: "बल्कि तुम क्या करते रहे?" — यह एक ऐसा प्रश्न है जो उन्हें शर्मिंदा करने के लिए है। यानी अगर तुमने आयतों पर ईमान नहीं लाया, तो बताओ तुम दुनिया में क्या करते रहे? क्या तुमने कोई अच्छा काम किया? क्या तुमने अल्लाह की इबादत की? क्या तुमने लोगों के हक़ अदा किए? यह प्रश्न उन्हें जवाब देने से असमर्थ कर देगा, क्योंकि उनके पास कोई हुज्जत नहीं होगी।

इस आयत से हमें सीख मिलती है कि अल्लाह की आयतों को झुठलाने से पहले इंसान को उन पर ग़ौर करना चाहिए, उन्हें समझने की कोशिश करनी चाहिए। जो व्यक्ति बिना ज्ञान के किसी चीज़ को झुठलाता है, वह क़ियामत के दिन शर्मिंदा होगा। अल्लाह हमें सत्य को समझने और उस पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 82-86 — अन-नमल

82۞ وَإِذَا وَقَعَ الْقَوْلُ عَلَيْهِمْ أَخْرَجْنَا لَهُمْ دَابَّةً مِّنَ الْأَرْضِ تُكَلِّمُهُمْ أَنَّ النَّاسَ كَانُوا بِآيَاتِنَا لَا يُوقِنُونَ
फिर वही लोग तो मानने वाले भी हैं जब उन लोगों पर (क़यामत का) वायदा पूरा होगा तो हम उनके वास्ते ज़मीन से एक चलने वाला निकाल खड़ा करेंगे जो उनसे ये बाते करेंगा कि (फलॉ फला) लोग हमारी आयतो का यक़ीन नहीं रखते थे
83وَيَوْمَ نَحْشُرُ مِن كُلِّ أُمَّةٍ فَوْجًا مِّمَّن يُكَذِّبُ بِآيَاتِنَا فَهُمْ يُوزَعُونَ
और (उस दिन को याद करो) जिस दिन हम हर उम्मत से एक ऐसे गिरोह को जो हमारी आयतों को झुठलाया करते थे (ज़िन्दा करके) जमा करेंगे फिर उन की टोलियाँ अलहदा अलहदा करेंगे
84حَتَّىٰ إِذَا جَاءُوا قَالَ أَكَذَّبْتُم بِآيَاتِي وَلَمْ تُحِيطُوا بِهَا عِلْمًا أَمَّاذَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
यहाँ तक कि जब वह सब (ख़ुदा के सामने) आएँगें और ख़ुदा उनसे कहेगा क्या तुम ने हमारी आयतों को बगैर अच्छी तरह समझे बूझे झुठलाया-भला तुम क्या क्या करते थे और चूँकि ये लोग ज़ुल्म किया करते थे
85وَوَقَعَ الْقَوْلُ عَلَيْهِم بِمَا ظَلَمُوا فَهُمْ لَا يَنطِقُونَ
इन पर (अज़ाब का) वायदा पूरा हो गया फिर ये लोग कुछ बोल भी तो न सकेंगें
86أَلَمْ يَرَوْا أَنَّا جَعَلْنَا اللَّيْلَ لِيَسْكُنُوا فِيهِ وَالنَّهَارَ مُبْصِرًا ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ
क्या इन लोगों ने ये भी न देखा कि हमने रात को इसलिए बनाया कि ये लोग इसमे चैन करें और दिन को रौशन (ताकि देखभाल करे) बेशक इसमें ईमान लाने वालों के लिए (कुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
अन-नमलकुरान सूची
93आयत
मक्कीRevelation
84आयत

अनुवाद — अन-नमल 84

सूरा अन-नमल आयत 84 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : यहाँ तक कि जब वह सब (ख़ुदा के सामने) आएँगें…

सूरा आयत 84/93 — अन-नमल النمل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नमल सुनें, अन-नमल अनुवाद, अन-नमल mp3, अन-नमल pdf. आयत 82–86. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए