अन-नमल · 83/93
अनुवाद उच्चारण — अन-नमल
وَيَوْمَ نَحْشُرُ مِن كُلِّ أُمَّةٍ فَوْجًا مِّمَّن يُكَذِّبُ بِآيَاتِنَا فَهُمْ يُوزَعُونَ ۝٨٣
Wa Yawma nahshuru min kulli ummmatin fawjam mim many-yukazzibu bi Aayaatinaa fahum yooza`oon
📖 हिंदी अर्थ
और (उस दिन को याद करो) जिस दिन हम हर उम्मत से एक ऐसे गिरोह को जो हमारी आयतों को झुठलाया करते थे (ज़िन्दा करके) जमा करेंगे फिर उन की टोलियाँ अलहदा अलहदा करेंगे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • نَحْشُرُ: हम इकट्ठा करेंगे।
  • فَوْجًا: एक समूह या जत्था।
  • يُكَذِّبُ: झुठलाता है।
  • يُوزَعُونَ: पहले को आख़िर पर रोका जाता है, यानी सबको एक जगह इकट्ठा किया जाता है और किसी को आगे नहीं बढ़ने दिया जाता।

तफ़सीर:

ऐ नबी! आप उस दिन को याद कीजिए जब हम हर उम्मत (समुदाय) में से उन लोगों के एक समूह को इकट्ठा करेंगे जो हमारी आयतों (निशानियों) को झुठलाते थे। यह इकट्ठा करना आम क़यामत के हश्र से पहले एक ख़ास मरहले में होगा, जब हर ज़माने के मुंकिरीन (इनकार करने वालों) के सरदारों और बड़े लोगों को अलग निकालकर जमा किया जाएगा। फिर उन्हें रोक रोककर एक जगह लाया जाएगा, ताकि वे सब मिल जाएं और फिर उन्हें हिसाब के लिए ले जाया जाए।

यह वह दिन होगा जब हर उम्मत के झुठलाने वाले, चाहे वे कितने ही अलग-अलग ज़मानों और इलाकों में रहे हों, सबको एक साथ जमा कर दिया जाएगा। उनके आगे-पीछे को रोककर उन्हें इस तरह इकट्ठा किया जाएगा कि कोई भी भाग न सके, और वे सब मजबूरन हिसाब के मैदान में हाज़िर होंगे।

दावती पहलू:

यह आयत हमें अल्लाह की क़ुदरत और उसके इंसाफ़ की याद दिलाती है। जो लोग आज अल्लाह की आयतों को झुठलाते हैं और उनका मज़ाक उड़ाते हैं, उन्हें उस दिन ज़रूर अपने किए की सज़ा मिलेगी। लेकिन अल्लाह रहीम और करीम है — उसने हमें मौका दिया है कि हम अपनी ज़िंदगी में तौबा कर लें, अपने अमल दुरुस्त कर लें। यह आयत हमें सचेत करती है कि हम अल्लाह की निशानियों पर ग़ौर करें, कुरान पर अमल करें, और उस दिन के लिए तैयारी करें जब कोई बहाना काम नहीं आएगा। अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा अभी खुला है — आज ही उसकी तरफ रुजू कर लें, क्योंकि कल का दिन हिसाब का दिन होगा।

🎧 सुनें

📜 आयत 81-85 — अन-नमल

81وَمَا أَنتَ بِهَادِي الْعُمْيِ عَن ضَلَالَتِهِمْ ۖ إِن تُسْمِعُ إِلَّا مَن يُؤْمِنُ بِآيَاتِنَا فَهُم مُّسْلِمُونَ
और न तुम अंधें को उनकी गुमराही से राह पर ला सकते हो तुम तो बस उन्हीं लोगों को (अपनी बात) सुना सकते हो जो हमारी आयतों पर ईमान रखते हैं
82۞ وَإِذَا وَقَعَ الْقَوْلُ عَلَيْهِمْ أَخْرَجْنَا لَهُمْ دَابَّةً مِّنَ الْأَرْضِ تُكَلِّمُهُمْ أَنَّ النَّاسَ كَانُوا بِآيَاتِنَا لَا يُوقِنُونَ
फिर वही लोग तो मानने वाले भी हैं जब उन लोगों पर (क़यामत का) वायदा पूरा होगा तो हम उनके वास्ते ज़मीन से एक चलने वाला निकाल खड़ा करेंगे जो उनसे ये बाते करेंगा कि (फलॉ फला) लोग हमारी आयतो का यक़ीन नहीं रखते थे
83وَيَوْمَ نَحْشُرُ مِن كُلِّ أُمَّةٍ فَوْجًا مِّمَّن يُكَذِّبُ بِآيَاتِنَا فَهُمْ يُوزَعُونَ
और (उस दिन को याद करो) जिस दिन हम हर उम्मत से एक ऐसे गिरोह को जो हमारी आयतों को झुठलाया करते थे (ज़िन्दा करके) जमा करेंगे फिर उन की टोलियाँ अलहदा अलहदा करेंगे
84حَتَّىٰ إِذَا جَاءُوا قَالَ أَكَذَّبْتُم بِآيَاتِي وَلَمْ تُحِيطُوا بِهَا عِلْمًا أَمَّاذَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
यहाँ तक कि जब वह सब (ख़ुदा के सामने) आएँगें और ख़ुदा उनसे कहेगा क्या तुम ने हमारी आयतों को बगैर अच्छी तरह समझे बूझे झुठलाया-भला तुम क्या क्या करते थे और चूँकि ये लोग ज़ुल्म किया करते थे
85وَوَقَعَ الْقَوْلُ عَلَيْهِم بِمَا ظَلَمُوا فَهُمْ لَا يَنطِقُونَ
इन पर (अज़ाब का) वायदा पूरा हो गया फिर ये लोग कुछ बोल भी तो न सकेंगें
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अनुवाद — अन-नमल 83

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Tuesday, August 18, 2026

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