अन-नमल · 85/93
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नमल
وَوَقَعَ الْقَوْلُ عَلَيْهِم بِمَا ظَلَمُوا فَهُمْ لَا يَنطِقُونَ ۝٨٥
Wa waqa`al qawlu `alaihim bimaa zalamoo fahum laa yantiqoon
📖 हिंदी अर्थ
इन पर (अज़ाब का) वायदा पूरा हो गया फिर ये लोग कुछ बोल भी तो न सकेंगें

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • "वक़अल क़ौलु" — अज़ाब का वादा पूरा होना, यानी अल्लाह की ओर से सज़ा का फ़ैसला लागू हो जाना।
  • "बिमा ज़लमू" — उनके ज़ुल्म की वजह से, यानी कुफ़्र और झुठलाने के कारण।
  • "ला यंतिक़ून" — वे बोल न सकेंगे, कोई बहाना या सफ़ाई पेश नहीं कर पाएँगे।

तफ़सीर:

जब क़यामत का दिन आएगा और हर उम्मत से वे लोग इकट्ठे किए जाएँगे जिन्होंने अल्लाह की आयतों को झुठलाया था, तो उन पर अल्लाह का अज़ाब और यातना का फ़ैसला नाज़िल हो जाएगा। यह सज़ा उनके उस ज़ुल्म की वजह से होगी जो उन्होंने दुनिया में किया — यानी उन्होंने अल्लाह की निशानियों को नकारा, उसके रसूलों को झुठलाया और हक़ के मुक़ाबले में सरकशी की। उनका यह ज़ुल्म इतना बड़ा था कि उन्होंने बिना किसी इल्म और दलील के अल्लाह की आयतों को ठुकरा दिया, जबकि सच्चाई उनके सामने साफ़ थी।

उस दिन उनके मुँह बंद कर दिए जाएँगे, वे कोई बहाना नहीं बना पाएँगे, कोई सफ़ाई पेश नहीं कर पाएँगे, और न ही कोई तर्क उनके काम आएगा। उनकी ज़ुबानें खामोश होंगी, क्योंकि उनके पास कहने के लिए कुछ भी सच्चा नहीं होगा। यह उनकी सबसे बड़ी रुसवाई और शर्मिंदगी का लम्हा होगा — जो लोग दुनिया में बहुत बोलते थे, दलीलें बनाते थे और हक़ को दबाने की कोशिश करते थे, आज वही लोग बिल्कुल चुप खड़े होंगे, उनकी ज़ुबान पर ताले लग जाएँगे।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि अल्लाह की निशानियों को नकारना और उसके दीन से मुँह मोड़ना कितना बड़ा ज़ुल्म है। लेकिन साथ ही यह भी बताती है कि अल्लाह ने हमें मौका दिया है — आज हमारी ज़ुबान खुली है, हम तौबा कर सकते हैं, हम अपने रब की तरफ लौट सकते हैं। आज अगर हम अपनी ज़ुबान से सच्चाई बोलें, अपने दिल से ईमान लाएँ और अपने अमल को सुधार लें, तो क़यामत के दिन हमें बोलने का मौका मिलेगा, हमारी ज़ुबानें गवाही देंगी, और हमारे चेहरे रोशन होंगे। यही वह दिन है जब मोमिनों की आँखें ठंडी होंगी और वे अपने रब की रहमत में दाखिल होंगे। आइए, हम उस दिन की शर्मिंदगी से बचने के लिए आज ही अपने जीवन को सुधार लें, क्योंकि आज का फ़ैसला हमारे हाथ में है, कल तो सिर्फ़ नतीजा होगा।



📜 आयत 83-87 — सूरा अन-नमल

83وَيَوْمَ نَحْشُرُ مِن كُلِّ أُمَّةٍ فَوْجًا مِّمَّن يُكَذِّبُ بِآيَاتِنَا فَهُمْ يُوزَعُونَ
और (उस दिन को याद करो) जिस दिन हम हर उम्मत से एक ऐसे गिरोह को जो हमारी आयतों को झुठलाया करते थे (ज़िन्दा करके) जमा करेंगे फिर उन की टोलियाँ अलहदा अलहदा करेंगे
84حَتَّىٰ إِذَا جَاءُوا قَالَ أَكَذَّبْتُم بِآيَاتِي وَلَمْ تُحِيطُوا بِهَا عِلْمًا أَمَّاذَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
यहाँ तक कि जब वह सब (ख़ुदा के सामने) आएँगें और ख़ुदा उनसे कहेगा क्या तुम ने हमारी आयतों को बगैर अच्छी तरह समझे बूझे झुठलाया-भला तुम क्या क्या करते थे और चूँकि ये लोग ज़ुल्म किया करते थे
85وَوَقَعَ الْقَوْلُ عَلَيْهِم بِمَا ظَلَمُوا فَهُمْ لَا يَنطِقُونَ
इन पर (अज़ाब का) वायदा पूरा हो गया फिर ये लोग कुछ बोल भी तो न सकेंगें
86أَلَمْ يَرَوْا أَنَّا جَعَلْنَا اللَّيْلَ لِيَسْكُنُوا فِيهِ وَالنَّهَارَ مُبْصِرًا ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ
क्या इन लोगों ने ये भी न देखा कि हमने रात को इसलिए बनाया कि ये लोग इसमे चैन करें और दिन को रौशन (ताकि देखभाल करे) बेशक इसमें ईमान लाने वालों के लिए (कुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
87وَيَوْمَ يُنفَخُ فِي الصُّورِ فَفَزِعَ مَن فِي السَّمَاوَاتِ وَمَن فِي الْأَرْضِ إِلَّا مَن شَاءَ اللَّهُ ۚ وَكُلٌّ أَتَوْهُ دَاخِرِينَ
और (उस दिन याद करो) जिस दिन सूर फूँका जाएगा तो जितने लोग आसमानों मे हैं और जितने लोग ज़मीन में हैं (ग़रज़ सब के सब) दहल जाएंगें मगर जिस शख्स को ख़ुदा चाहे (वो अलबत्ता मुतमइन रहेगा) और सब लोग उसकी बारगाह में ज़िल्लत व आजिज़ी की हालत में हाज़िर होगें
अन-नमलकुरान सूची
93आयत
मक्कीअवतरण स्थान
85आयत

अनुवाद — अन-नमल 85

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Friday, October 2, 2026

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