Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- "वक़अल क़ौलु" — अज़ाब का वादा पूरा होना, यानी अल्लाह की ओर से सज़ा का फ़ैसला लागू हो जाना।
- "बिमा ज़लमू" — उनके ज़ुल्म की वजह से, यानी कुफ़्र और झुठलाने के कारण।
- "ला यंतिक़ून" — वे बोल न सकेंगे, कोई बहाना या सफ़ाई पेश नहीं कर पाएँगे।
तफ़सीर:
जब क़यामत का दिन आएगा और हर उम्मत से वे लोग इकट्ठे किए जाएँगे जिन्होंने अल्लाह की आयतों को झुठलाया था, तो उन पर अल्लाह का अज़ाब और यातना का फ़ैसला नाज़िल हो जाएगा। यह सज़ा उनके उस ज़ुल्म की वजह से होगी जो उन्होंने दुनिया में किया — यानी उन्होंने अल्लाह की निशानियों को नकारा, उसके रसूलों को झुठलाया और हक़ के मुक़ाबले में सरकशी की। उनका यह ज़ुल्म इतना बड़ा था कि उन्होंने बिना किसी इल्म और दलील के अल्लाह की आयतों को ठुकरा दिया, जबकि सच्चाई उनके सामने साफ़ थी।
उस दिन उनके मुँह बंद कर दिए जाएँगे, वे कोई बहाना नहीं बना पाएँगे, कोई सफ़ाई पेश नहीं कर पाएँगे, और न ही कोई तर्क उनके काम आएगा। उनकी ज़ुबानें खामोश होंगी, क्योंकि उनके पास कहने के लिए कुछ भी सच्चा नहीं होगा। यह उनकी सबसे बड़ी रुसवाई और शर्मिंदगी का लम्हा होगा — जो लोग दुनिया में बहुत बोलते थे, दलीलें बनाते थे और हक़ को दबाने की कोशिश करते थे, आज वही लोग बिल्कुल चुप खड़े होंगे, उनकी ज़ुबान पर ताले लग जाएँगे।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि अल्लाह की निशानियों को नकारना और उसके दीन से मुँह मोड़ना कितना बड़ा ज़ुल्म है। लेकिन साथ ही यह भी बताती है कि अल्लाह ने हमें मौका दिया है — आज हमारी ज़ुबान खुली है, हम तौबा कर सकते हैं, हम अपने रब की तरफ लौट सकते हैं। आज अगर हम अपनी ज़ुबान से सच्चाई बोलें, अपने दिल से ईमान लाएँ और अपने अमल को सुधार लें, तो क़यामत के दिन हमें बोलने का मौका मिलेगा, हमारी ज़ुबानें गवाही देंगी, और हमारे चेहरे रोशन होंगे। यही वह दिन है जब मोमिनों की आँखें ठंडी होंगी और वे अपने रब की रहमत में दाखिल होंगे। आइए, हम उस दिन की शर्मिंदगी से बचने के लिए आज ही अपने जीवन को सुधार लें, क्योंकि आज का फ़ैसला हमारे हाथ में है, कल तो सिर्फ़ नतीजा होगा।
📜 आयत 83-87 — सूरा अन-नमल
अनुवाद — अन-नमल 85
सूरा अन-नमल आयत 85 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : इन पर (अज़ाब का) वायदा पूरा हो गया फिर ये…सूरा आयत 85/93 — सूरा अन-नमल النمل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नमल सुनें, सूरा अन-नमल अनुवाद, सूरा अन-नमल mp3, सूरा अन-नमल pdf. आयत 83–87. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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