Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَئِمَّةً (इमाम/नेता): यहाँ अर्थ है पथ-भ्रष्टता और गुमराही के नेता, जिनकी लोग अनुसरण करते हैं।
- يَدْعُونَ إِلَى النَّارِ (आग की ओर बुलाना): अर्थात अपने कुफ्र और गुमराही के रास्ते से लोगों को नरक की ओर ले जाना।
- لَا يُنصَرُونَ (उनकी मदद नहीं की जाएगी): अर्थात क़ियामत के दिन उन्हें अल्लाह के अज़ाब से कोई नहीं बचा सकेगा।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने फ़िरऔन और उसकी क़ौम को गुमराही के ऐसे नेता बनाया जो लोगों को अपने कुफ्र, शिर्क और बुरे आचरण के ज़रिए नरक की ओर बुलाते थे। ये वो लोग थे जिन्होंने अल्लाह के रसूल मूसा (अलैहिस्सलाम) को झुठलाया और अपनी सरकशी व ज़ुल्म में हद से गुज़र गए। उन्होंने न सिर्फ़ खुद गुमराही का रास्ता अपनाया, बल्कि दूसरों को भी उसी रास्ते पर चलने की दावत दी, ताकि वे भी उन्हीं की तरह अल्लाह के अज़ाब के हक़दार बनें।
क़ियामत के दिन इन नेताओं की हालत बेहद दयनीय होगी — उन्हें न कोई मदद करेगा, न कोई उन्हें अल्लाह के अज़ाब से बचा सकेगा। बल्कि हदीस में आया है कि ये गुमराही के नेता अपने पीछे चलने वालों के गुनाहों का बोझ भी उठाएँगे, और उनका अज़ाब और भी बढ़ जाएगा। यह अल्लाह का सख़्त अज़ाब है उन लोगों के लिए जो दूसरों को गुमराह करते हैं।
दावती पहलू:
यह आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी सीख और चेतावनी है। हर इंसान चाहे वह जाने-अनजाने में किसी की ज़िंदगी पर असर डालता है — माता-पिता अपनी औलाद पर, उस्ताद अपने शागिर्दों पर, दोस्त अपने दोस्तों पर। अगर हमारा असर लोगों को अच्छाई, नेकी और अल्लाह की इबादत की ओर ले जाए, तो हम जन्नत के रास्ते के रहनुमा होंगे और हमें उनके अच्छे कर्मों का सवाब भी मिलेगा। लेकिन अगर हमारा असर लोगों को गुमराही, बुराई और अल्लाह की नाफ़रमानी की ओर ले जाए, तो हम उन्हीं नेताओं की तरह होंगे जिन्हें क़ियामत के दिन कोई मदद नहीं करेगा।
इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह के हुक्मों के मुताबिक बनाएँ और दूसरों के लिए नेकी और हिदायत का ज़रिया बनें। याद रखें, हमारा हर अच्छा काम दूसरों के लिए रोशनी बन सकता है, और हर बुरा काम दूसरों के लिए अंधेरा। आइए हम उन नेताओं में से न हों जो नरक की ओर बुलाते हैं, बल्कि उन लोगों में से हों जो जन्नत की ओर बुलाते हैं — और यही सबसे बड़ी कामयाबी है।
📜 आयत 39-43 — सूरा अल-क़सस
अनुवाद — अल-क़सस 41
सूरा अल-क़सस आयत 41 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने उनको (गुमराहों का) पेशवा बनाया कि (लोगों को)…सूरा आयत 41/88 — सूरा अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-क़सस सुनें, सूरा अल-क़सस अनुवाद, सूरा अल-क़सस mp3, सूरा अल-क़सस pdf. आयत 39–43. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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