अल-क़सस · 41/88
अनुवाद उच्चारण — अल-क़सस
وَجَعَلْنَاهُمْ أَئِمَّةً يَدْعُونَ إِلَى النَّارِ ۖ وَيَوْمَ الْقِيَامَةِ لَا يُنصَرُونَ ۝٤١
Wa ja`alnaahum a`immatany yad`oona ilan Naari wa Yawmal Qiyaamati laa yunsaroon
📖 हिंदी अर्थ
और हमने उनको (गुमराहों का) पेशवा बनाया कि (लोगों को) जहन्नुम की तरफ बुलाते है और क़यामत के दिन (ऐसे बेकस होगें कि) उनको किसी तरह की मदद न दी जाएगी
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَئِمَّةً (इमाम/नेता): यहाँ अर्थ है पथ-भ्रष्टता और गुमराही के नेता, जिनकी लोग अनुसरण करते हैं।
  • يَدْعُونَ إِلَى النَّارِ (आग की ओर बुलाना): अर्थात अपने कुफ्र और गुमराही के रास्ते से लोगों को नरक की ओर ले जाना।
  • لَا يُنصَرُونَ (उनकी मदद नहीं की जाएगी): अर्थात क़ियामत के दिन उन्हें अल्लाह के अज़ाब से कोई नहीं बचा सकेगा।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने फ़िरऔन और उसकी क़ौम को गुमराही के ऐसे नेता बनाया जो लोगों को अपने कुफ्र, शिर्क और बुरे आचरण के ज़रिए नरक की ओर बुलाते थे। ये वो लोग थे जिन्होंने अल्लाह के रसूल मूसा (अलैहिस्सलाम) को झुठलाया और अपनी सरकशी व ज़ुल्म में हद से गुज़र गए। उन्होंने न सिर्फ़ खुद गुमराही का रास्ता अपनाया, बल्कि दूसरों को भी उसी रास्ते पर चलने की दावत दी, ताकि वे भी उन्हीं की तरह अल्लाह के अज़ाब के हक़दार बनें।

क़ियामत के दिन इन नेताओं की हालत बेहद दयनीय होगी — उन्हें न कोई मदद करेगा, न कोई उन्हें अल्लाह के अज़ाब से बचा सकेगा। बल्कि हदीस में आया है कि ये गुमराही के नेता अपने पीछे चलने वालों के गुनाहों का बोझ भी उठाएँगे, और उनका अज़ाब और भी बढ़ जाएगा। यह अल्लाह का सख़्त अज़ाब है उन लोगों के लिए जो दूसरों को गुमराह करते हैं।


दावती पहलू:

यह आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी सीख और चेतावनी है। हर इंसान चाहे वह जाने-अनजाने में किसी की ज़िंदगी पर असर डालता है — माता-पिता अपनी औलाद पर, उस्ताद अपने शागिर्दों पर, दोस्त अपने दोस्तों पर। अगर हमारा असर लोगों को अच्छाई, नेकी और अल्लाह की इबादत की ओर ले जाए, तो हम जन्नत के रास्ते के रहनुमा होंगे और हमें उनके अच्छे कर्मों का सवाब भी मिलेगा। लेकिन अगर हमारा असर लोगों को गुमराही, बुराई और अल्लाह की नाफ़रमानी की ओर ले जाए, तो हम उन्हीं नेताओं की तरह होंगे जिन्हें क़ियामत के दिन कोई मदद नहीं करेगा।

इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह के हुक्मों के मुताबिक बनाएँ और दूसरों के लिए नेकी और हिदायत का ज़रिया बनें। याद रखें, हमारा हर अच्छा काम दूसरों के लिए रोशनी बन सकता है, और हर बुरा काम दूसरों के लिए अंधेरा। आइए हम उन नेताओं में से न हों जो नरक की ओर बुलाते हैं, बल्कि उन लोगों में से हों जो जन्नत की ओर बुलाते हैं — और यही सबसे बड़ी कामयाबी है।

🎧 सुनें

📜 आयत 39-43 — अल-क़सस

39وَاسْتَكْبَرَ هُوَ وَجُنُودُهُ فِي الْأَرْضِ بِغَيْرِ الْحَقِّ وَظَنُّوا أَنَّهُمْ إِلَيْنَا لَا يُرْجَعُونَ
और फिरऔन और उसके लश्कर ने रुए ज़मीन में नाहक़ सर उठाया था और उन लोगों ने समझ लिया था कि हमारी बारगाह मे वह कभी पलट कर नही आएँगे
40فَأَخَذْنَاهُ وَجُنُودَهُ فَنَبَذْنَاهُمْ فِي الْيَمِّ ۖ فَانظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الظَّالِمِينَ
तो हमने उसको और उसके लश्कर को ले डाला फिर उन सबको दरिया में डाल दिया तो (ऐ रसूल) ज़रा देखों तो कि ज़ालिमों का कैसा बुरा अन्जाम हुआ
41وَجَعَلْنَاهُمْ أَئِمَّةً يَدْعُونَ إِلَى النَّارِ ۖ وَيَوْمَ الْقِيَامَةِ لَا يُنصَرُونَ
और हमने उनको (गुमराहों का) पेशवा बनाया कि (लोगों को) जहन्नुम की तरफ बुलाते है और क़यामत के दिन (ऐसे बेकस होगें कि) उनको किसी तरह की मदद न दी जाएगी
42وَأَتْبَعْنَاهُمْ فِي هَٰذِهِ الدُّنْيَا لَعْنَةً ۖ وَيَوْمَ الْقِيَامَةِ هُم مِّنَ الْمَقْبُوحِينَ
और हमने दुनिया में भी तो लानत उन के पीछे लगा दी है और क़यामत के दिन उनके चेहरे बिगाड़ दिए जायेंगे
43وَلَقَدْ آتَيْنَا مُوسَى الْكِتَابَ مِن بَعْدِ مَا أَهْلَكْنَا الْقُرُونَ الْأُولَىٰ بَصَائِرَ لِلنَّاسِ وَهُدًى وَرَحْمَةً لَّعَلَّهُمْ يَتَذَكَّرُونَ
और हमने बहुतेरी अगली उम्मतों को हलाक कर डाला उसके बाद मूसा को किताब (तौरैत) अता की जो लोगों के लिए अजसरतापा बसीरत और हिदायत और रहमत थी ताकि वह लोग इबरत व नसीहत हासिल करें
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अनुवाद — अल-क़सस 41

सूरा अल-क़सस आयत 41 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने उनको (गुमराहों का) पेशवा बनाया कि (लोगों को)…

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Tuesday, August 18, 2026

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