अल-क़सस · 40/88
अनुवाद उच्चारण — अल-क़सस
فَأَخَذْنَاهُ وَجُنُودَهُ فَنَبَذْنَاهُمْ فِي الْيَمِّ ۖ فَانظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الظَّالِمِينَ ۝٤٠
Fa akhaznaahu wa junoo dahoo fanabaznaahum fil yammi fanzur kaifa kaana `aaqibatuz zaalimeen
📖 हिंदी अर्थ
तो हमने उसको और उसके लश्कर को ले डाला फिर उन सबको दरिया में डाल दिया तो (ऐ रसूल) ज़रा देखों तो कि ज़ालिमों का कैसा बुरा अन्जाम हुआ
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَنَبَذْنَاهُمْ: हमने उन्हें फेंक दिया (अर्थात समुद्र में डाल दिया)।
  • الْيَمِّ: समुद्र (यहाँ अभिप्राय लाल सागर / दरिया से है)।
  • عَاقِبَةُ: अंजाम, परिणाम, बुरा नतीजा।
  • الظَّالِمِينَ: अत्याचारियों, ज़ालिमों (जिन्होंने अल्लाह के साथ कुफ़्र किया और अपनी जानों पर ज़ुल्म किया)।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब फ़िरऔन और उसके लश्कर ने हद से तजावुज़ (उल्लंघन) किया, अल्लाह की निशानियों को झुठलाया और मूसा (अलैहिस्सलाम) का पीछा करते हुए समुद्र के किनारे पहुँचे, तो अल्लाह तआला ने अपनी क़ुदरत से उन्हें पकड़ लिया। यानी हमने फ़िरऔन को और उसके सारे लश्कर को (जो उसके साथ थे) समुद्र में डाल दिया और उन्हें ग़रक़ (डूबा) कर हलाक कर दिया। यह कोई साधारण घटना नहीं थी, बल्कि अल्लाह की उस क़ुदरत का ज़बरदस्त नज़ारा था जिसने समुद्र को चीरकर बनी इसराईल के लिए रास्ता बनाया और फिर उसी समुद्र को फ़िरऔन और उसके ज़ालिम लश्कर के लिए क़ब्र बना दिया।

फिर अल्लाह तआला अपने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को ख़िताब करके फ़रमाता है: "ऐ नबी! तुम देखो कि ज़ालिमों का अंजाम कैसा हुआ?" यानी उनका अंजाम हलाकत और बर्बादी के सिवा कुछ नहीं था। जिन लोगों ने अल्लाह का हुक्म नहीं माना, अपनी सरकशी और ज़ुल्म पर अड़े रहे, उनका ठिकाना हमेशा के लिए तबाही ही है। यह सिर्फ़ फ़िरऔन के लिए नहीं, बल्कि हर उस ज़ालिम के लिए एक सबक़ है जो अल्लाह की आयतों से मुँह मोड़ता है और अपनी ताक़त पर इतराता है।


दावती पहलू (नसीहत और तरग़ीब):

इस आयत में अल्लाह तआला हमें एक बहुत बड़ी नसीहत देता है कि ज़ुल्म और सरकशी की कोई मंज़िल नहीं होती। फ़िरऔन के पास बेशुमार दौलत, फ़ौजें और ताक़त थी, लेकिन जब अल्लाह का फ़ैसला आया तो उसकी कोई चीज़ उसे बचा न सकी। यह हमारे लिए सबक़ है कि हम अपनी ज़िंदगी में कभी ज़ुल्म न करें — चाहे वह अल्लाह के हुक्मों की ख़िलाफ़वरी हो या इंसानों के साथ नाइंसाफ़ी। अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, लेकिन वह रहमत वाला भी है। जो लोग अपने गुनाहों से तौबा कर लें, अल्लाह उन्हें माफ़ कर देता है। यह आयत हमें अल्लाह की क़ुदरत पर ईमान लाने की तरग़ीब देती है और यह यक़ीन दिलाती है कि अल्लाह हमेशा अपने नेक बंदों की मदद करता है, जैसे उसने मूसा (अलैहिस्सलाम) और उनकी क़ौम को नजात दी और ज़ालिमों को हलाक कर दिया। हमें चाहिए कि हम हमेशा अल्लाह की इताअत (आज्ञाकारिता) को अपनी ज़िंदगी का निज़ाम बनाएँ और ज़ुल्म से बचें, ताकि हम भी अल्लाह की रहमत और नजात के हक़दार बनें।

🎧 सुनें

📜 आयत 38-42 — अल-क़सस

38وَقَالَ فِرْعَوْنُ يَا أَيُّهَا الْمَلَأُ مَا عَلِمْتُ لَكُم مِّنْ إِلَٰهٍ غَيْرِي فَأَوْقِدْ لِي يَا هَامَانُ عَلَى الطِّينِ فَاجْعَل لِّي صَرْحًا لَّعَلِّي أَطَّلِعُ إِلَىٰ إِلَٰهِ مُوسَىٰ وَإِنِّي لَأَظُنُّهُ مِنَ الْكَاذِبِينَ
और (ये सुनकर) फिरऔन ने कहा ऐ मेरे दरबार के सरदारों मुझ को तो अपने सिवा तुम्हारा कोई परवरदिगार मालूम नही होता (और मूसा दूसरे को ख़ुदा बताता है) तो ऐ हामान (वज़ीर फिरऔन) तुम मेरे वास्ते मिट्टी (की ईटों) का पजावा सुलगाओ फिर मेरे वास्ते एक पुख्ता महल तैयार कराओ ताकि मै (उस पर चढ़ कर) मूसा के ख़ुदा को देंखू और मै तो यक़ीनन मूसा को झूठा समझता हूँ
39وَاسْتَكْبَرَ هُوَ وَجُنُودُهُ فِي الْأَرْضِ بِغَيْرِ الْحَقِّ وَظَنُّوا أَنَّهُمْ إِلَيْنَا لَا يُرْجَعُونَ
और फिरऔन और उसके लश्कर ने रुए ज़मीन में नाहक़ सर उठाया था और उन लोगों ने समझ लिया था कि हमारी बारगाह मे वह कभी पलट कर नही आएँगे
40فَأَخَذْنَاهُ وَجُنُودَهُ فَنَبَذْنَاهُمْ فِي الْيَمِّ ۖ فَانظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الظَّالِمِينَ
तो हमने उसको और उसके लश्कर को ले डाला फिर उन सबको दरिया में डाल दिया तो (ऐ रसूल) ज़रा देखों तो कि ज़ालिमों का कैसा बुरा अन्जाम हुआ
41وَجَعَلْنَاهُمْ أَئِمَّةً يَدْعُونَ إِلَى النَّارِ ۖ وَيَوْمَ الْقِيَامَةِ لَا يُنصَرُونَ
और हमने उनको (गुमराहों का) पेशवा बनाया कि (लोगों को) जहन्नुम की तरफ बुलाते है और क़यामत के दिन (ऐसे बेकस होगें कि) उनको किसी तरह की मदद न दी जाएगी
42وَأَتْبَعْنَاهُمْ فِي هَٰذِهِ الدُّنْيَا لَعْنَةً ۖ وَيَوْمَ الْقِيَامَةِ هُم مِّنَ الْمَقْبُوحِينَ
और हमने दुनिया में भी तो लानत उन के पीछे लगा दी है और क़यामत के दिन उनके चेहरे बिगाड़ दिए जायेंगे
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अनुवाद — अल-क़सस 40

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Tuesday, August 18, 2026

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