अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- اللَّغْو (लग़व): बेकार और व्यर्थ की बात, ऐसा कथन जिसमें कोई भलाई या सच्चाई न हो।
- أَعْرَضُوا (अ'रज़ू): उससे मुँह मोड़ लिया, उस पर ध्यान नहीं दिया।
- لَنَا أَعْمَالُنَا (लना आ'मालुना): हमारे लिए हमारे कर्म हैं (उनका फल हमें मिलेगा)।
- سَلَامٌ عَلَيْكُمْ (सलामुन अलैकुम): तुम्हें सलामती हो (यहाँ यह विदाई और अलगाव का सलाम है, अभिवादन नहीं)।
- لَا نَبْتَغِي الْجَاهِلِينَ (ला नब्तग़ील जाहिलीन): हम जाहिलों (अज्ञानियों) की संगति नहीं चाहते।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन नेक और सच्चे ईमानवालों की खूबियाँ बयान करती है, जिन्होंने अपने पहले के धर्मग्रंथों पर ईमान रखा और फिर क़ुरआन पर भी ईमान लाए। उन्हें उनके इस सब्र और सच्चाई पर दोहरा अज्र (बदला) मिलेगा। उनकी एक बड़ी पहचान यह है कि जब वे कोई बेकार, झूठी या गाली-गलौज वाली बात सुनते हैं, तो उस पर कान नहीं धरते, उससे किनारा कर लेते हैं। वे उस बहस और बेहूदगी में नहीं पड़ते।
वे ऐसे लोगों से कहते हैं: "हमारे लिए हमारे कर्म हैं और तुम्हारे लिए तुम्हारे कर्म। हमें अपने कर्मों का फल मिलेगा और तुम्हें अपने कर्मों का। हम तुमसे किसी बुराई या बदले की उम्मीद नहीं रखते, न ही तुम्हें जवाब देने की ज़रूरत समझते हैं। तुम हमसे सुरक्षित हो — हम तुम्हें न गाली देंगे, न तकलीफ़ पहुँचाएँगे।" यह "सलाम" उनका विदाई का सलाम है, यानी हम तुमसे अलग हो गए, हमारा तुमसे कोई झगड़ा नहीं। और वे यह भी कहते हैं: "हम जाहिलों (अज्ञानियों) की संगति और उनके रास्ते की तलाश नहीं करते, क्योंकि उनकी संगति में दीन और दुनिया दोनों का नुक़सान है।"
यह आयत हमें सिखाती है कि एक सच्चे मुसलमान की शान यह है कि वह बेहूदा बातों से दूर रहे, गुस्से और जहालत के माहौल में भी अपनी ज़ुबान को नेक और साफ रखे। जब सामने वाला जहालत और गाली पर उतर आए, तो हमें सब्र और नेकी से काम लेना चाहिए, उससे बहस नहीं करनी चाहिए। यही वह रास्ता है जो दिलों को जोड़ता है और इस्लाम की खूबसूरत तस्वीर पेश करता है। अल्लाह तआला ऐसे लोगों से मुहब्बत करता है जो जहालत से बचते हैं और हिकमत से बात करते हैं।
याद रखिए, जब आप किसी की बुराई का जवाब बुराई से नहीं देते, तो आप असल में अपने ईमान की ताक़त दिखाते हैं। यही वह अख़लाक़ है जिसे अल्लाह और उसके रसूल ﷺ ने सिखाया है — कि बुराई को भलाई से दूर करो, और जाहिलों से किनारा करो। यही सच्ची इज़्ज़त और कामयाबी का रास्ता है।
📜 आयत 53-57 — अल-क़सस
अनुवाद — अल-क़सस 55
सूरा अल-क़सस आयत 55 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जब किसी से कोई बुरी बात सुनी तो उससे…सूरा आयत 55/88 — अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़सस सुनें, अल-क़सस अनुवाद, अल-क़सस mp3, अल-क़सस pdf. आयत 53–57. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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