अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يُؤْتَوْنَ أَجْرَهُم مَّرَّتَيْنِ: उन्हें दो बार उनका प्रतिफल दिया जाएगा।
- بِمَا صَبَرُوا: उनके धैर्य के कारण।
- يَدْرَءُونَ بِالْحَسَنَةِ السَّيِّئَةَ: वे अच्छे काम से बुरे काम को दूर करते हैं।
- يُنفِقُونَ: वे खर्च करते हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
ये वे लोग हैं जिनका ज़िक्र पिछली आयातों में हुआ—जो पहले से अल्लाह की किताबों पर ईमान रखते थे और जब उन्होंने क़ुरआन सुना तो उसे भी सच मान लिया। अल्लाह तआला उन्हें उनका पूरा-पूरा अज्र दो बार देगा: एक बार अपनी पिछली किताबों पर ईमान लाने और उन पर अमल करने का, और दूसरी बार क़ुरआन और रसूलुल्लाह ﷺ पर ईमान लाने और उस पर साबित क़दम रहने का। यह दोहरा अज्र उन्हें इसलिए मिलेगा क्योंकि उन्होंने सब्र किया—सब्र किया अपने धर्म पर क़ायम रहने में, सब्र किया सच्चाई को अपनाने में, और सब्र किया उन मुश्किलों में जो ईमान की राह में आईं।
उनकी एक खूबी यह भी है कि वे बुराई का जवाब अच्छाई से देते हैं। अगर कोई उन्हें नुक़सान पहुँचाए या बुरा भला कहे, तो वे बदला लेने के बजाय उसे माफ़ कर देते हैं, उसके साथ भलाई करते हैं, और अपने अच्छे आचरण से बुराई को दूर करते हैं। यही वह तरीक़ा है जिससे दिल बदलते हैं और दुश्मनी दोस्ती में बदल जाती है।
और अल्लाह ने उन्हें जो रोज़ी दी है, उसमें से वे उसकी राह में खर्च करते हैं—ग़रीबों पर, ज़रूरतमंदों पर, और अल्लाह की राह में। वे कंजूसी नहीं करते, बल्कि अल्लाह की दी हुई नेमतों को दूसरों के साथ बाँटते हैं।
यह वही लोग हैं जिनके बारे में अल्लाह ने आगे फ़रमाया कि जब वे बेकार और बुरी बातें सुनते हैं, तो उनसे किनारा कर लेते हैं और कहते हैं: "हमारे लिए हमारे कर्म हैं और तुम्हारे लिए तुम्हारे कर्म। तुम्हें सलाम है, हम जाहिलों की तरह बनकर नहीं रहना चाहते।" यानी वे न तो बुराई में हिस्सा लेते हैं और न ही जहालत की राह पर चलते हैं।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा सबके लिए खुला है। जो लोग पहले से सच्चाई पर थे और फिर इस्लाम की रोशनी उन तक पहुँची, उन्होंने उसे खुशी-खुशी क़बूल किया—अल्लाह ने उन्हें दोहरा अज्र देकर सम्मानित किया। यह हमारे लिए भी एक बड़ी खुशखबरी है कि अल्लाह इंसान की नीयत और उसकी मेहनत को देखता है। अगर हम सब्र करें, बुराई का जवाब अच्छाई से दें, और अपने माल में से अल्लाह की राह में खर्च करें, तो हम भी उन्हीं लोगों में शामिल हो सकते हैं जिन्हें अल्लाह की तरफ से दोहरा अज्र मिलेगा। यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम सिर्फ़ ईमान का नाम नहीं, बल्कि अच्छे अख़लाक़, दरियादिली और सब्र का भी नाम है। आओ, हम इन खूबियों को अपनाएँ और अल्लाह की रहमत के हक़दार बनें।
📜 आयत 52-56 — अल-क़सस
अनुवाद — अल-क़सस 54
सूरा अल-क़सस आयत 54 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : यही वह लोग हैं जिन्हें (इनके आमाले ख़ैर की) दोहरी…सूरा आयत 54/88 — अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़सस सुनें, अल-क़सस अनुवाद, अल-क़सस mp3, अल-क़सस pdf. आयत 52–56. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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