Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يَصُدُّنَّكَ: तुम्हें रोकें या विमुख करें
- آيَاتِ اللَّهِ: अल्लाह की आयतें (उसकी निशानियाँ और उसका कलाम)
- أُنزِلَتْ إِلَيْكَ: जो तुम्हारी ओर उतारी गईं
- وَادْعُ: और बुलाओ (निमंत्रण दो)
- مِنَ الْمُشْرِكِينَ: मुशरिकों (शिर्क करने वालों) में से
तफ़सीर (व्याख्या):
इस पवित्र आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को एक बहुत ही महत्वपूर्ण निर्देश दे रहे हैं, और यही निर्देश हर उस इंसान के लिए है जो अल्लाह के दीन को अपनाना चाहता है। अल्लाह फ़रमाता है कि ऐ नबी! ये मुशरिक लोग तुम्हें अल्लाह की आयतों से रोकने की हर मुमकिन कोशिश करेंगे — कभी धमकियों से, कभी लालच से, कभी तानों से — लेकिन तुम उनके दबाव में मत आना। जब अल्लाह की आयतें तुम्हारे पास आ चुकी हैं, तो उन्हें पढ़ना, उन पर अमल करना और उन्हें लोगों तक पहुँचाना तुम्हारा फ़र्ज़ है। किसी भी इंसान की धमकी या किसी की भी राय तुम्हें इस रास्ते से नहीं हटा सकती।
फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है: "और तुम अपने रब की ओर बुलाओ" — यानी लोगों को अल्लाह की तौहीद (एकता) की ओर, उसकी इबादत की ओर, और उसके बताए हुए रास्ते की ओर बुलाते रहो। यह बुलाना नरमी से, हिकमत से, और अच्छे तरीके से होना चाहिए। तुम्हारा काम सिर्फ़ पहुँचाना है, हिदायत देना अल्लाह के हाथ में है।
और अंत में अल्लाह फ़रमाता है: "और तुम हरगिज़ मुशरिकों में से मत होना" — यानी तुम उन लोगों में से नहीं हो जो अल्लाह के साथ किसी और को साझी ठहराते हैं। तुम तो उन लोगों में से हो जो सिर्फ़ अल्लाह की इबादत करते हैं, सिर्फ़ उसी से मदद माँगते हैं, और सिर्फ़ उसी के आगे सिर झुकाते हैं। यह एक पुकार है कि हर मुसलमान को अपने आपको शिर्क से पाक रखना चाहिए और पूरी ज़िंदगी तौहीद पर क़ायम रहना चाहिए।
दावत (आमंत्रण) का पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई पर क़ायम रहना कितना बड़ा सम्मान है। जब अल्लाह किसी को हिदायत दे देता है, तो उसे दुनिया की किसी भी ताक़त से डरने की ज़रूरत नहीं। यही वह रास्ता है जो इंसान को इस दुनिया में इज़्ज़त देता है और आख़िरत में कामयाबी। अल्लाह का दीन एक ऐसा खज़ाना है जो कभी घटता नहीं — जितना इसे बाँटोगे, उतना ही बढ़ेगा। और जो लोग अल्लाह की तरफ़ बुलाते हैं, अल्लाह उन्हें दुनिया और आख़िरत दोनों में बेहतरीन इनाम देता है। आइए, हम सब इस आयत से सीख लें कि अपने ईमान पर मज़बूती से क़ायम रहें, अल्लाह की आयतों को अपनी ज़िंदगी में उतारें, और दूसरों को भी इसी खूबसूरत रास्ते की तरफ़ बुलाएँ।
📜 आयत 85-88 — सूरा अल-क़सस
अनुवाद — अल-क़सस 87
सूरा अल-क़सस आयत 87 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : कहीं ऐसा न हो एहकामे ख़ुदा वन्दी नाज़िल होने के…सूरा आयत 87/88 — सूरा अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-क़सस सुनें, सूरा अल-क़सस अनुवाद, सूरा अल-क़सस mp3, सूरा अल-क़सस pdf. आयत 85–88. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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