अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- तरजू – आशा रखना, उम्मीद करना।
- युल्क़ा – डाला जाए, पहुँचाया जाए (यहाँ अर्थ: वह्य किया जाए)।
- ज़हीर – मददगार, सहायक, पक्ष लेने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आपको यह क़ुरआन मिलने से पहले इसकी कोई उम्मीद नहीं थी कि आप पर यह किताब उतारी जाएगी। आपने न तो इसका सपना देखा था और न ही आपके दिल में इसकी आरज़ू थी। यह तो सिर्फ़ आपके रब की महान रहमत थी कि उसने अपने फज़ल से आपको यह अज़ीमुश्शान किताब अता फ़रमाई। यह आपकी अपनी काबिलियत या कोशिश का नतीजा नहीं था, बल्कि अल्लाह की ख़ास मेहरबानी थी जो उसने अपने नबी पर फ़रमाई।
यह बात हमारे लिए भी बड़ी सबक़ है कि जो कुछ भी हमें मिला है, वह अल्लाह की रहमत से मिला है। क़ुरआन जैसी नेअमत हम तक पहुँची है, यह अल्लाह का करम है। इसलिए हमें चाहिए कि इस नेअमत की क़द्र करें, इस पर अमल करें और इसे अपनी ज़िंदगी में निज़ाम-ए-हयात बनाएँ।
फिर अल्लाह तआला अपने नबी को एक ज़रूरी हिदायत देता है: "काफ़िरों के मददगार न बनो।" यानी किसी भी हालत में उन लोगों का साथ न दो जो अल्लाह की नाफ़रमानी पर हों, जो हक़ को झुठलाते हों और जो बातिल पर क़ायम हों। यह हिदायत सिर्फ़ नबी के लिए नहीं, बल्कि हर मोमिन के लिए है। हमें भी चाहिए कि काफ़िरों और ज़ालिमों की मदद से बचें, उनके तरीक़ों से सहमत न हों और उनके मक़ासिद में शरीक न बनें।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत का शुक्र अदा करने का तरीक़ा यह है कि हम हक़ पर साबित-क़दम रहें और बातिल का साथ देने से बचें। जो शख्स अल्लाह की नेअमत पाकर भी उसके दुश्मनों का साथ देता है, वह नाशुक्री करता है। इसलिए हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि हमारी कामयाबी अल्लाह की रहमत से है और हमें उसी की राह पर चलना है, किसी और की नहीं।
📜 आयत 84-88 — अल-क़सस
अनुवाद — अल-क़सस 86
सूरा अल-क़सस आयत 86 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : इससे मेरा परवरदिगार ख़ूब वाक़िफ है और तुमको तो ये…सूरा आयत 86/88 — अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़सस सुनें, अल-क़सस अनुवाद, अल-क़सस mp3, अल-क़सस pdf. आयत 84–88. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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