अल-अंकबूत · 28/69
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अंकबूत
وَلُوطًا إِذْ قَالَ لِقَوْمِهِ إِنَّكُمْ لَتَأْتُونَ الْفَاحِشَةَ مَا سَبَقَكُم بِهَا مِنْ أَحَدٍ مِّنَ الْعَالَمِينَ ۝٢٨
Wa Lootan iz qaala liqawmiheee innakum laatoonal faahishata maa sabaqakum bihaa min ahadim minal `aalameen
📖 हिंदी अर्थ
(और ऐ रसूल) लूत को (याद करो) जब उन्होंने अपनी क़ौम से कहा कि तुम लोग अजब बेहयाई का काम करते हो कि तुमसे पहले सारी खुदायी के लोगों में से किसी ने नहीं किया

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لُوطًا (लूत): अल्लाह के नबी लूत अलैहिस्सलाम।
  • الْفَاحِشَةَ (अल-फ़ाहिशाह): अत्यंत घृणित और शर्मनाक कार्य, यहाँ आशय है पुरुषों से कामुकता (समलैंगिकता) का कार्य।
  • مَا سَبَقَكُم بِهَا مِنْ أَحَدٍ (मा सबक़कुम बिहा मिन अहद): इस कार्य को करने में तुमसे पहले किसी ने सबक़त नहीं की, अर्थात यह ऐसा पाप है जो पहली बार तुम्हारी क़ौम ने किया।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप उस समय को याद करें जब लूत अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम से कहा: "तुम लोग ऐसा घृणित कार्य करते हो जो तुमसे पहले सारे संसार में किसी ने नहीं किया।" यह वह अत्यंत शर्मनाक कृत्य है जो फ़ितरत (स्वाभाविक प्रवृत्ति) के बिल्कुल विपरीत है — पुरुषों का पुरुषों से कामुक संबंध बनाना। यह कार्य न केवल व्यक्ति की आत्मा को भ्रष्ट करता है बल्कि समाज में अश्लीलता, बीमारियाँ और अल्लाह की नाराज़गी लाता है।

लूत अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम को इस पाप से डराया और समझाया कि यह कार्य अल्लाह की स्पष्ट अवज्ञा है। उन्होंने यह भी बताया कि इस पाप के कारण वे राहगीरों को भी परेशान करते थे, उनके रास्ते रोकते थे और अपनी मजलिसों में घिनौने काम करते थे। यह सब अल्लाह की हदों का उल्लंघन है।

इस आयत से हमें सीख मिलती है कि अल्लाह ने जिन कार्यों को हराम (निषिद्ध) किया है, उन्हें कभी भी जायज़ नहीं ठहराना चाहिए, चाहे समाज में कितना ही प्रचलन क्यों न हो। इस्लाम फ़ितरत का दीन है और हर वह कार्य जो फ़ितरत के खिलाफ है, वह अल्लाह की नज़र में घृणित है।

याद रखें, अल्लाह तआला अपने बंदों से सिर्फ़ वही चाहता है जो उनके लिए भलाई और पवित्रता का कारण बने। जो लोग अल्लाह की नाराज़गी से डरते हैं और अपने आपको गुनाहों से बचाते हैं, उनके लिए अल्लाह के पास बेहतरीन इनाम और जन्नत की राहतें हैं। आइए हम सब लूत अलैहिस्सलाम की उम्मत से सबक़ लें और हर उस काम से दूर रहें जो अल्लाह को नापसंद है, ताकि हम दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब हों।



📜 आयत 26-30 — सूरा अल-अंकबूत

26۞ فَآمَنَ لَهُ لُوطٌ ۘ وَقَالَ إِنِّي مُهَاجِرٌ إِلَىٰ رَبِّي ۖ إِنَّهُ هُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
तब सिर्फ लूत इबराहीम पर ईमान लाए और इबराहीम ने कहा मै तो देस को छोड़कर अपने परवरदिगार की तरफ (जहाँ उसको मंज़ूर हो ) निकल जाऊँगा
27وَوَهَبْنَا لَهُ إِسْحَاقَ وَيَعْقُوبَ وَجَعَلْنَا فِي ذُرِّيَّتِهِ النُّبُوَّةَ وَالْكِتَابَ وَآتَيْنَاهُ أَجْرَهُ فِي الدُّنْيَا ۖ وَإِنَّهُ فِي الْآخِرَةِ لَمِنَ الصَّالِحِينَ
इसमे शक नहीं कि वह ग़ालिब (और) हिकमत वाला है और हमने इबराहीम को इसहाक़ (सा बेटा) और याक़ूब (सा पोता) अता किया और उनकी नस्ल में पैग़म्बरी और किताब क़रार दी और हम न इबराहीम को दुनिया में भी अच्छा बदला अता किया और वह तो आख़ेरत में भी यक़ीनी नेको कारों से हैं
28وَلُوطًا إِذْ قَالَ لِقَوْمِهِ إِنَّكُمْ لَتَأْتُونَ الْفَاحِشَةَ مَا سَبَقَكُم بِهَا مِنْ أَحَدٍ مِّنَ الْعَالَمِينَ
(और ऐ रसूल) लूत को (याद करो) जब उन्होंने अपनी क़ौम से कहा कि तुम लोग अजब बेहयाई का काम करते हो कि तुमसे पहले सारी खुदायी के लोगों में से किसी ने नहीं किया
29أَئِنَّكُمْ لَتَأْتُونَ الرِّجَالَ وَتَقْطَعُونَ السَّبِيلَ وَتَأْتُونَ فِي نَادِيكُمُ الْمُنكَرَ ۖ فَمَا كَانَ جَوَابَ قَوْمِهِ إِلَّا أَن قَالُوا ائْتِنَا بِعَذَابِ اللَّهِ إِن كُنتَ مِنَ الصَّادِقِينَ
तुम लोग (औरतों को छोड़कर कज़ाए शहवत के लिए) मर्दों की तरफ गिरते हो और (मुसाफिरों की) रहजनी करते हो और तुम लोग अपनी महफिलों में बुरी बुरी हरकते करते हो तो (इन सब बातों का) लूत की क़ौम के पास इसके सिवा कोई जवाब न था कि वह लोग कहने लगे कि भला अगर तुम सच्चे हो तो हम पर ख़ुदा का अज़ाब तो ले आओ
30قَالَ رَبِّ انصُرْنِي عَلَى الْقَوْمِ الْمُفْسِدِينَ
तब लूत ने दुआ की कि परवरदिगार इन मुफ़सिद लोगों के मुक़ाबले में मेरी मदद कर
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अनुवाद — अल-अंकबूत 28

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Friday, October 2, 2026

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