Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- नादी (नादिकुम): बैठक, मजलिस, जहाँ लोग इकट्ठा होते हैं।
- मुन्कर: वो घृणित कार्य जिसे अक़्ल और शरियत दोनों बुरा कहें, जैसे निर्लज्जता, लोगों को तंग करना, बुरी बातें करना।
- क़त्उस सबील: रास्ता रोकना, राहगीरों को परेशान करना।
तफ़सीर:
हज़रत लूत अलैहिस्सलाम अपनी क़ौम को समझा रहे थे और उनसे कह रहे थे: “क्या तुम लोग ऐसा काम करते हो जो दुनिया में तुमसे पहले किसी ने नहीं किया? तुम औरतों को छोड़कर मर्दों के पास जाते हो, यानी उनसे अप्राकृतिक संबंध बनाते हो — यह एक ऐसी घिनौनी हरकत है जिसे फ़ितरत भी रद्द करती है और अक़्ल भी।”
फिर उन्होंने दूसरा जुर्म बताया: “तुम रास्ता काटते हो, यानी राहगीरों को रोकते हो, उन्हें लूटते हो या उनके साथ बदसलूकी करते हो, ताकि लोग तुम्हारे शहर से गुज़रने से डरें।”
तीसरा जुर्म यह बताया: “और तुम अपनी मजलिसों में ऐसे काम करते हो जो शर्म और हया के खिलाफ हैं — जैसे नंगे होना, लोगों का मज़ाक उड़ाना, उन्हें ताने मारना, और दूसरों को तकलीफ़ देना। यानी तुमने बुराई को इतना आम कर दिया है कि वो तुम्हारी मजलिसों का हिस्सा बन गई है।”
जब हज़रत लूत ने उन्हें इन बुराइयों से रोका और अल्लाह के अज़ाब से डराया, तो उनकी क़ौम का जवाब क्या था? उन्होंने कहा: “अगर तुम सच्चे हो, तो ले आओ अल्लाह का अज़ाब!” — यानी उन्होंने न सिर्फ़ तौबा की, बल्कि मज़ाक़ उड़ाया और अज़ाब को चुनौती दी। वे समझते थे कि अज़ाब नहीं आएगा, इसलिए उन्होंने नबी को झुठलाने की जुर्रत की।
दावती पहलू:
यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि जब कोई समाज बुराई को आम कर लेता है और उसे अपनी मजलिसों का हिस्सा बना लेता है, तो वो अल्लाह के अज़ाब का हक़दार बन जाता है। लेकिन अल्लाह रहीम है — वो तौबा करने वालों को माफ़ कर देता है। हमें चाहिए कि हम अपनी मजलिसों को पाक रखें, बुराई से दूर रहें और अच्छाई को बढ़ावा दें। अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा हमेशा खुला है, बस ज़रूरत है सच्चे दिल से पलटने की। याद रखें, अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, लेकिन उसकी रहमत उसके अज़ाब से पहले आती है — हमें उसी रहमत की तरफ़ दौड़ना चाहिए।
📜 आयत 27-31 — सूरा अल-अंकबूत
अनुवाद — अल-अंकबूत 29
सूरा अल-अंकबूत आयत 29 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तुम लोग (औरतों को छोड़कर कज़ाए शहवत के लिए) मर्दों…सूरा आयत 29/69 — सूरा अल-अंकबूत العنكبوت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अंकबूत सुनें, सूरा अल-अंकबूत अनुवाद, सूरा अल-अंकबूत mp3, सूरा अल-अंकबूत pdf. आयत 27–31. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-अंकबूत
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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