आल-इमरान · 11/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
كَدَأْبِ آلِ فِرْعَوْنَ وَالَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا فَأَخَذَهُمُ اللَّهُ بِذُنُوبِهِمْ ۗ وَاللَّهُ شَدِيدُ الْعِقَابِ ۝١١
Kadaabi Aali Fir`awna wallazeena min qablihim; kazzaboo bi Aayaatinaa fa akhazahumul laahu bizunoo bihim; wallaahu shadeedul `iqaab
📖 हिंदी अर्थ
(उनकी भी) क़ौमे फ़िरऔन और उनसे पहले वालों की सी हालत है कि उन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया तो खुदा ने उन्हें उनके गुनाहों की पादाश (सज़ा) में ले डाला और ख़ुदा सख्त सज़ा देने वाला है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • कदअबि (كَدَأْبِ): अर्थात उनकी आदत और स्थिति के समान।
  • आलि फ़िरऔन (آلِ فِرْعَوْنَ): फ़िरऔन की क़ौम और उसके साथी।
  • कज़्ज़बू (كَذَّبُوا): उन्होंने झुठलाया।
  • आयातिना (بِآيَاتِنَا): हमारी निशानियाँ और प्रमाण।
  • अख़ज़हुम (فَأَخَذَهُم): उन्हें पकड़ लिया, अर्थात उन्हें यातना में डाल दिया।
  • शदीदुल इक़ाब (شَدِيدُ الْعِقَابِ): कठोर यातना देने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन काफ़िरों की हालत बयान कर रही है जो रसूलुल्लाह ﷺ के सामने झूठ और इनकार का रास्ता अपनाते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि इन काफ़िरों का हाल बिल्कुल फ़िरऔन की क़ौम और उनसे पहले गुज़रे हुए काफ़िरों जैसा है। जिन्होंने अल्लाह की साफ़-साफ़ निशानियाँ और चमकती हुई दलीलें देखकर भी उन्हें झुठलाया और सच्चाई को क़बूल करने से इनकार किया। उनकी यही ज़िद और सरकशी आख़िरकार उनके विनाश का कारण बनी।

अल्लाह ने उन्हें उनके गुनाहों की वजह से पकड़ा, यानी उनकी सज़ा उनके किए की प्रतिक्रिया थी। उनका धन, उनकी औलाद, उनकी ताक़त — कुछ भी उन्हें अल्लाह की यातना से नहीं बचा सका। यह एक बड़ा सबक़ है कि जब अल्लाह किसी क़ौम को पकड़ता है, तो कोई ताक़त उसे रोक नहीं सकती। अल्लाह तआला यातना देने में बहुत सख़्त है, और उसकी पकड़ से बचना नामुमकिन है।

इस आयत में हमारे लिए एक गहरी नसीहत है — कि हम सच्चाई को क़बूल करने में देर न करें, अपनी ज़िद और हठधर्मी को छोड़ दें, और अल्लाह के दीन की तरफ़ दौड़ें। जो लोग अल्लाह की निशानियों पर ग़ौर करते हैं और उन्हें क़बूल करते हैं, उनके लिए अल्लाह की रहमत और मग़फ़िरत है। और जो लोग इनकार और ज़िद पर अड़े रहते हैं, उनके लिए अल्लाह का कठोर अज़ाब है। यह आयत हमें डराती भी है और समझाती भी है — कि अल्लाह की पकड़ से बचने का एक ही रास्ता है: उसकी तरफ़ लौटना, उसके हुक्मों को मानना और उसके रसूल ﷺ पर ईमान लाना।

🎧 सुनें

📜 आयत 9-13 — आल-इमरान

9رَبَّنَا إِنَّكَ جَامِعُ النَّاسِ لِيَوْمٍ لَّا رَيْبَ فِيهِ ۚ إِنَّ اللَّهَ لَا يُخْلِفُ الْمِيعَادَ
ऐ हमारे परवरदिगार बेशक तू एक न एक दिन जिसके आने में शुबह नहीं लोगों को इक्ट्ठा करेगा (तो हम पर नज़रे इनायत रहे) बेशक ख़ुदा अपने वायदे के ख़िलाफ़ नहीं करता
10إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا لَن تُغْنِيَ عَنْهُمْ أَمْوَالُهُمْ وَلَا أَوْلَادُهُم مِّنَ اللَّهِ شَيْئًا ۖ وَأُولَٰئِكَ هُمْ وَقُودُ النَّارِ
बेशक जिन लोगों ने कुफ्र किया इख्तेयार किया उनको ख़ुदा (के अज़ाब) से न उनके माल ही कुछ बचाएंगे, न उनकी औलाद (कुछ काम आएगी) और यही लोग जहन्नुम के ईधन होंगे
11كَدَأْبِ آلِ فِرْعَوْنَ وَالَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا فَأَخَذَهُمُ اللَّهُ بِذُنُوبِهِمْ ۗ وَاللَّهُ شَدِيدُ الْعِقَابِ
(उनकी भी) क़ौमे फ़िरऔन और उनसे पहले वालों की सी हालत है कि उन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया तो खुदा ने उन्हें उनके गुनाहों की पादाश (सज़ा) में ले डाला और ख़ुदा सख्त सज़ा देने वाला है
12قُل لِّلَّذِينَ كَفَرُوا سَتُغْلَبُونَ وَتُحْشَرُونَ إِلَىٰ جَهَنَّمَ ۚ وَبِئْسَ الْمِهَادُ
(ऐ रसूल) जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया उनसे कह दो कि बहुत जल्द तुम (मुसलमानो के मुक़ाबले में) मग़लूब (हारे हुए) होंगे और जहन्नुम में इकट्ठे किये जाओगे और वह (क्या) बुरा ठिकाना है
13قَدْ كَانَ لَكُمْ آيَةٌ فِي فِئَتَيْنِ الْتَقَتَا ۖ فِئَةٌ تُقَاتِلُ فِي سَبِيلِ اللَّهِ وَأُخْرَىٰ كَافِرَةٌ يَرَوْنَهُم مِّثْلَيْهِمْ رَأْيَ الْعَيْنِ ۚ وَاللَّهُ يُؤَيِّدُ بِنَصْرِهِ مَن يَشَاءُ ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَعِبْرَةً لِّأُولِي الْأَبْصَارِ
बेशक तुम्हारे (समझाने के) वास्ते उन दो (मुख़ालिफ़ गिरोहों में जो (बद्र की लड़ाई में) एक दूसरे के साथ गुथ गए (रसूल की सच्चाई की) बड़ी भारी निशानी है कि एक गिरोह ख़ुदा की राह में जेहाद करता था और दूसरा काफ़िरों का जिनको मुसलमान अपनी ऑख से दुगना देख रहे थे (मगर ख़ुदा ने क़लील ही को फ़तह दी) और ख़ुदा अपनी मदद से जिस की चाहता है ताईद करता है बेशक ऑख वालों के वास्ते इस वाक़ये में बड़ी इबरत है
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अनुवाद — आल-इमरान 11

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Tuesday, August 18, 2026

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