आल-इमरान · 12/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
قُل لِّلَّذِينَ كَفَرُوا سَتُغْلَبُونَ وَتُحْشَرُونَ إِلَىٰ جَهَنَّمَ ۚ وَبِئْسَ الْمِهَادُ ۝١٢
Qul lillazeena kafaroosatughlaboona wa tuhsharoona ilaa jahannam; wa bi`sal mihaad
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया उनसे कह दो कि बहुत जल्द तुम (मुसलमानो के मुक़ाबले में) मग़लूब (हारे हुए) होंगे और जहन्नुम में इकट्ठे किये जाओगे और वह (क्या) बुरा ठिकाना है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سَتُغْلَبُونَ – तुम अवश्य पराजित होगे।
  • وَتُحْشَرُونَ – और तुम एकत्र किए जाओगे (उठाए जाओगे)।
  • جَهَنَّمَ – नरक (जहन्नम)।
  • الْمِهَادُ – बिछौना, फ़र्श, आरामगाह।

व्याख्या:

ऐ नबी! आप उन लोगों से कह दीजिए जिन्होंने कुफ़्र (इनकार) किया है—चाहे वे यहूदी हों या मक्का के मुशरिकीन—कि तुम दुनिया में (बद्र के मैदान में) अवश्य पराजित होगे और तुम्हारी हार तय है। यह केवल एक दुनियावी शिकस्त नहीं है, बल्कि तुम अपने कुफ़्र पर मरोगे और फिर आख़िरत में तुम्हें उठाकर जहन्नम की तरफ़ हाँका जाएगा। वह जहन्नम ही तुम्हारा स्थायी बिछौना और ठिकाना होगी, और वह कितना बुरा ठिकाना है!

यह आयत उन लोगों के लिए एक स्पष्ट चेतावनी और ख़बर है जो अल्लाह के दीन और उसके रसूल का मुक़ाबला करते हैं। अल्लाह ने अपने नबी को यह बताने का आदेश दिया कि कुफ़्र का अंजाम दुनिया में ज़िल्लत और आख़िरत में जहन्नम है। यह ऐतिहासिक घटना (ग़ज़वा-ए-बद्र) की ओर भी इशारा है, जब मुसलमानों को फ़तह हुई और काफ़िरों को करारी शिकस्त हुई।


फ़ायदे (सबक़):

  1. अल्लाह की मदद का वादा: यह आयत मुसलमानों के दिलों को मज़बूत करती है कि अल्लाह अपने दीन की मदद करता है और सच्चाई पर क़ायम रहने वालों को कभी अकेला नहीं छोड़ता। भले ही दुश्मन ताक़तवर हों, अल्लाह का फ़ैसला सबसे ऊपर है।
  2. कुफ़्र का अंजाम: इस आयत से यह सबक़ मिलता है कि कुफ़्र और इनकार का अंजाम दुनिया में ज़िल्लत और आख़िरत में जहन्नम है। यह इंसान को सोचने पर मजबूर करता है कि वह अपनी ज़िंदगी का रास्ता सही चुने।
  3. नबी की ज़िम्मेदारी: अल्लाह ने अपने नबी को हुक्म दिया कि वह सच्चाई बयान करें, चाहे सुनने वालों को यह पसंद आए या न आए। यह हमारे लिए भी सबक़ है कि सच बोलना और सच्चाई पर डटे रहना चाहिए।
  4. आख़िरत पर ईमान: यह आयत हमें याद दिलाती है कि यह दुनिया ही सब कुछ नहीं है। एक दिन सबको उठकर अल्लाह के सामने हाज़िर होना है। इसलिए अमल वही करना चाहिए जो आख़िरत में काम आए।
  5. अल्लाह की क़ुदरत: अल्लाह जिसे चाहता है इज़्ज़त देता है और जिसे चाहता है ज़िल्लत। यह हमें अल्लाह के सामने अपनी आजिज़ी और उसकी ताक़त का एहसास कराता है कि हमें सिर्फ़ उसी पर भरोसा करना चाहिए।
🎧 सुनें

📜 आयत 10-14 — आल-इमरान

10إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا لَن تُغْنِيَ عَنْهُمْ أَمْوَالُهُمْ وَلَا أَوْلَادُهُم مِّنَ اللَّهِ شَيْئًا ۖ وَأُولَٰئِكَ هُمْ وَقُودُ النَّارِ
बेशक जिन लोगों ने कुफ्र किया इख्तेयार किया उनको ख़ुदा (के अज़ाब) से न उनके माल ही कुछ बचाएंगे, न उनकी औलाद (कुछ काम आएगी) और यही लोग जहन्नुम के ईधन होंगे
11كَدَأْبِ آلِ فِرْعَوْنَ وَالَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا فَأَخَذَهُمُ اللَّهُ بِذُنُوبِهِمْ ۗ وَاللَّهُ شَدِيدُ الْعِقَابِ
(उनकी भी) क़ौमे फ़िरऔन और उनसे पहले वालों की सी हालत है कि उन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया तो खुदा ने उन्हें उनके गुनाहों की पादाश (सज़ा) में ले डाला और ख़ुदा सख्त सज़ा देने वाला है
12قُل لِّلَّذِينَ كَفَرُوا سَتُغْلَبُونَ وَتُحْشَرُونَ إِلَىٰ جَهَنَّمَ ۚ وَبِئْسَ الْمِهَادُ
(ऐ रसूल) जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया उनसे कह दो कि बहुत जल्द तुम (मुसलमानो के मुक़ाबले में) मग़लूब (हारे हुए) होंगे और जहन्नुम में इकट्ठे किये जाओगे और वह (क्या) बुरा ठिकाना है
13قَدْ كَانَ لَكُمْ آيَةٌ فِي فِئَتَيْنِ الْتَقَتَا ۖ فِئَةٌ تُقَاتِلُ فِي سَبِيلِ اللَّهِ وَأُخْرَىٰ كَافِرَةٌ يَرَوْنَهُم مِّثْلَيْهِمْ رَأْيَ الْعَيْنِ ۚ وَاللَّهُ يُؤَيِّدُ بِنَصْرِهِ مَن يَشَاءُ ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَعِبْرَةً لِّأُولِي الْأَبْصَارِ
बेशक तुम्हारे (समझाने के) वास्ते उन दो (मुख़ालिफ़ गिरोहों में जो (बद्र की लड़ाई में) एक दूसरे के साथ गुथ गए (रसूल की सच्चाई की) बड़ी भारी निशानी है कि एक गिरोह ख़ुदा की राह में जेहाद करता था और दूसरा काफ़िरों का जिनको मुसलमान अपनी ऑख से दुगना देख रहे थे (मगर ख़ुदा ने क़लील ही को फ़तह दी) और ख़ुदा अपनी मदद से जिस की चाहता है ताईद करता है बेशक ऑख वालों के वास्ते इस वाक़ये में बड़ी इबरत है
14زُيِّنَ لِلنَّاسِ حُبُّ الشَّهَوَاتِ مِنَ النِّسَاءِ وَالْبَنِينَ وَالْقَنَاطِيرِ الْمُقَنطَرَةِ مِنَ الذَّهَبِ وَالْفِضَّةِ وَالْخَيْلِ الْمُسَوَّمَةِ وَالْأَنْعَامِ وَالْحَرْثِ ۗ ذَٰلِكَ مَتَاعُ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا ۖ وَاللَّهُ عِندَهُ حُسْنُ الْمَآبِ
दुनिया में लोगों को उनकी मरग़ूब चीज़े (मसलन) बीवियों और बेटों और सोने चॉदी के बड़े बड़े लगे हुए ढेरों और उम्दा उम्दा घोड़ों और मवेशियों ओर खेती के साथ उलफ़त भली करके दिखा दी गई है ये सब दुनयावी ज़िन्दगी के (चन्द रोज़ा) फ़ायदे हैं और (हमेशा का) अच्छा ठिकाना तो ख़ुदा ही के यहॉ है
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