Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- سَتُغْلَبُونَ – तुम अवश्य पराजित होगे।
- وَتُحْشَرُونَ – और तुम एकत्र किए जाओगे (उठाए जाओगे)।
- جَهَنَّمَ – नरक (जहन्नम)।
- الْمِهَادُ – बिछौना, फ़र्श, आरामगाह।
व्याख्या:
ऐ नबी! आप उन लोगों से कह दीजिए जिन्होंने कुफ़्र (इनकार) किया है—चाहे वे यहूदी हों या मक्का के मुशरिकीन—कि तुम दुनिया में (बद्र के मैदान में) अवश्य पराजित होगे और तुम्हारी हार तय है। यह केवल एक दुनियावी शिकस्त नहीं है, बल्कि तुम अपने कुफ़्र पर मरोगे और फिर आख़िरत में तुम्हें उठाकर जहन्नम की तरफ़ हाँका जाएगा। वह जहन्नम ही तुम्हारा स्थायी बिछौना और ठिकाना होगी, और वह कितना बुरा ठिकाना है!
यह आयत उन लोगों के लिए एक स्पष्ट चेतावनी और ख़बर है जो अल्लाह के दीन और उसके रसूल का मुक़ाबला करते हैं। अल्लाह ने अपने नबी को यह बताने का आदेश दिया कि कुफ़्र का अंजाम दुनिया में ज़िल्लत और आख़िरत में जहन्नम है। यह ऐतिहासिक घटना (ग़ज़वा-ए-बद्र) की ओर भी इशारा है, जब मुसलमानों को फ़तह हुई और काफ़िरों को करारी शिकस्त हुई।
फ़ायदे (सबक़):
- अल्लाह की मदद का वादा: यह आयत मुसलमानों के दिलों को मज़बूत करती है कि अल्लाह अपने दीन की मदद करता है और सच्चाई पर क़ायम रहने वालों को कभी अकेला नहीं छोड़ता। भले ही दुश्मन ताक़तवर हों, अल्लाह का फ़ैसला सबसे ऊपर है।
- कुफ़्र का अंजाम: इस आयत से यह सबक़ मिलता है कि कुफ़्र और इनकार का अंजाम दुनिया में ज़िल्लत और आख़िरत में जहन्नम है। यह इंसान को सोचने पर मजबूर करता है कि वह अपनी ज़िंदगी का रास्ता सही चुने।
- नबी की ज़िम्मेदारी: अल्लाह ने अपने नबी को हुक्म दिया कि वह सच्चाई बयान करें, चाहे सुनने वालों को यह पसंद आए या न आए। यह हमारे लिए भी सबक़ है कि सच बोलना और सच्चाई पर डटे रहना चाहिए।
- आख़िरत पर ईमान: यह आयत हमें याद दिलाती है कि यह दुनिया ही सब कुछ नहीं है। एक दिन सबको उठकर अल्लाह के सामने हाज़िर होना है। इसलिए अमल वही करना चाहिए जो आख़िरत में काम आए।
- अल्लाह की क़ुदरत: अल्लाह जिसे चाहता है इज़्ज़त देता है और जिसे चाहता है ज़िल्लत। यह हमें अल्लाह के सामने अपनी आजिज़ी और उसकी ताक़त का एहसास कराता है कि हमें सिर्फ़ उसी पर भरोसा करना चाहिए।
📜 आयत 10-14 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 12
सूरा आल-इमरान आयत 12 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया उनसे कह…सूरा आयत 12/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 10–14. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा आल-इमरान
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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