अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَن تُغْنِيَ: कभी काम नहीं आएंगे, किसी काम नहीं आ सकते, नुकसान को नहीं टाल सकते।
- وَقُودُ النَّارِ: आग का ईंधन, जिससे आग जलाई जाती है (यानी लकड़ी की तरह आग में झोंके जाने वाले)।
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों के बारे में बताती है जिन्होंने अल्लाह के दीन (इस्लाम) को झुठलाया और उसका इनकार किया। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जिन लोगों ने कुफ्र (इनकार) का रास्ता अपनाया, उनकी दौलत और उनकी औलाद — ये दोनों चीज़ें जिन पर वे बहुत घमंड करते हैं और जिन्हें अपनी ताकत समझते हैं — अल्लाह की ओर से आने वाली किसी भी सज़ा या अज़ाब को उनसे नहीं टाल सकतीं। न दुनिया में ये चीज़ें उन्हें अल्लाह की पकड़ से बचा सकती हैं, और न आख़िरत (क़यामत के दिन) में ही उनके किसी काम आएंगी।
यानी जब अल्लाह का फ़ैसला आ जाएगा, तो न तो उनका धन उनके काम आएगा और न ही उनकी संतान उन्हें बचा पाएगी। ये सारी चीज़ें दुनिया की आज़माइश हैं, लेकिन कुफ्र (इनकार) की हालत में ये उनके लिए सिर्फ़ बर्बादी का सामान बन जाती हैं।
फिर अल्लाह फ़रमाता है कि यही लोग (जो कुफ्र पर जमे हुए हैं) आग का ईंधन हैं। जिस तरह आग लकड़ी को जलाकर भस्म कर देती है, उसी तरह ये लोग क़यामत के दिन जहन्नम की आग में झोंके जाएंगे और उसी आग का ईंधन बनेंगे। यह उनके कुफ्र और अल्लाह के हुक्म से सरकशी की सज़ा होगी।
फ़ायदे (सबक):
- यह आयत हमें सिखाती है कि असली ताकत और सहारा सिर्फ़ अल्लाह पर भरोसा करना है। दौलत और औलाद — ये दुनिया की चीज़ें हैं, इन पर घमंड करना और इन्हें अपनी सुरक्षा का ज़रिया समझना बिल्कुल ग़लत है।
- यह हमें बताती है कि अल्लाह की राह में अपने धन और संतान को खर्च करना और उन्हें अल्लाह की इबादत और नेकी के लिए इस्तेमाल करना ही असली कामयाबी है। जो लोग इन्हें सिर्फ़ दुनिया के लिए जमा करते हैं और अल्लाह का हुक्म भूल जाते हैं, वे आख़िरत में बड़े नुकसान में रहेंगे।
- इस आयत से हमें यह भी सीख मिलती है कि हमें अपने जीवन में अल्लाह की इबादत और उसके दीन को सबसे आगे रखना चाहिए। अगर हमारे पास दौलत और औलाद हैं, तो हमें उन्हें अल्लाह की राह में खर्च करके अपने लिए आख़िरत की ज़खीरा बनाना चाहिए, ताकि क़यामत के दिन वे हमारे लिए रहनुमा बनें, न कि हमारे खिलाफ़ गवाह।
- यह आयत उन लोगों के लिए एक सख्त चेतावनी है जो अल्लाह के दीन से मुँह मोड़ते हैं — उनकी दुनियावी ताकत उन्हें अल्लाह के अज़ाब से नहीं बचा सकती।
📜 आयत 8-12 — आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 10
सूरा आल-इमरान आयत 10 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक जिन लोगों ने कुफ्र किया इख्तेयार किया उनको ख़ुदा…सूरा आयत 10/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 8–12. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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