आल-इमरान · 184/200
अनुवाद उच्चारण — सूरा आल-इमरान
فَإِن كَذَّبُوكَ فَقَدْ كُذِّبَ رُسُلٌ مِّن قَبْلِكَ جَاءُوا بِالْبَيِّنَاتِ وَالزُّبُرِ وَالْكِتَابِ الْمُنِيرِ ۝١٨٤
Fa in kaz zabooka faqad kuz ziba Rusulum min qablika jaaa`oo bilbaiyinaati waz Zuburi wal Kitaabil Muneer
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) अगर वह इस पर भी तुम्हें झुठलाएं तो (तुम आज़ुर्दा न हो क्योंकि) तुमसे पहले भी बहुत से पैग़म्बर रौशन मौजिज़े और सहीफे और नूरानी किताब लेकर आ चुके हैं (मगर) फिर भी लोगों ने आख़िर झुठला ही छोड़ा

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الْبَيِّنَاتِ: स्पष्ट प्रमाण और चमत्कार जो पैगंबरों की सच्चाई को दर्शाते हैं।
  • الزُّبُرِ: आसमानी किताबें, जैसे तौरात, ज़बूर आदि (यह 'ज़बूर' का बहुवचन है)।
  • الْكِتَابِ الْمُنِيرِ: वह उज्ज्वल और स्पष्ट किताब जो अंधकार को दूर करके रोशनी देती है।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! अगर ये लोग आपको झुठलाते हैं, तो आप दुखी न हों और न ही आपके दिल में कोई मलाल हो, क्योंकि यह कोई नई बात नहीं है। आपसे पहले भी कई पैगंबर आए, जिन्हें उनकी क़ौमों ने झुठलाया, जबकि वे पैगंबर अपने साथ स्पष्ट चमत्कार, खुले प्रमाण और आसमानी किताबें लेकर आए थे। उन किताबों में नसीहतें, हिदायतें और साफ-साफ कानून थे, जो लोगों को अंधकार से निकालकर रोशनी की ओर लाते थे।

यहाँ अल्लाह तआला अपने नबी को तसल्ली दे रहे हैं कि सच्चाई का रास्ता हमेशा से कठिन रहा है और नबियों को झुठलाना काफिरों की पुरानी आदत रही है। आप अकेले नहीं हैं, बल्कि आप उन महान पैगंबरों की कड़ी हैं जिन्होंने सच्चाई का संदेश पहुंचाया और दुनिया की परवाह नहीं की।

इस आयत में हमारे लिए बड़ी सीख है कि जब हम सच्चाई पर क़ायम रहते हैं और लोग हमारा मज़ाक उड़ाते हैं या हमें झुठलाते हैं, तो हमें निराश नहीं होना चाहिए। यह तो सच्चाई के रास्ते की परीक्षा है। जिस तरह पैगंबरों ने सब्र और दृढ़ता से काम लिया, हमें भी अपने ईमान में मज़बूत रहना चाहिए। अल्लाह का वादा है कि सच्चाई हमेशा बुलंद होती है, चाहे झुठलाने वाले कितने भी हों।

याद रखिए, जो लोग आज आपको झुठला रहे हैं, वह दरअसल उस सच्चाई को झुठला रहे हैं जो पैगंबरों की विरासत है। और अल्लाह के पास उनका हिसाब है। हमें अपने नबी की सुन्नत पर चलते हुए सब्र, हिम्मत और दावत का काम जारी रखना चाहिए, क्योंकि सच्चाई की जीत तय है।



📜 आयत 182-186 — सूरा आल-इमरान

182ذَٰلِكَ بِمَا قَدَّمَتْ أَيْدِيكُمْ وَأَنَّ اللَّهَ لَيْسَ بِظَلَّامٍ لِّلْعَبِيدِ
ये उन्हीं कामों का बदला है जिनको तुम्हारे हाथों ने (ज़ादे आख़ेरत बना कर) पहले से भेजा है वरना ख़ुदा तो कभी अपने बन्दों पर ज़ुल्म करने वाला नहीं
183الَّذِينَ قَالُوا إِنَّ اللَّهَ عَهِدَ إِلَيْنَا أَلَّا نُؤْمِنَ لِرَسُولٍ حَتَّىٰ يَأْتِيَنَا بِقُرْبَانٍ تَأْكُلُهُ النَّارُ ۗ قُلْ قَدْ جَاءَكُمْ رُسُلٌ مِّن قَبْلِي بِالْبَيِّنَاتِ وَبِالَّذِي قُلْتُمْ فَلِمَ قَتَلْتُمُوهُمْ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
(यह वही लोग हैं) जो कहते हैं कि ख़ुदा ने तो हमसे वायदा किया है कि जब तक कोई रसूल हमें ये (मौजिज़ा) न दिखा दे कि वह कुरबानी करे और उसको (आसमानी) आग आकर चट कर जाए उस वक्त तक हम ईमान न लाएंगें (ऐ रसूल) तुम कह दो कि (भला) ये तो बताओ बहुतेरे पैग़म्बर मुझसे क़ब्ल तुम्हारे पास वाजे व रौशन मौजिज़ात और जिस चीज़ की तुमने (उस वक्त) फ़रमाइश की है (वह भी) लेकर आए फिर तुम अगर (अपने दावे में) सच्चे तो तुमने क्यों क़त्ल किया
184فَإِن كَذَّبُوكَ فَقَدْ كُذِّبَ رُسُلٌ مِّن قَبْلِكَ جَاءُوا بِالْبَيِّنَاتِ وَالزُّبُرِ وَالْكِتَابِ الْمُنِيرِ
(ऐ रसूल) अगर वह इस पर भी तुम्हें झुठलाएं तो (तुम आज़ुर्दा न हो क्योंकि) तुमसे पहले भी बहुत से पैग़म्बर रौशन मौजिज़े और सहीफे और नूरानी किताब लेकर आ चुके हैं (मगर) फिर भी लोगों ने आख़िर झुठला ही छोड़ा
185كُلُّ نَفْسٍ ذَائِقَةُ الْمَوْتِ ۗ وَإِنَّمَا تُوَفَّوْنَ أُجُورَكُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۖ فَمَن زُحْزِحَ عَنِ النَّارِ وَأُدْخِلَ الْجَنَّةَ فَقَدْ فَازَ ۗ وَمَا الْحَيَاةُ الدُّنْيَا إِلَّا مَتَاعُ الْغُرُورِ
हर जान एक न एक (दिन) मौत का मज़ा चखेगी और तुम लोग क़यामत के दिन (अपने किए का) पूरा पूरा बदला भर पाओगे पस जो शख्स जहन्नुम से हटा दिया गया और बहिश्त में पहुंचा दिया गया पस वही कामयाब हुआ और दुनिया की (चन्द रोज़ा) ज़िन्दगी धोखे की टट्टी के सिवा कुछ नहीं
186۞ لَتُبْلَوُنَّ فِي أَمْوَالِكُمْ وَأَنفُسِكُمْ وَلَتَسْمَعُنَّ مِنَ الَّذِينَ أُوتُوا الْكِتَابَ مِن قَبْلِكُمْ وَمِنَ الَّذِينَ أَشْرَكُوا أَذًى كَثِيرًا ۚ وَإِن تَصْبِرُوا وَتَتَّقُوا فَإِنَّ ذَٰلِكَ مِنْ عَزْمِ الْأُمُورِ
(मुसलमानों) तुम्हारे मालों और जानों का तुमसे ज़रूर इम्तेहान लिया जाएगा और जिन लोगो को तुम से पहले किताबे ख़ुदा दी जा चुकी है (यहूद व नसारा) उनसे और मुशरेकीन से बहुत ही दुख दर्द की बातें तुम्हें ज़रूर सुननी पड़ेंगी और अगर तुम (उन मुसीबतों को) झेल जाओगे और परहेज़गारी करते रहोगे तो बेशक ये बड़ी हिम्मत का काम है
आल-इमरानकुरान सूची
200आयत
मदनीअवतरण स्थान
184आयत

अनुवाद — आल-इमरान 184

सूरा आल-इमरान आयत 184 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) अगर वह इस पर भी तुम्हें झुठलाएं तो…

सूरा आयत 184/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 182–186. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Monday, September 28, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए