अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- ذَائِقَةُ الْمَوْتِ: मृत्यु का स्वाद चखने वाली।
- تُوَفَّوْنَ: तुम्हें पूरा-पूरा दिया जाएगा।
- أُجُورَكُمْ: तुम्हारे कर्मों का बदला (प्रतिफल)।
- زُحْزِحَ: दूर कर दिया गया।
- مَتَاعُ الْغُرُورِ: धोखे का सामान (क्षणभंगुर सुख)।
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में एक अटल सत्य बयान कर रहे हैं कि हर जीवित प्राणी को मृत्यु का स्वाद चखना है। चाहे वह राजा हो या रंक, अमीर हो या गरीब, बूढ़ा हो या जवान — हर किसी को एक दिन इस दुनिया से जाना है। यह कोई ऐसी बात नहीं है जिसे टाला जा सके या जिससे कोई बच सके। इसलिए इंसान को इस दुनिया की चकाचौंध में मग्न नहीं हो जाना चाहिए, बल्कि उसे अपने अंजाम के लिए तैयारी करनी चाहिए।
फिर अल्लाह फरमाता है कि तुम्हारे कर्मों का पूरा बदला क़ियामत के दिन दिया जाएगा। यानी इस दुनिया में नेकी का पूरा इनाम नहीं मिलता और बुराई की पूरी सज़ा भी नहीं मिलती। असली इनाम और सज़ा का दिन क़ियामत का दिन है। उस दिन अल्लाह हर किसी को उसके अमल के अनुसार पूरा-पूरा बदला देगा — अगर अच्छे कर्म हैं तो अच्छा बदला, और अगर बुरे कर्म हैं तो बुरा बदला। यह अल्लाह का न्याय है जो बिल्कुल सटीक और बेहतरीन होगा।
इसके बाद अल्लाह सबसे बड़ी सफलता का ज़िक्र करता है — जो व्यक्ति आग (जहन्नम) से दूर कर दिया गया और जन्नत में दाखिल कर दिया गया, वही असली कामयाब है। यही सबसे बड़ी कामयाबी है जिससे बढ़कर कोई कामयाबी नहीं हो सकती। जिसे जहन्नम की आग से बचा लिया गया और जन्नत की नेमतें मिल गईं, उसने सब कुछ पा लिया। उसे न किसी डर की चिंता है और न किसी गम का अंदेशा।
आखिर में अल्लाह तआला दुनिया की हकीकत बयान करते हुए फरमाते हैं कि यह दुनिया की ज़िंदगी तो बस एक धोखे का सामान है। यानी यहाँ के सुख-दुख, माल-दौलत, ओहदे और शोहरत — सब कुछ कुछ दिनों के लिए है। जैसे कोई बाज़ार में कोई चीज़ देखकर धोखा खा जाए, वैसे ही इंसान इस दुनिया की चमक-दमक देखकर धोखा खा जाता है और समझता है कि यही सब कुछ है। हालाँकि यह सब कुछ पल भर का है और जल्द ही खत्म हो जाने वाला है।
दावत और नसीहत:
यह आयत हमें बहुत बड़ी सीख देती है। यह हमें याद दिलाती है कि मौत एक हकीकत है और उसके बाद हिसाब का दिन आना तय है। इसलिए हमें चाहिए कि हम इस दुनिया को अपना असली घर न समझें, बल्कि इसे एक मुसाफ़िरखाना समझें। जैसे एक समझदार मुसाफिर अपने सफर की तैयारी करता है, वैसे ही हमें अपनी आख़िरत की तैयारी करनी चाहिए। जो लोग इस दुनिया में अल्लाह की इबादत करते हैं, उसके बताए रास्ते पर चलते हैं, और अपने गुनाहों से तौबा करते हैं — वही लोग उस दिन कामयाब होंगे जब हर कोई अपने अमल का हिसाब देगा। अल्लाह से दुआ है कि वह हम सबको जहन्नम की आग से बचाकर जन्नत की नेमतें अता करे। आमीन।
📜 आयत 183-187 — आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 185
सूरा आल-इमरान आयत 185 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : हर जान एक न एक (दिन) मौत का मज़ा चखेगी…सूरा आयत 185/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 183–187. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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