Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تُحِبُّونَ اللَّهَ: अल्लाह से प्रेम करते हो।
- فَاتَّبِعُونِي: मेरा अनुसरण करो, मेरी पैरवी करो।
- يُحْبِبْكُمُ اللَّهُ: अल्लाह तुमसे प्रेम करेगा।
- غَفُورٌ رَّحِيمٌ: अत्यंत क्षमाशील, अत्यंत दयावान।
व्याख्या:
हे नबी! आप कह दीजिए कि यदि तुम सच्चे दिल से अल्लाह से प्रेम करते हो, तो मेरी शिक्षाओं और मेरे मार्ग का अनुसरण करो—अपने बाहरी कर्मों और आंतरिक विश्वास दोनों में। यही प्रेम का वास्तविक प्रमाण है। जो व्यक्ति इस प्रकार मेरा अनुसरण करेगा, अल्लाह उससे प्रेम करेगा और उसके पापों को क्षमा कर देगा। निस्संदेह, अल्लाह अपने ईमानवाले सेवकों के पापों को क्षमा करने वाला और उन पर दया करने वाला है।
यह आयत उन सभी लोगों के लिए निर्णायक प्रमाण है जो अल्लाह से प्रेम का दावा करते हैं। यहूदियों और ईसाइयों ने दावा किया था कि हम अल्लाह के प्रिय हैं, लेकिन अल्लाह ने स्पष्ट कर दिया कि प्रेम का दावा केवल शब्दों से नहीं, बल्कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के आदेशों और निषेधों का पालन करने से सिद्ध होता है। जो व्यक्ति इस दावे में सच्चा है, उसका कर्तव्य है कि वह नबी के मार्ग को अपनाए, क्योंकि नबी ही अल्लाह के आदेशों का सच्चा प्रतिनिधि है। इसके बिना प्रेम का दावा झूठा है।
शिक्षाएँ और लाभ:
- अल्लाह से प्रेम का वास्तविक प्रमाण नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का अनुसरण है। केवल मौखिक दावा पर्याप्त नहीं।
- यह आयत प्रेम के उस सिद्धांत को स्थापित करती है जो ईमान की मूल भावना है—अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त करने का मार्ग नबी की पैरवी में है।
- अल्लाह की क्षमा और दया असीम है; वह अपने सेवकों के पापों को क्षमा करने के लिए तैयार है, बशर्ते वे सच्चे दिल से उसकी ओर लौटें।
- यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि प्रेम केवल भावना नहीं, बल्कि व्यावहारिक आज्ञाकारिता है। यह उन्हें नबी की सुन्नत को अपनाने और उस पर दृढ़ रहने की प्रेरणा देती है।
- यहाँ से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह की राह में प्रेम और आज्ञाकारिता ही सच्ची सफलता की कुंजी है, जो पापों की क्षमा और अल्लाह की प्रसन्नता का कारण बनती है।
📜 आयत 29-33 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 31
सूरा आल-इमरान आयत 31 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) उन लोगों से कह दो कि अगर तुम…सूरा आयत 31/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 29–33. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा आल-इमरान
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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