Yawma tajidu kullu nafsim maa`amilat min khairim muhdaranw wa maa `amilat min sooo`in tawaddu law anna bainahaa wa bainahooo amadam ba`eedaa; wa yuhazzirukumul laahu nafsah; wallaahu ra`oofum bil`ibaad
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
(और उस दिन को याद रखो) जिस दिन हर शख्स जो कुछ उसने (दुनिया में) नेकी की है और जो कुछ बुराई की है उसको मौजूद पाएगा (और) आरज़ू करेगा कि काश उस की बदी और उसके दरमियान में ज़मानए दराज़ (हाएल) हो जाता और ख़ुदा तुमको अपने ही से डराता है और ख़ुदा अपने बन्दों पर बड़ा शफ़ीक़ और (मेहरबान भी) है
🌐 Additional reference in اردو
🌐 اردو
جس دن ہر شخص اپنے اعمال کی نیکی کو موجود پالے گا اور ان کی برائی کو بھی (دیکھ لے گا) تو آرزو کرے گا کہ اے کاش اس میں اور اس برائی میں دور کی مسافت ہو جاتی اور خدا تم کو اپنے (غضب) سے ڈراتا ہے اور خدا اپنے بندوں پر نہایت مہربان ہے
उस दिन को याद करो जब हर व्यक्ति अपने सामने वह सब कुछ पाएगा जो उसने भलाई का किया होगा—पूरा का पूरा, बिना किसी कमी के, मौजूद और तैयार। और जो बुराई उसने की होगी, वह भी उसके सामने आ खड़ी होगी। उस वक्त वह दिल से चाहेगा कि काश! उसके और उसकी बुराई के बीच बहुत लंबा फासला हो जाता—इतना दूर कि वह उसे कभी न देख सके। लेकिन यह केवल पछतावा और अफसोस होगा, जो उस दिन किसी काम न आएगा।
अल्लाह तआला अपने बंदों को इस दिन से डराता है और अपने अज़ाब से सावधान करता है, ताकि वे गुनाहों से बचें और उसकी नाराज़गी से दूर रहें। यह चेतावनी उसकी ओर से महज़ डराने के लिए नहीं, बल्कि उसकी अत्यधिक दया और करुणा का परिणाम है। वह अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है, इसलिए वह उन्हें पहले ही आगाह कर देता है, ताकि वे आज ही सुधार कर लें और कल के पछतावे से बच जाएँ।
फ़ायदे (सबक):
यह आयत हमें सिखाती है कि हमारा हर अच्छा और बुरा काम लिखा जा रहा है और क़यामत के दिन हमारे सामने पेश किया जाएगा। इसलिए हर काम सोच-समझकर करना चाहिए।
अल्लाह की चेतावनी उसके ग़ुस्से का सबूत नहीं, बल्कि उसकी रहमत का इज़हार है। वह हमें डरा रहा है ताकि हम जहन्नम से बचें और जन्नत की तरफ बढ़ें।
इस आयत से हमें यह उम्मीद मिलती है कि अल्लाह अपने बंदों से बहुत प्यार करता है। वह हमारी भलाई चाहता है, इसलिए उसकी बात मानना और उसके हुक्मों पर चलना ही हमारी सच्ची कामयाबी है।
हमें आज ही अपने अमलों की जाँच करनी चाहिए और जहाँ कमी हो, उसे सुधारने की कोशिश करनी चाहिए, ताकि कल के दिन हमें पछताना न पड़े।
(और उस दिन को याद रखो) जिस दिन हर शख्स जो कुछ उसने (दुनिया में) नेकी की है और जो कुछ बुराई की है उसको मौजूद पाएगा (और) आरज़ू करेगा कि काश उस की बदी और उसके दरमियान में ज़मानए दराज़ (हाएल) हो जाता और ख़ुदा तुमको अपने ही से डराता है और ख़ुदा अपने बन्दों पर बड़ा शफ़ीक़ और (मेहरबान भी) है
मोमिनीन मोमिनीन को छोड़ के काफ़िरों को अपना सरपरस्त न बनाऐं और जो ऐसा करेगा तो उससे ख़ुदा से कुछ सरोकार नहीं मगर (इस क़िस्म की तदबीरों से) किसी तरह उन (के शर) से बचना चाहो तो (ख़ैर) और ख़ुदा तुमको अपने ही से डराता है और ख़ुदा ही की तरफ़ लौट कर जाना है
ऐ रसूल तुम उन (लोगों से) कह दो किजो कुछ तुम्हारे दिलों में है तो ख्वाह उसे छिपाओ या ज़ाहिर करो (बहरहाल) ख़ुदा तो उसे जानता है और जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में वह (सब कुछ) जानता है और ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है
(और उस दिन को याद रखो) जिस दिन हर शख्स जो कुछ उसने (दुनिया में) नेकी की है और जो कुछ बुराई की है उसको मौजूद पाएगा (और) आरज़ू करेगा कि काश उस की बदी और उसके दरमियान में ज़मानए दराज़ (हाएल) हो जाता और ख़ुदा तुमको अपने ही से डराता है और ख़ुदा अपने बन्दों पर बड़ा शफ़ीक़ और (मेहरबान भी) है
(ऐ रसूल) उन लोगों से कह दो कि अगर तुम ख़ुदा को दोस्त रखते हो तो मेरी पैरवी करो कि ख़ुदा (भी) तुमको दोस्त रखेगा और तुमको तुम्हारे गुनाह बख्श देगा और खुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
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