आल-इमरान · 43/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
يَا مَرْيَمُ اقْنُتِي لِرَبِّكِ وَاسْجُدِي وَارْكَعِي مَعَ الرَّاكِعِينَ ۝٤٣
Yaa Maryamuq nutee li Rabbiki wasjudee warka`ee ma`ar raaki`een
📖 हिंदी अर्थ
(तो) ऐ मरियम इसके शुक्र से मैं अपने परवरदिगार की फ़रमाबदारी करूं सजदा और रूकूउ करने वालों के साथ रूकूउ करती रहूं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اقْنُتِي (क़ुनुती): अर्थात अल्लाह की आज्ञा का पालन करना, उसकी इबादत में लगे रहना, और नमाज़ में लंबे समय तक खड़े रहना।
  • لِرَبِّكِ (लिरब्बिकि): अपने पालनहार के लिए।
  • وَاسْجُدِي (वस्जुदी): सजदा करो।
  • وَارْكَعِي (वर्कई): रुकू करो।
  • مَعَ الرَّاكِعِينَ (मअर्राकिईन): रुकू करने वालों के साथ।

तफ़सीर (व्याख्या):

हे मरियम! तुम अपने रब की इबादत में लगी रहो, उसकी आज्ञा का पालन करो, और नमाज़ में लंबे समय तक खड़े होकर क़ियाम करो। अपने रब के सामने सजदा करो और रुकू करो, और ऐसा उन लोगों के साथ करो जो रुकू करते हैं, अर्थात नमाज़ को जमात (सामूहिक रूप) से अदा करो। यहाँ सजदे का ज़िक्र रुकू से पहले किया गया है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि सजदा रुकू से पहले होता है; बल्कि अरबी भाषा में "व" (और) का प्रयोग क्रम के लिए आवश्यक नहीं है, बल्कि यहाँ उद्देश्य इबादत की अधिकता और अल्लाह के प्रति समर्पण को दर्शाना है। साथ ही, "रुकू करने वालों" का उल्लेख सामान्य रूप से किया गया है, जिसमें पुरुष और स्त्रियाँ दोनों शामिल हैं, ताकि यह स्पष्ट हो कि यह आदेश केवल मरियम के लिए नहीं, बल्कि सभी ईमानवालों के लिए एक सामान्य मार्गदर्शन है।


फ़ायदे (लाभ और शिक्षाएँ):

  1. इबादत में दृढ़ता: यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की इबादत में निरंतरता और दृढ़ता होनी चाहिए, चाहे हालात कैसे भी हों। हज़रत मरियम (अलैहिस्सलाम) जैसी पाक दामन और नेक महिला को भी यह आदेश दिया गया, तो हमें और अधिक परिश्रम करना चाहिए।
  2. जमात की अहमियत: "रुकू करने वालों के साथ" का वाक्यांश हमें नमाज़ जमात से पढ़ने की तरग़ीब देता है, क्योंकि जमात में एकता, भाईचारा और अल्लाह की रहमत का नुज़ूल होता है।
  3. अल्लाह की नेमतों का शुक्र: यह आदेश अल्लाह की नेमतों के शुक्र के रूप में दिया गया, जो उसने मरियम को प्रदान की थीं। यह हमें सिखाता है कि अल्लाह की नेमतों का सही शुक्र उसकी इबादत और आज्ञाकारिता से अदा होता है।
  4. इबादत में समर्पण: सजदा और रुकू अल्लाह के सामने पूर्ण समर्पण और विनम्रता के प्रतीक हैं। यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपने रब के सामने पूरी तरह झुकना चाहिए और अपने अहंकार को त्याग देना चाहिए।
  5. स्त्रियों की इबादत में प्रोत्साहन: यह आयत स्त्रियों को इबादत और अल्लाह की आज्ञाकारिता में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है, और दर्शाती है कि इस्लाम में स्त्रियों का धार्मिक स्थान बहुत ऊँचा है।
🎧 सुनें

📜 आयत 41-45 — आल-इमरान

41قَالَ رَبِّ اجْعَل لِّي آيَةً ۖ قَالَ آيَتُكَ أَلَّا تُكَلِّمَ النَّاسَ ثَلَاثَةَ أَيَّامٍ إِلَّا رَمْزًا ۗ وَاذْكُر رَّبَّكَ كَثِيرًا وَسَبِّحْ بِالْعَشِيِّ وَالْإِبْكَارِ
ज़करिया ने अर्ज़ की परवरदिगार मेरे इत्मेनान के लिए कोई निशानी मुक़र्रर फ़रमा इरशाद हुआ तुम्हारी निशानी ये है तुम तीन दिन तक लोगों से बात न कर सकोगे मगर इशारे से और (उसके शुक्रिये में) अपने परवरदिगार की अक्सर याद करो और रात को और सुबह तड़के (हमारी) तसबीह किया करो
42وَإِذْ قَالَتِ الْمَلَائِكَةُ يَا مَرْيَمُ إِنَّ اللَّهَ اصْطَفَاكِ وَطَهَّرَكِ وَاصْطَفَاكِ عَلَىٰ نِسَاءِ الْعَالَمِينَ
और वह वाक़िया भी याद करो जब फ़रिश्तों ने मरियम से कहा, ऐ मरियम तुमको ख़ुदा ने बरगुज़ीदा किया और (तमाम) गुनाहों और बुराइयों से पाक साफ़ रखा और सारे दुनिया जहॉन की औरतों में से तुमको मुन्तख़िब किया है
43يَا مَرْيَمُ اقْنُتِي لِرَبِّكِ وَاسْجُدِي وَارْكَعِي مَعَ الرَّاكِعِينَ
(तो) ऐ मरियम इसके शुक्र से मैं अपने परवरदिगार की फ़रमाबदारी करूं सजदा और रूकूउ करने वालों के साथ रूकूउ करती रहूं
44ذَٰلِكَ مِنْ أَنبَاءِ الْغَيْبِ نُوحِيهِ إِلَيْكَ ۚ وَمَا كُنتَ لَدَيْهِمْ إِذْ يُلْقُونَ أَقْلَامَهُمْ أَيُّهُمْ يَكْفُلُ مَرْيَمَ وَمَا كُنتَ لَدَيْهِمْ إِذْ يَخْتَصِمُونَ
(ऐ रसूल) ये ख़बर गैब की ख़बरों में से है जो हम तुम्हारे पास 'वही' के ज़रिए से भेजते हैं (ऐ रसूल) तुम तो उन सरपरस्ताने मरियम के पास मौजूद न थे जब वह लोग अपना अपना क़लम दरिया में बतौर क़ुरआ के डाल रहे थे (देखें) कौन मरियम का कफ़ील बनता है और न तुम उस वक्त उनके पास मौजूद थे जब वह लोग आपस में झगड़ रहे थे
45إِذْ قَالَتِ الْمَلَائِكَةُ يَا مَرْيَمُ إِنَّ اللَّهَ يُبَشِّرُكِ بِكَلِمَةٍ مِّنْهُ اسْمُهُ الْمَسِيحُ عِيسَى ابْنُ مَرْيَمَ وَجِيهًا فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ وَمِنَ الْمُقَرَّبِينَ
(वह वाक़िया भी याद करो) जब फ़रिश्तों ने (मरियम) से कहा ऐ मरियम ख़ुदा तुमको सिर्फ़ अपने हुक्म से एक लड़के के पैदा होने की खुशख़बरी देता है जिसका नाम ईसा मसीह इब्ने मरियम होगा (और) दुनिया और आखेरत (दोनों) में बाइज्ज़त (आबरू) और ख़ुदा के मुक़र्रब बन्दों में होगा
आल-इमरानकुरान सूची
200आयत
मदनीRevelation
43आयत

अनुवाद — आल-इमरान 43

सूरा आल-इमरान आयत 43 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (तो) ऐ मरियम इसके शुक्र से मैं अपने परवरदिगार की…

सूरा आयत 43/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 41–45. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए