Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- اقْنُتِي (क़ुनुती): अर्थात अल्लाह की आज्ञा का पालन करना, उसकी इबादत में लगे रहना, और नमाज़ में लंबे समय तक खड़े रहना।
- لِرَبِّكِ (लिरब्बिकि): अपने पालनहार के लिए।
- وَاسْجُدِي (वस्जुदी): सजदा करो।
- وَارْكَعِي (वर्कई): रुकू करो।
- مَعَ الرَّاكِعِينَ (मअर्राकिईन): रुकू करने वालों के साथ।
तफ़सीर (व्याख्या):
हे मरियम! तुम अपने रब की इबादत में लगी रहो, उसकी आज्ञा का पालन करो, और नमाज़ में लंबे समय तक खड़े होकर क़ियाम करो। अपने रब के सामने सजदा करो और रुकू करो, और ऐसा उन लोगों के साथ करो जो रुकू करते हैं, अर्थात नमाज़ को जमात (सामूहिक रूप) से अदा करो। यहाँ सजदे का ज़िक्र रुकू से पहले किया गया है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि सजदा रुकू से पहले होता है; बल्कि अरबी भाषा में "व" (और) का प्रयोग क्रम के लिए आवश्यक नहीं है, बल्कि यहाँ उद्देश्य इबादत की अधिकता और अल्लाह के प्रति समर्पण को दर्शाना है। साथ ही, "रुकू करने वालों" का उल्लेख सामान्य रूप से किया गया है, जिसमें पुरुष और स्त्रियाँ दोनों शामिल हैं, ताकि यह स्पष्ट हो कि यह आदेश केवल मरियम के लिए नहीं, बल्कि सभी ईमानवालों के लिए एक सामान्य मार्गदर्शन है।
फ़ायदे (लाभ और शिक्षाएँ):
- इबादत में दृढ़ता: यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की इबादत में निरंतरता और दृढ़ता होनी चाहिए, चाहे हालात कैसे भी हों। हज़रत मरियम (अलैहिस्सलाम) जैसी पाक दामन और नेक महिला को भी यह आदेश दिया गया, तो हमें और अधिक परिश्रम करना चाहिए।
- जमात की अहमियत: "रुकू करने वालों के साथ" का वाक्यांश हमें नमाज़ जमात से पढ़ने की तरग़ीब देता है, क्योंकि जमात में एकता, भाईचारा और अल्लाह की रहमत का नुज़ूल होता है।
- अल्लाह की नेमतों का शुक्र: यह आदेश अल्लाह की नेमतों के शुक्र के रूप में दिया गया, जो उसने मरियम को प्रदान की थीं। यह हमें सिखाता है कि अल्लाह की नेमतों का सही शुक्र उसकी इबादत और आज्ञाकारिता से अदा होता है।
- इबादत में समर्पण: सजदा और रुकू अल्लाह के सामने पूर्ण समर्पण और विनम्रता के प्रतीक हैं। यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपने रब के सामने पूरी तरह झुकना चाहिए और अपने अहंकार को त्याग देना चाहिए।
- स्त्रियों की इबादत में प्रोत्साहन: यह आयत स्त्रियों को इबादत और अल्लाह की आज्ञाकारिता में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है, और दर्शाती है कि इस्लाम में स्त्रियों का धार्मिक स्थान बहुत ऊँचा है।
📜 आयत 41-45 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 43
सूरा आल-इमरान आयत 43 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (तो) ऐ मरियम इसके शुक्र से मैं अपने परवरदिगार की…सूरा आयत 43/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 41–45. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा आल-इमरान
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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