Wa iz qaalatil malaaa`ikatu yaa Ya Maryamu innal laahas tafaaki wa tahharaki wastafaaki `alaa nisaaa`il `aalameen
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
और वह वाक़िया भी याद करो जब फ़रिश्तों ने मरियम से कहा, ऐ मरियम तुमको ख़ुदा ने बरगुज़ीदा किया और (तमाम) गुनाहों और बुराइयों से पाक साफ़ रखा और सारे दुनिया जहॉन की औरतों में से तुमको मुन्तख़िब किया है
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اور جب فرشتوں نے (مریم سے) کہا کہ مریم! خدا نے تم کو برگزیدہ کیا ہے اور پاک بنایا ہے اور جہان کی عورتوں میں منتخب کیا ہے
اصْطَفَاكِ: तुम्हें चुन लिया, विशेष रूप से चुन लिया।
طَهَّرَكِ: तुम्हें पवित्र कर दिया, हर गंदगी और कमी से दूर कर दिया।
نِسَاءِ الْعَالَمِينَ: संसार की सभी स्त्रियाँ (अपने ज़माने की)।
व्याख्या:
ऐ नबी! उस समय को याद करो जब फ़रिश्तों ने मरयम (अलैहिस्सलाम) से कहा: "ऐ मरयम! बेशक अल्लाह ने तुम्हें अपनी इबादत और अपनी ख़िदमत के लिए चुन लिया है, और तुम्हें हर बुराई, हर गुनाह और हर उस चीज़ से पाक कर दिया है जो इंसान को अल्लाह से दूर करती है। उसने तुम्हें अपने ज़माने की सारी दुनिया की स्त्रियों पर फ़ज़ीलत दी है और तुम्हें सबसे ऊँचा मर्तबा अता किया है।"
यह चुनाव और पवित्रता अल्लाह की तरफ़ से थी, जो उसकी रहमत और क़ुदरत का नतीजा थी। मरयम (अलैहिस्सलाम) को यह शरफ़ हासिल हुआ कि वह बग़ैर पति के ईसा (अलैहिस्सलाम) की माँ बनीं, और यह अल्लाह का एक बड़ा मोजिज़ा था। यहाँ "दुनिया की स्त्रियों पर फ़ज़ीलत" से मुराद उनके ज़माने की स्त्रियाँ हैं, क्योंकि हर ज़माने में अल्लाह की पाकबाज़ बंदियों को अपने ज़माने के हिसाब से फ़ज़ीलत दी जाती है। हज़रत आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) और दूसरी उम्मत की पाक दामन औरतों को भी अपने-अपने ज़माने में यह मर्तबा हासिल है।
फ़ायदे और सबक़:
अल्लाह जिसे चाहता है अपनी रहमत से नवाज़ता है और उसे ख़ास बना लेता है। यह चुनाव अल्लाह की तरफ़ से होता है, किसी इंसान की तरफ़ से नहीं।
पवित्रता और पाकीज़गी अल्लाह की बड़ी नेमत है। इंसान को चाहिए कि वह अपने दिल, अपने अमल और अपनी ज़िंदगी को पाक रखे, क्योंकि अल्लाह पाक लोगों से मुहब्बत करता है।
औरतों का इस्लाम में बहुत बड़ा मर्तबा है। मरयम (अलैहिस्सलाम) की फ़ज़ीलत से साबित होता है कि अल्लाह के नज़दीक सच्ची इबादत और पाकीज़गी ही असली बड़ाई का ज़रिया है, चाहे वह मर्द हो या औरत।
जब अल्लाह किसी को कोई ज़िम्मेदारी देता है, तो उसे ताक़त और तैयारी भी देता है। मरयम (अलैहिस्सलाम) को अल्लाह ने चुना और उन्हें हर मुश्किल में सहारा दिया।
यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपने अंदर अच्छे अख़लाक़ और पाकीज़गी पैदा करनी चाहिए, ताकि हम अल्लाह की नज़र में पसंदीदा बन सकें।
और वह वाक़िया भी याद करो जब फ़रिश्तों ने मरियम से कहा, ऐ मरियम तुमको ख़ुदा ने बरगुज़ीदा किया और (तमाम) गुनाहों और बुराइयों से पाक साफ़ रखा और सारे दुनिया जहॉन की औरतों में से तुमको मुन्तख़िब किया है
ज़करिया ने अर्ज़ की परवरदिगार मुझे लड़का क्योंकर हो सकता है हालॉकि मेरा बुढ़ापा आ पहुंचा और (उसपर) मेरी बीवी बॉझ है (ख़ुदा ने) फ़रमाया इसी तरह ख़ुदा जो चाहता है करता है
ज़करिया ने अर्ज़ की परवरदिगार मेरे इत्मेनान के लिए कोई निशानी मुक़र्रर फ़रमा इरशाद हुआ तुम्हारी निशानी ये है तुम तीन दिन तक लोगों से बात न कर सकोगे मगर इशारे से और (उसके शुक्रिये में) अपने परवरदिगार की अक्सर याद करो और रात को और सुबह तड़के (हमारी) तसबीह किया करो
और वह वाक़िया भी याद करो जब फ़रिश्तों ने मरियम से कहा, ऐ मरियम तुमको ख़ुदा ने बरगुज़ीदा किया और (तमाम) गुनाहों और बुराइयों से पाक साफ़ रखा और सारे दुनिया जहॉन की औरतों में से तुमको मुन्तख़िब किया है
(ऐ रसूल) ये ख़बर गैब की ख़बरों में से है जो हम तुम्हारे पास 'वही' के ज़रिए से भेजते हैं (ऐ रसूल) तुम तो उन सरपरस्ताने मरियम के पास मौजूद न थे जब वह लोग अपना अपना क़लम दरिया में बतौर क़ुरआ के डाल रहे थे (देखें) कौन मरियम का कफ़ील बनता है और न तुम उस वक्त उनके पास मौजूद थे जब वह लोग आपस में झगड़ रहे थे
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