Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مُصَدِّقًا: सत्यापित करने वाला, पुष्टि करने वाला
- بَيْنَ يَدَيَّ: मुझसे पहले की गई चीज़ें, यानी मेरे समय से पहले उतरी हुई किताबें
- تُحِلَّ: हलाल करना, अनुमति देना
- حُرِّمَ: हराम किया गया, प्रतिबंधित किया गया
- آيَةٍ: निशानी, चमत्कार, प्रमाण
- فَاتَّقُوا: अल्लाह से डरो, उसकी अवज्ञा से बचो
- أَطِيعُونِ: मेरी आज्ञा मानो, मेरी बात पर चलो
विस्तृत व्याख्या:
यह आयत हमारे नबी ईसा (अलैहिस्सलाम) का वह कथन है जो उन्होंने बनी इसराईल से कहा था। वे अपनी कौम के पास अल्लाह की ओर से रसूल बनकर आए थे। उन्होंने सबसे पहले यह घोषणा की कि मैं उस तौरात (तोराह) की पुष्टि करता हूँ जो मुझसे पहले उतरी थी। मेरा संदेश उस किताब के खिलाफ नहीं है, बल्कि उसकी सच्चाई की गवाही देता है। यह उनके नबुव्वत की सच्चाई का एक बड़ा प्रमाण था कि वे पिछली किताबों की पुष्टि करते हुए आए।
दूसरी बात यह कि वे बनी इसराईल के लिए कुछ उन चीज़ों को हलाल करने के लिए आए थे जो पहले उन पर हराम की गई थीं। यह अल्लाह की ओर से एक राहत और आसानी थी। यह कोई मनमानी नहीं थी, बल्कि अल्लाह के आदेश से थी। इससे पता चलता है कि अल्लाह अपने बंदों पर आसानी चाहता है और जब वह चाहता है, तो अपनी रहमत से कुछ चीज़ों को हलाल कर सकता है।
फिर उन्होंने कहा कि मैं तुम्हारे पास अपने रब की ओर से एक स्पष्ट निशानी (चमत्कार) लेकर आया हूँ जो मेरी सच्चाई का प्रमाण है। यह चमत्कार इस बात की गवाही देता है कि मैं अल्लाह का भेजा हुआ हूँ। इसलिए तुम पर यह अनिवार्य है कि अल्लाह से डरो, उसकी अवज्ञा से बचो और उसके आदेशों का पालन करो। और मेरी आज्ञा मानो, क्योंकि मैं तुम्हें अल्लाह की तरफ बुलाता हूँ और जो कुछ मैं कहता हूँ, वह अल्लाह की ओर से है।
इस आयत में हमारे लिए एक बड़ा सबक है। हमें अपने नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की आज्ञा का पालन करना चाहिए, क्योंकि वे भी इसी तरह सच्चाई और स्पष्ट प्रमाणों के साथ आए थे। जिस तरह ईसा (अलैहिस्सलाम) ने अपनी कौम से कहा था कि अल्लाह से डरो और मेरी आज्ञा मानो, उसी तरह हमारे नबी ने भी हमें अल्लाह की इबादत और अपनी सुन्नत पर चलने की ताकीद की है। जो व्यक्ति अल्लाह से डरता है और अपने नबी की आज्ञा का पालन करता है, वह दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होता है। अल्लाह की रहमत और उसकी माफी उसी के लिए है जो उसके आगे झुकता है और उसके रसूल की बात मानता है। यही सच्ची भलाई और सफलता का रास्ता है।
📜 आयत 48-52 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 50
सूरा आल-इमरान आयत 50 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और तौरेत जो मेरे सामने मौजूद है मैं उसकी तसदीक़…सूरा आयत 50/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 48–52. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा आल-इमरान
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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