आल-इमरान · 50/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
وَمُصَدِّقًا لِّمَا بَيْنَ يَدَيَّ مِنَ التَّوْرَاةِ وَلِأُحِلَّ لَكُم بَعْضَ الَّذِي حُرِّمَ عَلَيْكُمْ ۚ وَجِئْتُكُم بِآيَةٍ مِّن رَّبِّكُمْ فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ ۝٥٠
Wa musaddiqal limaa baina yadaiya minat Tawraati wa liuhilla lakum ba`dal lazee hurrima `alaikum; wa ji`tukum bi Aayatim mir Rabbikum fattaqul laaha wa atee`oon
📖 हिंदी अर्थ
और तौरेत जो मेरे सामने मौजूद है मैं उसकी तसदीक़ करता हूं और (मेरे आने की) एक ग़रज़ यह (भी) है कि जो चीजे तुम पर हराम है उनमें से बाज़ को (हुक्मे ख़ुदा से) हलाल कर दूं और मैं तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से (अपनी नबूवत की) निशानी लेकर तुम्हारे पास आया हूं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مُصَدِّقًا: सत्यापित करने वाला, पुष्टि करने वाला
  • بَيْنَ يَدَيَّ: मुझसे पहले की गई चीज़ें, यानी मेरे समय से पहले उतरी हुई किताबें
  • تُحِلَّ: हलाल करना, अनुमति देना
  • حُرِّمَ: हराम किया गया, प्रतिबंधित किया गया
  • آيَةٍ: निशानी, चमत्कार, प्रमाण
  • فَاتَّقُوا: अल्लाह से डरो, उसकी अवज्ञा से बचो
  • أَطِيعُونِ: मेरी आज्ञा मानो, मेरी बात पर चलो

विस्तृत व्याख्या:

यह आयत हमारे नबी ईसा (अलैहिस्सलाम) का वह कथन है जो उन्होंने बनी इसराईल से कहा था। वे अपनी कौम के पास अल्लाह की ओर से रसूल बनकर आए थे। उन्होंने सबसे पहले यह घोषणा की कि मैं उस तौरात (तोराह) की पुष्टि करता हूँ जो मुझसे पहले उतरी थी। मेरा संदेश उस किताब के खिलाफ नहीं है, बल्कि उसकी सच्चाई की गवाही देता है। यह उनके नबुव्वत की सच्चाई का एक बड़ा प्रमाण था कि वे पिछली किताबों की पुष्टि करते हुए आए।

दूसरी बात यह कि वे बनी इसराईल के लिए कुछ उन चीज़ों को हलाल करने के लिए आए थे जो पहले उन पर हराम की गई थीं। यह अल्लाह की ओर से एक राहत और आसानी थी। यह कोई मनमानी नहीं थी, बल्कि अल्लाह के आदेश से थी। इससे पता चलता है कि अल्लाह अपने बंदों पर आसानी चाहता है और जब वह चाहता है, तो अपनी रहमत से कुछ चीज़ों को हलाल कर सकता है।

फिर उन्होंने कहा कि मैं तुम्हारे पास अपने रब की ओर से एक स्पष्ट निशानी (चमत्कार) लेकर आया हूँ जो मेरी सच्चाई का प्रमाण है। यह चमत्कार इस बात की गवाही देता है कि मैं अल्लाह का भेजा हुआ हूँ। इसलिए तुम पर यह अनिवार्य है कि अल्लाह से डरो, उसकी अवज्ञा से बचो और उसके आदेशों का पालन करो। और मेरी आज्ञा मानो, क्योंकि मैं तुम्हें अल्लाह की तरफ बुलाता हूँ और जो कुछ मैं कहता हूँ, वह अल्लाह की ओर से है।

इस आयत में हमारे लिए एक बड़ा सबक है। हमें अपने नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की आज्ञा का पालन करना चाहिए, क्योंकि वे भी इसी तरह सच्चाई और स्पष्ट प्रमाणों के साथ आए थे। जिस तरह ईसा (अलैहिस्सलाम) ने अपनी कौम से कहा था कि अल्लाह से डरो और मेरी आज्ञा मानो, उसी तरह हमारे नबी ने भी हमें अल्लाह की इबादत और अपनी सुन्नत पर चलने की ताकीद की है। जो व्यक्ति अल्लाह से डरता है और अपने नबी की आज्ञा का पालन करता है, वह दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होता है। अल्लाह की रहमत और उसकी माफी उसी के लिए है जो उसके आगे झुकता है और उसके रसूल की बात मानता है। यही सच्ची भलाई और सफलता का रास्ता है।



📜 आयत 48-52 — आल-इमरान

48وَيُعَلِّمُهُ الْكِتَابَ وَالْحِكْمَةَ وَالتَّوْرَاةَ وَالْإِنجِيلَ
और (ऐ मरयिम) ख़ुदा उसको (तमाम) किताबे आसमानी और अक्ल की बातें और (ख़ासकर) तौरेत व इन्जील सिखा देगा
49وَرَسُولًا إِلَىٰ بَنِي إِسْرَائِيلَ أَنِّي قَدْ جِئْتُكُم بِآيَةٍ مِّن رَّبِّكُمْ ۖ أَنِّي أَخْلُقُ لَكُم مِّنَ الطِّينِ كَهَيْئَةِ الطَّيْرِ فَأَنفُخُ فِيهِ فَيَكُونُ طَيْرًا بِإِذْنِ اللَّهِ ۖ وَأُبْرِئُ الْأَكْمَهَ وَالْأَبْرَصَ وَأُحْيِي الْمَوْتَىٰ بِإِذْنِ اللَّهِ ۖ وَأُنَبِّئُكُم بِمَا تَأْكُلُونَ وَمَا تَدَّخِرُونَ فِي بُيُوتِكُمْ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً لَّكُمْ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ
और बनी इसराइल का रसूल (क़रार देगा और वह उनसे यूं कहेगा कि) मैं तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से (अपनी नबूवत की) यह निशानी लेकर आया हूं कि मैं गुंधीं हुई मिट्टी से एक परिन्दे की सूरत बनाऊॅगा फ़िर उस पर (कुछ) दम करूंगा तो वो ख़ुदा के हुक्म से उड़ने लगेगा और मैं ख़ुदा ही के हुक्म से मादरज़ाद (पैदायशी) अंधे और कोढ़ी को अच्छा करूंगा और मुर्दो को ज़िन्दा करूंगा और जो कुछ तुम खाते हो और अपने घरों में जमा करते हो मैं (सब) तुमको बता दूंगा अगर तुम ईमानदार हो तो बेशक तुम्हारे लिये इन बातों में (मेरी नबूवत की) बड़ी निशानी है
50وَمُصَدِّقًا لِّمَا بَيْنَ يَدَيَّ مِنَ التَّوْرَاةِ وَلِأُحِلَّ لَكُم بَعْضَ الَّذِي حُرِّمَ عَلَيْكُمْ ۚ وَجِئْتُكُم بِآيَةٍ مِّن رَّبِّكُمْ فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ
और तौरेत जो मेरे सामने मौजूद है मैं उसकी तसदीक़ करता हूं और (मेरे आने की) एक ग़रज़ यह (भी) है कि जो चीजे तुम पर हराम है उनमें से बाज़ को (हुक्मे ख़ुदा से) हलाल कर दूं और मैं तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से (अपनी नबूवत की) निशानी लेकर तुम्हारे पास आया हूं
51إِنَّ اللَّهَ رَبِّي وَرَبُّكُمْ فَاعْبُدُوهُ ۗ هَٰذَا صِرَاطٌ مُّسْتَقِيمٌ
पस तुम ख़ुदा से डरो और मेरी इताअत करो बेशक ख़ुदा ही मेरा और तुम्हारा परवरदिगार है
52۞ فَلَمَّا أَحَسَّ عِيسَىٰ مِنْهُمُ الْكُفْرَ قَالَ مَنْ أَنصَارِي إِلَى اللَّهِ ۖ قَالَ الْحَوَارِيُّونَ نَحْنُ أَنصَارُ اللَّهِ آمَنَّا بِاللَّهِ وَاشْهَدْ بِأَنَّا مُسْلِمُونَ
पस उसकी इबादत करो (क्योंकि) यही नजात का सीधा रास्ता है फिर जब ईसा ने (इतनी बातों के बाद भी) उनका कुफ़्र (पर अड़े रहना) देखा तो (आख़िर) कहने लगे कौन ऐसा है जो ख़ुदा की तरफ़ होकर मेरा मददगार बने (ये सुनकर) हवारियों ने कहा हम ख़ुदा के तरफ़दार हैं और हम ख़ुदा पर ईमान लाए
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अनुवाद — आल-इमरान 50

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Tuesday, August 18, 2026

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