अर-रूम · 45/60
अनुवाद उच्चारण — अर-रूम
لِيَجْزِيَ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ مِن فَضْلِهِ ۚ إِنَّهُ لَا يُحِبُّ الْكَافِرِينَ ۝٤٥
Li yajziyal lazeena aamanoo wa `amilus saalihaati min fadlih; innahoo laa yuhibbul kaafireen
📖 हिंदी अर्थ
ताकि जो लोग ईमान लाए और अच्छे अच्छे काम किए उनको ख़ुदा अपने फज़ल व (करम) से अच्छी जज़ा अता करेगा वह यक़ीनन कुफ्फ़ार से उलफ़त नहीं रखता
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لِيَجْزِيَ: ताकि वह बदला दे
  • مِن فَضْلِهِ: अपने अनुग्रह और उपकार से
  • لَا يُحِبُّ الْكَافِرِينَ: काफिरों से प्रेम नहीं करता (अर्थात उन पर क्रोधित है)

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत उस महान न्याय और अनुग्रह का वर्णन करती है जो अल्लाह तआला अपने ईमानवाले और नेक कर्म करने वाले बंदों के साथ करेगा। अल्लाह तआला ने यह घोषणा की है कि जो लोग अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाए और अपने जीवन को अच्छे कर्मों से सजाया—नमाज़ क़ायम की, ज़कात दी, सच बोला, अमानत को निभाया, लोगों के साथ भलाई की—तो अल्लाह उन्हें अपने विशाल अनुग्रह और दया से पुरस्कृत करेगा। यह पुरस्कार उनके कर्मों की कमाई नहीं, बल्कि अल्लाह का शुद्ध अनुग्रह है, क्योंकि अल्लाह के करीम होने का यही तरीक़ा है कि वह थोड़े अमल पर बहुत बड़ा इनाम देता है।

यह आयत मोमिनों के लिए खुशखबरी है कि उनकी मेहनत और अच्छे कर्म राईगां नहीं जाएंगे। अल्लाह तआला हर अच्छे काम को देखता है और उसका पूरा-पूरा बदला देगा। यह अल्लाह का वादा है, और अल्लाह का वादा कभी टूटता नहीं। इसलिए मोमिन को चाहिए कि वह अच्छे कर्मों पर डटा रहे, चाहे दुनिया में उसे कितनी भी मुश्किलें क्यों न आएं, क्योंकि असली कामयाबी आख़िरत में है।

दूसरी ओर, अल्लाह तआला स्पष्ट करता है कि वह काफिरों से प्रेम नहीं करता। काफिर वे लोग हैं जिन्होंने अल्लाह की नेमतों को झुठलाया, उसके रसूलों को नकारा और उसकी इबादत से मुंह मोड़ा। अल्लाह का उनसे प्रेम न करना उनके लिए सबसे बड़ी सज़ा है, क्योंकि जिस बंदे से अल्लाह नाराज़ हो जाए, उसके लिए दुनिया और आख़िरत दोनों में कोई भलाई नहीं। यह अल्लाह का न्यायपूर्ण फैसला है, क्योंकि जो अल्लाह की रहमत और हिदायत को ठुकरा दे, उसके लिए अल्लाह की नाराज़गी ही उचित है।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हम अपने जीवन को ईमान और अच्छे कर्मों पर स्थापित करें। अल्लाह की रहमत और उसका अनुग्रह उन्हीं के लिए है जो उसकी ओर रुजू करते हैं। हमें चाहिए कि हम अल्लाह के करीम होने पर भरोसा रखें और उसकी नाराज़गी से बचने की कोशिश करें। यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह का दरवाज़ा हमेशा खुला है—जो भी ईमान लाए और अच्छे कर्म करे, उसके लिए अल्लाह का अनुग्रह और इनाम तैयार है। आइए, हम अपने जीवन को अल्लाह की पसंद के अनुसार बनाएं और उसकी रहमत के हक़दार बनें।

🎧 सुनें

📜 आयत 43-47 — अर-रूम

43فَأَقِمْ وَجْهَكَ لِلدِّينِ الْقَيِّمِ مِن قَبْلِ أَن يَأْتِيَ يَوْمٌ لَّا مَرَدَّ لَهُ مِنَ اللَّهِ ۖ يَوْمَئِذٍ يَصَّدَّعُونَ
तो (ऐ रसूल) तुम उस दिन के आने से पहले जो खुदा की तरफ से आकर रहेगा (और) कोई उसे रोक नहीं सकता अपना रुख़ मज़बूत (और सीधे दीन की तरफ किए रहो उस दिन लोग (परेशान होकर) अलग अलग हो जाएँगें
44مَن كَفَرَ فَعَلَيْهِ كُفْرُهُ ۖ وَمَنْ عَمِلَ صَالِحًا فَلِأَنفُسِهِمْ يَمْهَدُونَ
जो काफ़िर बन बैठा उस पर उस के कुफ्र का वबाल है और जिन्होने अच्छे काम किए वह अपने ही आसाइश का सामान कर रहें है
45لِيَجْزِيَ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ مِن فَضْلِهِ ۚ إِنَّهُ لَا يُحِبُّ الْكَافِرِينَ
ताकि जो लोग ईमान लाए और अच्छे अच्छे काम किए उनको ख़ुदा अपने फज़ल व (करम) से अच्छी जज़ा अता करेगा वह यक़ीनन कुफ्फ़ार से उलफ़त नहीं रखता
46وَمِنْ آيَاتِهِ أَن يُرْسِلَ الرِّيَاحَ مُبَشِّرَاتٍ وَلِيُذِيقَكُم مِّن رَّحْمَتِهِ وَلِتَجْرِيَ الْفُلْكُ بِأَمْرِهِ وَلِتَبْتَغُوا مِن فَضْلِهِ وَلَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
उसी की (क़ुदरत) की निशानियों में से एक ये भी है कि वह हवाओं को (बारिश) की ख़ुशख़बरी के वास्ते (क़ब्ल से) भेज दिया करता है और ताकि तुम्हें अपनी रहमत की लज्ज़त चखाए और इसलिए भी कि (इसकी बदौलत) कश्तियां उसके हुक्म से चल खड़ी हो और ताकि तुम उसके फज़ल व करम से (अपनी रोज़ी) की तलाश करो और इसलिए भी ताकि तुम शुक्र करो
47وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ رُسُلًا إِلَىٰ قَوْمِهِمْ فَجَاءُوهُم بِالْبَيِّنَاتِ فَانتَقَمْنَا مِنَ الَّذِينَ أَجْرَمُوا ۖ وَكَانَ حَقًّا عَلَيْنَا نَصْرُ الْمُؤْمِنِينَ
औ (ऐ रसूल) हमने तुमसे पहले और भी बहुत से पैग़म्बर उनकी क़ौमों के पास भेजे तो वह पैग़म्बर वाज़ेए व रौशन लेकर आए (मगर उन लोगों ने न माना) तो उन मुजरिमों से हमने (खूब) बदला लिया और हम पर तो मोमिनीन की मदद करना लाज़िम था ही
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अनुवाद — अर-रूम 45

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सूरा आयत 45/60 — अर-रूम الروم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अर-रूम सुनें, अर-रूम अनुवाद, अर-रूम mp3, अर-रूम pdf. आयत 43–47. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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