Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لِيَجْزِيَ: ताकि वह बदला दे
- مِن فَضْلِهِ: अपने अनुग्रह और उपकार से
- لَا يُحِبُّ الْكَافِرِينَ: काफिरों से प्रेम नहीं करता (अर्थात उन पर क्रोधित है)
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत उस महान न्याय और अनुग्रह का वर्णन करती है जो अल्लाह तआला अपने ईमानवाले और नेक कर्म करने वाले बंदों के साथ करेगा। अल्लाह तआला ने यह घोषणा की है कि जो लोग अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाए और अपने जीवन को अच्छे कर्मों से सजाया—नमाज़ क़ायम की, ज़कात दी, सच बोला, अमानत को निभाया, लोगों के साथ भलाई की—तो अल्लाह उन्हें अपने विशाल अनुग्रह और दया से पुरस्कृत करेगा। यह पुरस्कार उनके कर्मों की कमाई नहीं, बल्कि अल्लाह का शुद्ध अनुग्रह है, क्योंकि अल्लाह के करीम होने का यही तरीक़ा है कि वह थोड़े अमल पर बहुत बड़ा इनाम देता है।
यह आयत मोमिनों के लिए खुशखबरी है कि उनकी मेहनत और अच्छे कर्म राईगां नहीं जाएंगे। अल्लाह तआला हर अच्छे काम को देखता है और उसका पूरा-पूरा बदला देगा। यह अल्लाह का वादा है, और अल्लाह का वादा कभी टूटता नहीं। इसलिए मोमिन को चाहिए कि वह अच्छे कर्मों पर डटा रहे, चाहे दुनिया में उसे कितनी भी मुश्किलें क्यों न आएं, क्योंकि असली कामयाबी आख़िरत में है।
दूसरी ओर, अल्लाह तआला स्पष्ट करता है कि वह काफिरों से प्रेम नहीं करता। काफिर वे लोग हैं जिन्होंने अल्लाह की नेमतों को झुठलाया, उसके रसूलों को नकारा और उसकी इबादत से मुंह मोड़ा। अल्लाह का उनसे प्रेम न करना उनके लिए सबसे बड़ी सज़ा है, क्योंकि जिस बंदे से अल्लाह नाराज़ हो जाए, उसके लिए दुनिया और आख़िरत दोनों में कोई भलाई नहीं। यह अल्लाह का न्यायपूर्ण फैसला है, क्योंकि जो अल्लाह की रहमत और हिदायत को ठुकरा दे, उसके लिए अल्लाह की नाराज़गी ही उचित है।
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हम अपने जीवन को ईमान और अच्छे कर्मों पर स्थापित करें। अल्लाह की रहमत और उसका अनुग्रह उन्हीं के लिए है जो उसकी ओर रुजू करते हैं। हमें चाहिए कि हम अल्लाह के करीम होने पर भरोसा रखें और उसकी नाराज़गी से बचने की कोशिश करें। यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह का दरवाज़ा हमेशा खुला है—जो भी ईमान लाए और अच्छे कर्म करे, उसके लिए अल्लाह का अनुग्रह और इनाम तैयार है। आइए, हम अपने जीवन को अल्लाह की पसंद के अनुसार बनाएं और उसकी रहमत के हक़दार बनें।
📜 आयत 43-47 — सूरा अर-रूम
अनुवाद — अर-रूम 45
सूरा अर-रूम आयत 45 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ताकि जो लोग ईमान लाए और अच्छे अच्छे काम किए…सूरा आयत 45/60 — सूरा अर-रूम الروم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अर-रूम सुनें, सूरा अर-रूम अनुवाद, सूरा अर-रूम mp3, सूरा अर-रूम pdf. आयत 43–47. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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