अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- الْمَوْتَىٰ – मुर्दे (वे लोग जिनके दिल मरे हुए हैं)
- الصُّمّ – बहरे (वे लोग जो सत्य की आवाज़ सुनकर भी अनसुना कर देते हैं)
- الدُّعَاءَ – पुकार (इस्लाम की दावत और सत्य का संदेश)
- وَلَّوْا مُدْبِرِينَ – पीठ फेरकर चले जाना (पूर्ण रूप से विमुख हो जाना)
तफसीर:
ऐ नबी! आपका दिल इस बात पर परेशान न हो कि मक्का के कुफ्फार आपकी बात क्यों नहीं मान रहे। यह आपकी दावत की कमज़ोरी नहीं, बल्कि उनके दिलों की मौत है। जिस तरह आप मुर्दों को नहीं सुना सकते, और न ही बहरों को अपनी आवाज़ सुना सकते हैं—ख़ासकर जब वे पीठ फेरकर चले जाएं—ठीक उसी तरह जिन लोगों ने अपने दिलों पर मुहर लगा ली है और सत्य से मुँह मोड़ लिया है, उन्हें आप अपनी बात नहीं सुना सकते।
यहाँ अल्लाह तआला ने कुफ्फार को दो चीज़ों से समानता दी है: मुर्दों से और बहरों से। मुर्दा इसलिए कि उसमें महसूस करने की ताकत ही नहीं रही, और बहरा इसलिए कि उसके कान सुनकर भी फायदा नहीं उठाते। जब ये दोनों गुण मिल जाएं—यानी दिल मरा हुआ और कान बहरे—तो फिर ऐसे इंसान को हिदायत देना नामुमकिन है। और जब वे पीठ फेरकर चले जाएं, तो यह और भी मुश्किल हो जाता है, क्योंकि सामने वाला तो शायद इशारे से भी समझ जाए, लेकिन पीठ फेरने वाला तो किसी भी तरह से नहीं समझ सकता।
दावती पहलू:
इस आयत से हमें एक बहुत बड़ा सबक मिलता है—दावत के काम में निराशा कभी नहीं करनी चाहिए। अल्लाह के नबी को भी जब मक्का के सरदारों ने ठुकराया, तो अल्लाह ने उन्हें तसल्ली दी कि यह आपकी कमी नहीं, बल्कि उनके दिलों का हाल है। आपका काम सिर्फ पहुँचाना है, हिदायत देना अल्लाह के हाथ में है।
और यह भी याद रखें—जो लोग आज सुनने से इनकार कर रहे हैं, उनके दिल कल नरम हो सकते हैं। कितने लोग थे जो पहले सत्य से भागते थे, फिर अल्लाह की रहमत से उनके दिल खुल गए और वे इस्लाम के सबसे बड़े सिपाही बन गए। इसलिए दावत देते रहें, मेहनत करते रहें, और अल्लाह पर भरोसा रखें। हिदायत अल्लाह के हाथ में है, और वह जिसे चाहता है, अपने फज़ल से हिदायत देता है। आपका अज्र अल्लाह के पास सुरक्षित है।
📜 आयत 50-54 — अर-रूम
अनुवाद — अर-रूम 52
सूरा अर-रूम आयत 52 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम तो (अपनी) आवाज़ न मुर्दो ही को…सूरा आयत 52/60 — अर-रूम الروم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अर-रूम सुनें, अर-रूम अनुवाद, अर-रूम mp3, अर-रूम pdf. आयत 50–54. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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