Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الْعُمْيِ (अंधों): यहाँ से तात्पर्य उन लोगों से है जो हृदय के अंधे हैं, अर्थात सत्य को देखने और समझने की क्षमता से वंचित हैं।
- ضَلَالَتِهِمْ (उनकी गुमराही): उनका पथभ्रष्ट होना, सत्य मार्ग से भटक जाना।
- تُسْمِعُ (तुम सुनाते हो): सुनाना जिससे लाभ उठाया जा सके, केवल आवाज़ पहुँचाना नहीं।
विस्तृत व्याख्या:
ऐ न रसूल! आप उन लोगों को हिदायत नहीं दे सकते जिनके दिल अंधे हो गए हैं और जो अपनी गुमराही पर अड़े हुए हैं। जिस प्रकार आँखों से अंधा व्यक्ति रास्ता नहीं देख सकता, उसी प्रकार जिसका दिल अंधा हो गया है, वह सत्य को नहीं पहचान सकता। आपका काम केवल संदेश पहुँचाना है, लेकिन हृदय के अंधों को आप सीधा रास्ता नहीं दिखा सकते।
आपकी आवाज़ केवल उन्हीं लोगों तक प्रभावी होती है जो हमारी आयतों पर ईमान रखते हैं। ये वे लोग हैं जिनके दिल खुले हैं, जो सत्य को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। जब वे हमारी निशानियाँ सुनते हैं तो उनके दिल नरम हो जाते हैं और वे अल्लाह के आगे सिर झुका देते हैं। ये लोग पूरी तरह अल्लाह के आज्ञाकारी बन जाते हैं, अपने आपको उसके हवाले कर देते हैं।
याद रखें, हिदायत देना केवल अल्लाह के हाथ में है। आपका कर्तव्य केवल संदेश पहुँचाना है। जो लोग ईमान लाते हैं, वे ही आपकी बात से लाभ उठाते हैं और सीधे मार्ग पर चल पड़ते हैं। यह अल्लाह की कृपा है कि वह जिसे चाहता है समझने की तौफ़ीक़ देता है।
शिक्षाप्रद पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपना ध्यान उन लोगों पर केंद्रित करना चाहिए जो सत्य को सुनने और समझने के लिए तैयार हैं। हमें निराश नहीं होना चाहिए अगर कुछ लोग हमारी बात नहीं मानते। हमारा काम केवल अच्छी तरह से संदेश पहुँचाना है, और परिणाम अल्लाह के हाथ में है। साथ ही, यह हमें यह भी बताती है कि ईमान लाने वाले लोग ही असली कामयाब हैं, क्योंकि वे अल्लाह के आगे पूर्ण समर्पण करते हैं और उसकी राह पर चलते हैं। यही वे लोग हैं जो दुनिया और आख़िरत दोनों में सफल होंगे।
📜 आयत 51-55 — सूरा अर-रूम
अनुवाद — अर-रूम 53
सूरा अर-रूम आयत 53 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और न तुम अंधों को उनकी गुमराही से (फेरकर) राह…सूरा आयत 53/60 — सूरा अर-रूम الروم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अर-रूम सुनें, सूरा अर-रूम अनुवाद, सूरा अर-रूम mp3, सूरा अर-रूम pdf. आयत 51–55. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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