अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- خَلْقُ اللهِ: अल्लाह की बनाई हुई चीज़ें, यानी यह सारा संसार और जो कुछ इसमें है।
- فَأَرُونِي: मुझे दिखाओ, मेरे सामने पेश करो।
- مَاذَا خَلَقَ الَّذِينَ مِن دُونِهِ: उन्होंने (जिन्हें तुम अल्लाह के सिवा पूजते हो) क्या पैदा किया है?
- بَلِ الظَّالِمُونَ: बल्कि ये ज़ालिम (मुशरिक) लोग।
- فِي ضَلَالٍ مُبِينٍ: स्पष्ट और खुले गुमराही में हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह जो कुछ भी तुम अपनी आँखों से देख रहे हो—यह आसमान, यह ज़मीन, ये पहाड़, ये दरिया, ये पेड़-पौधे, ये जानवर, और खुद तुम्हारा अपना वजूद—यह सब कुछ अल्लाह तआला की पैदा की हुई चीज़ें हैं। यह सारी कायनात उसी की रचना है, उसी की देन है, और उसी की ताक़त का नमूना है।
अब अल्लाह तआला इन मुशरिकों से फ़रमाता है: "अगर तुम्हारा यह दावा है कि तुम्हारे ये माबूद (जिन्हें तुम अल्लाह के सिवा पूजते हो) भी कुछ कर सकते हैं, तो मुझे दिखाओ कि उन्होंने आख़िर क्या पैदा किया है? उन्होंने ज़मीन का कोई टुकड़ा बनाया है? आसमान का कोई हिस्सा खड़ा किया है? कोई पहाड़ उठाया है? कोई दरिया बहाया है? कोई जानवर पैदा किया है? या कोई पेड़ उगाया है?"
यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब कोई नहीं दे सकता, क्योंकि ये सारे माबूद—चाहे वे बुत हों, पत्थर हों, या कोई और चीज़ें—खुद मख़लूक़ हैं, खुद पैदा किए गए हैं। वे न किसी को जीवन दे सकते हैं, न मौत, न रिज़्क़, न कोई फ़ायदा, न नुक़सान। फिर ऐसे बेबस और बेजान माबूदों को अल्लाह का शरीक कैसे बनाया जा सकता है?
अल्लाह तआला फ़रमाता है: "बल्कि ये ज़ालिम लोग खुली गुमराही में हैं।" यानी यह बात साफ़ है कि ये लोग सच्चाई से भटक चुके हैं, और उनका यह भटकाव कोई मामूली भटकाव नहीं, बल्कि बिल्कुल साफ़ और ज़ाहिर है। जिस तरह दिन की रोशनी में कोई रास्ता भटक जाए, उसी तरह ये लोग सच्चाई के रास्ते से इतनी दूर जा पड़े हैं कि उन्हें खुद अपनी गलती का एहसास भी नहीं है।
दावत और नसीहत का पहलू:
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपनी ज़िंदगी में किसे अपना मददगार और सहारा मानते हैं। क्या हम उस अल्लाह पर भरोसा करते हैं जिसने यह सारी कायनात बनाई है, या फिर हम उन चीज़ों पर भरोसा करते हैं जो खुद किसी काम की नहीं?
जिस अल्लाह ने यह सूरज, चाँद, सितारे, ज़मीन, आसमान, और हमारी अपनी ज़िंदगी बनाई है—क्या वह हमारी मदद नहीं कर सकता? क्या वह हमारी दुआएँ नहीं सुन सकता? क्या वह हमारी मुश्किलें नहीं हटा सकता? बेशक वह सब कुछ कर सकता है, क्योंकि वही सब कुछ पैदा करने वाला है।
तो आओ, हम अपनी ज़िंदगी को इस तरह बनाएँ कि हम सिर्फ़ अल्लाह की इबादत करें, सिर्फ़ उसी से मदद माँगें, और उसी के बताए हुए रास्ते पर चलें। यही सच्ची कामयाबी है, और यही वह रास्ता है जो हमें जन्नत तक पहुँचाएगा। अल्लाह तआला हम सबको सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 9-13 — लुकमान
अनुवाद — लुकमान 11
सूरा लुकमान आयत 11 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल उनसे कह दो कि) ये तो खुदा की…सूरा आयत 11/34 — लुकमान لقمان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: लुकमान सुनें, लुकमान अनुवाद, लुकमान mp3, लुकमान pdf. आयत 9–13. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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