लुकमान · 10/34
अनुवाद उच्चारण — लुकमान
خَلَقَ السَّمَاوَاتِ بِغَيْرِ عَمَدٍ تَرَوْنَهَا ۖ وَأَلْقَىٰ فِي الْأَرْضِ رَوَاسِيَ أَن تَمِيدَ بِكُمْ وَبَثَّ فِيهَا مِن كُلِّ دَابَّةٍ ۚ وَأَنزَلْنَا مِنَ السَّمَاءِ مَاءً فَأَنبَتْنَا فِيهَا مِن كُلِّ زَوْجٍ كَرِيمٍ ۝١٠
Khalaqas samaawaati bi ghairi `amadin tarawnahaa wa alqaa fil ardi rawaasiya an tameeda bikum wa bassa feehaa min kulli daaabbah; wa anzalnaa minas samaaa`i maaa`an fa ambatnaa feeha min kulli zawjin kareem
📖 हिंदी अर्थ
तुम उन्हें देख रहे हो कि उसी ने बग़ैर सुतून के आसमानों को बना डाला और उसी ने ज़मीन पर (भारी भारी) पहाड़ों के लंगर डाल दिए कि (मुबादा) तुम्हें लेकर किसी तरफ जुम्बिश करे और उसी ने हर तरह चल फिर करने वाले (जानवर) ज़मीन में फैलाए और हमने आसमान से पानी बरसाया और (उसके ज़रिए से) ज़मीन में हर रंग के नफ़ीस जोड़े पैदा किए

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • بِغَيْرِ عَمَدٍ – बिना खंभों के
  • رَوَاسِيَ – पहाड़ (जो धरती को जमाए रखते हैं)
  • تَمِيدَ – डगमगाए, हिले-डुले
  • بَثَّ – फैलाया, फैला दिया
  • زَوْجٍ كَرِيمٍ – उत्तम और लाभदायक प्रकार/किस्म

तफसीर:

अल्लाह तआला अपनी कुदरत के वो नज़ारे दिखा रहा है जो हर इंसान की आँखों के सामने हैं, फिर भी इंसान ग़ौर नहीं करता। उसने आसमानों को बिना किसी खंभे के पैदा किया, जैसा कि तुम उन्हें देख रहे हो—न ऊपर से कोई रस्सी, न नीचे से कोई सतून। वे इस तरह क़ायम हैं जैसे एक गुंबद, और यह अल्लाह की क़ुदरत का करिश्मा है कि वे बिना किसी सहारे के टिके हुए हैं। अगर वह चाहता तो उन्हें गिरा देता, लेकिन उसकी मर्ज़ी से वे इसी तरह स्थिर हैं।

फिर अल्लाह ने ज़मीन में पहाड़ों को गाड़ दिया, ताकि ज़मीन तुम्हें लेकर डगमगाए नहीं और तुम्हारी ज़िंदगी में खलल न पड़े। ये पहाड़ ज़मीन के लिए मेखों (खूँटों) की तरह हैं, जो उसे जमाए रखते हैं। यह अल्लाह की रहमत है कि उसने ज़मीन को स्थिर बनाया ताकि तुम आराम से चलो-फिरो, खेती करो और अपनी ज़रूरतें पूरी करो।

इसके बाद अल्लाह ने ज़मीन पर हर तरह के जानवर फैला दिए—चलने वाले, रेंगने वाले, उड़ने वाले, तैरने वाले—हर किस्म के जीव-जंतु। यह सब उसकी रहमत और हिकमत का नमूना है।

और फिर अल्लाह ने आसमान से पानी बरसाया, और उस पानी के ज़रिए ज़मीन से हर तरह के खूबसूरत और लाभदायक पौधे, फल और अनाज उगाए। "ज़ौज करीम" यानी हर वो किस्म जो देखने में अच्छी हो, फायदे में भरपूर हो, और इंसानों और जानवरों के लिए रिज़्क़ बने।

यह आयत हमें अल्लाह की कुदरत पर ग़ौर करने की दावत देती है। जो इंसान इन नज़ारों पर ग़ौर करे, वह समझ सकता है कि यह सब किसी बड़े कारीगर की बनाई हुई चीज़ है। यही अल्लाह की पहचान का रास्ता है। जब दिल अल्लाह की इन नेमतों को देखकर उसकी तरफ़ झुकता है, तो इंसान शुक्रगुज़ार बनता है और अपने रब की इबादत में मग्न हो जाता है। यही सच्ची कामयाबी है—कि इंसान अपने ख़ालिक़ को पहचाने, उसकी नेमतों का शुक्र अदा करे, और उसी की बताई हुई राह पर चले।



📜 आयत 8-12 — लुकमान

8إِنَّ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَهُمْ جَنَّاتُ النَّعِيمِ
बेशक जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे काम किए उनके लिए नेअमत के (हरे भरे बेहश्ती) बाग़ हैं कि यो उनमें हमेशा रहेंगे
9خَالِدِينَ فِيهَا ۖ وَعْدَ اللَّهِ حَقًّا ۚ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
ये ख़ुदा का पक्का वायदा है और वह तो (सब पर) ग़ालिब हिकमत वाला है
10خَلَقَ السَّمَاوَاتِ بِغَيْرِ عَمَدٍ تَرَوْنَهَا ۖ وَأَلْقَىٰ فِي الْأَرْضِ رَوَاسِيَ أَن تَمِيدَ بِكُمْ وَبَثَّ فِيهَا مِن كُلِّ دَابَّةٍ ۚ وَأَنزَلْنَا مِنَ السَّمَاءِ مَاءً فَأَنبَتْنَا فِيهَا مِن كُلِّ زَوْجٍ كَرِيمٍ
तुम उन्हें देख रहे हो कि उसी ने बग़ैर सुतून के आसमानों को बना डाला और उसी ने ज़मीन पर (भारी भारी) पहाड़ों के लंगर डाल दिए कि (मुबादा) तुम्हें लेकर किसी तरफ जुम्बिश करे और उसी ने हर तरह चल फिर करने वाले (जानवर) ज़मीन में फैलाए और हमने आसमान से पानी बरसाया और (उसके ज़रिए से) ज़मीन में हर रंग के नफ़ीस जोड़े पैदा किए
11هَٰذَا خَلْقُ اللَّهِ فَأَرُونِي مَاذَا خَلَقَ الَّذِينَ مِن دُونِهِ ۚ بَلِ الظَّالِمُونَ فِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ
(ऐ रसूल उनसे कह दो कि) ये तो खुदा की ख़िलक़त है कि (भला) तुम लोग मुझे दिखाओं तो कि जो (जो माबूद) ख़ुदा के सिवा तुमने बना रखे है उन्होंने क्या पैदा किया बल्कि सरकश लोग (कुफ्फ़ार) सरीही गुमराही में (पडे) हैं
12وَلَقَدْ آتَيْنَا لُقْمَانَ الْحِكْمَةَ أَنِ اشْكُرْ لِلَّهِ ۚ وَمَن يَشْكُرْ فَإِنَّمَا يَشْكُرُ لِنَفْسِهِ ۖ وَمَن كَفَرَ فَإِنَّ اللَّهَ غَنِيٌّ حَمِيدٌ
और यक़ीनन हम ने लुक़मान को हिकमत अता की (और हुक्म दिया था कि) तुम ख़ुदा का शुक्र करो और जो ख़ुदा का शुक्र करेगा-वह अपने ही फायदे के लिए शुक्र करता है और जिसने नाशुक्री की तो (अपना बिगाड़ा) क्योंकी ख़ुदा तो (बहरहाल) बे परवाह (और) क़ाबिल हमदो सना है
लुकमानकुरान सूची
34आयत
मक्कीRevelation
10आयत

अनुवाद — लुकमान 10

सूरा लुकमान आयत 10 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तुम उन्हें देख रहे हो कि उसी ने बग़ैर सुतून…

सूरा आयत 10/34 — लुकमान لقمان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: लुकमान सुनें, लुकमान अनुवाद, लुकमान mp3, लुकमान pdf. आयत 8–12. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए