लुकमान · 16/34
अनुवाद उच्चारण — लुकमान
يَا بُنَيَّ إِنَّهَا إِن تَكُ مِثْقَالَ حَبَّةٍ مِّنْ خَرْدَلٍ فَتَكُن فِي صَخْرَةٍ أَوْ فِي السَّمَاوَاتِ أَوْ فِي الْأَرْضِ يَأْتِ بِهَا اللَّهُ ۚ إِنَّ اللَّهَ لَطِيفٌ خَبِيرٌ ۝١٦
Ya bunaiya innahaaa in taku misqaala habbatim min khardalin fatakun fee sakhratin aw fis samaawaati aw fil ardi yaati bihal laa; innal laaha lateefun Khabeer
📖 हिंदी अर्थ
(उस वक्त उसका अन्जाम) बता दूँगा ऐ बेटा इसमें शक नहीं कि वह अमल (अच्छा हो या बुरा) अगर राई के बराबर भी हो और फिर वह किसी सख्त पत्थर के अन्दर या आसमान में या ज़मीन मे (छुपा हुआ) हो तो भी ख़ुदा उसे (क़यामत के दिन) हाज़िर कर देगा बेशक ख़ुदा बड़ा बारीकबीन वाक़िफकार है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مِثْقَالَ حَبَّةٍ مِنْ خَرْدَلٍ: राई के दाने के बराबर वज़न (अत्यंत छोटा और हल्का)
  • فِي صَخْرَةٍ: किसी चट्टान के भीतर (गहरे छिपा हुआ)
  • لَطِيفٌ: बारीक चीज़ों को जानने वाला, सूक्ष्म दृष्टि वाला
  • خَبِيرٌ: हर चीज़ की पूरी खबर रखने वाला

तफ़सीर (व्याख्या):

हज़रत लुक़मान अलैहिस्सलाम अपने बेटे को नसीहत करते हुए फ़रमा रहे हैं: "ऐ मेरे बेटे! याद रख, अगर कोई नेकी या गुनाह राई के दाने के बराबर भी हो — जो कि सबसे छोटी और हल्की चीज़ों में से है — और वह किसी ऐसी जगह छिपा हो जहाँ किसी इंसान की नज़र न पहुँच सके, जैसे किसी बड़ी चट्टान के पेट में, या आसमानों की बुलंदियों में, या ज़मीन की गहराइयों में, तो अल्लाह उसे ज़रूर लाएगा और उसका हिसाब लेगा।"

यानी अल्लाह तआला के इल्म से कोई चीज़ छिपी नहीं है। वह हर छोटे-बड़े अमल को जानता है, चाहे वह कितना ही छिपा हुआ क्यों न हो। क़यामत के दिन वह हर नेकी और हर गुनाह को सामने लाएगा और उसका पूरा-पूरा बदला देगा। अल्लाह लतीफ़ है — यानी वह इतना सूक्ष्म और बारीकबीन है कि उसकी नज़र से ज़मीन के अंदर दबा हुआ राई का दाना भी नहीं छिप सकता। और वह ख़बीर है — यानी उसे हर चीज़ की पूरी खबर है, उसके ठिकाने और उसकी हक़ीक़त से वह पूरी तरह वाक़िफ़ है।

यह बात हमारे दिलों में अल्लाह का खौफ़ और उसकी मुहब्बत दोनों पैदा करती है। जब हमें यक़ीन हो जाए कि अल्लाह हमारी हर छोटी-बड़ी नेकी देख रहा है, तो हम नेकी पर और भी जमा रहेंगे। और जब हमें मालूम हो कि हमारा कोई गुनाह उससे छिपा नहीं है, तो हम गुनाह से बचने की और भी कोशिश करेंगे। यही वह चीज़ है जो एक मोमिन को अंदर से सुधारती है और उसे अल्लाह की राह पर चलाती है।

याद रखिए, अल्लाह का इन्साफ़ बिल्कुल सटीक है और उसकी रहमत असीम है। वह नेकी का अज्र कई गुना बढ़ाकर देता है और गुनाह का हिसाब सिर्फ़ उतना ही लेता है जितना वह है। यही अल्लाह की महानता है कि वह सब कुछ जानता है, सब कुछ देखता है, और उसकी पकड़ से कोई बच नहीं सकता। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी के हर पल को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ बनाएँ, क्योंकि हमारा हर अमल उसके सामने हाज़िर होने वाला है।

🎧 सुनें

📜 आयत 14-18 — लुकमान

14وَوَصَّيْنَا الْإِنسَانَ بِوَالِدَيْهِ حَمَلَتْهُ أُمُّهُ وَهْنًا عَلَىٰ وَهْنٍ وَفِصَالُهُ فِي عَامَيْنِ أَنِ اشْكُرْ لِي وَلِوَالِدَيْكَ إِلَيَّ الْمَصِيرُ
(जिस की बख़्शिस नहीं) और हमने इन्सान को जिसे उसकी माँ ने दुख पर दुख सह के पेट में रखा (इसके अलावा) दो बरस में (जाके) उसकी दूध बढ़ाई की (अपने और) उसके माँ बाप के बारे में ताक़ीद की कि मेरा भी शुक्रिया अदा करो और अपने वालदैन का (भी) और आख़िर सबको मेरी तरफ लौट कर जाना है
15وَإِن جَاهَدَاكَ عَلَىٰ أَن تُشْرِكَ بِي مَا لَيْسَ لَكَ بِهِ عِلْمٌ فَلَا تُطِعْهُمَا ۖ وَصَاحِبْهُمَا فِي الدُّنْيَا مَعْرُوفًا ۖ وَاتَّبِعْ سَبِيلَ مَنْ أَنَابَ إِلَيَّ ۚ ثُمَّ إِلَيَّ مَرْجِعُكُمْ فَأُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
और अगर तेरे माँ बाप तुझे इस बात पर मजबूर करें कि तू मेरा शरीक ऐसी चीज़ को क़रार दे जिसका तुझे इल्म भी नहीं तो तू (इसमें) उनकी इताअत न करो (मगर तकलीफ़ न पहुँचाना) और दुनिया (के कामों) में उनका अच्छी तरह साथ दे और उन लोगों के तरीक़े पर चल जो (हर बात में) मेरी (ही) तरफ रुजू करे फिर (तो आख़िर) तुम सबकी रुजू मेरी ही तरफ है तब (दुनिया में) जो कुछ तुम करते थे
16يَا بُنَيَّ إِنَّهَا إِن تَكُ مِثْقَالَ حَبَّةٍ مِّنْ خَرْدَلٍ فَتَكُن فِي صَخْرَةٍ أَوْ فِي السَّمَاوَاتِ أَوْ فِي الْأَرْضِ يَأْتِ بِهَا اللَّهُ ۚ إِنَّ اللَّهَ لَطِيفٌ خَبِيرٌ
(उस वक्त उसका अन्जाम) बता दूँगा ऐ बेटा इसमें शक नहीं कि वह अमल (अच्छा हो या बुरा) अगर राई के बराबर भी हो और फिर वह किसी सख्त पत्थर के अन्दर या आसमान में या ज़मीन मे (छुपा हुआ) हो तो भी ख़ुदा उसे (क़यामत के दिन) हाज़िर कर देगा बेशक ख़ुदा बड़ा बारीकबीन वाक़िफकार है
17يَا بُنَيَّ أَقِمِ الصَّلَاةَ وَأْمُرْ بِالْمَعْرُوفِ وَانْهَ عَنِ الْمُنكَرِ وَاصْبِرْ عَلَىٰ مَا أَصَابَكَ ۖ إِنَّ ذَٰلِكَ مِنْ عَزْمِ الْأُمُورِ
ऐ बेटा नमाज़ पाबन्दी से पढ़ा कर और (लोगों से) अच्छा काम करने को कहो और बुरे काम से रोको और जो मुसीबत तुम पर पडे उस पर सब्र करो (क्योंकि) बेशक ये बड़ी हिम्मत का काम है
18وَلَا تُصَعِّرْ خَدَّكَ لِلنَّاسِ وَلَا تَمْشِ فِي الْأَرْضِ مَرَحًا ۖ إِنَّ اللَّهَ لَا يُحِبُّ كُلَّ مُخْتَالٍ فَخُورٍ
और लोगों के सामने (गुरुर से) अपना मुँह न फुलाना और ज़मीन पर अकड़कर न चलना क्योंकि ख़ुदा किसी अकड़ने वाले और इतराने वाले को दोस्त नहीं रखता और अपनी चाल ढाल में मियाना रवी एख्तेयार करो
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अनुवाद — लुकमान 16

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Tuesday, August 18, 2026

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