अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- जाहदाक (जिहाद करना): अर्थात माता-पिता का अपने बेटे को शिर्क करने के लिए पूरी कोशिश और प्रयास करना।
- अनाब (रुजू करना): अर्थात अल्लाह की ओर पलटना, उसकी इबादत और आज्ञाकारिता की ओर लौटना।
- मारूफ़ (भलाई): अर्थात अच्छा व्यवहार, नेकी और वह काम जो शरई तौर पर अच्छा हो।
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत एक बहुत ही महत्वपूर्ण नियम बताती है। अल्लाह तआला फरमाता है कि ऐ ईमानवाले बेटे! अगर तेरे माता-पिता तुझ पर ज़ोर डालें और पूरी कोशिश करें कि तू मेरे साथ किसी और को शरीक करे — ऐसा काम जिसका तुझे कोई ज्ञान नहीं, क्योंकि शिर्क एक ऐसा झूठ है जिसकी कोई सच्चाई नहीं — तो उनकी इस बात को कभी मत मानना। क्योंकि मखलूक़ (प्राणी) की आज्ञा उस काम में नहीं मानी जा सकती जो ख़ालिक़ (सृष्टिकर्ता) की नाफ़रमानी हो।
लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं कि तू उनसे रिश्ता तोड़ ले या उनके साथ बुरा सलूक करे। नहीं! अल्लाह तआला फरमाता है कि दुनिया में उनके साथ भलाई का साथ निभा — यानी उनकी सेवा कर, उनके साथ नर्मी और मुहब्बत से पेश आ, उनकी ज़रूरतों का ख्याल रख, लेकिन दीन के मामले में उनकी बात न मान जहाँ वे अल्लाह की नाफ़रमानी पर उभारें।
फिर अल्लाह तआला नसीहत करता है कि तू उस रास्ते पर चल जो उन लोगों का है जो मेरी तरफ रुजू करते हैं — यानी तौहीद और इबादत की राह, जो पैगंबर मुहम्मद ﷺ और उनके साथियों का रास्ता है। यही सच्ची कामयाबी का रास्ता है।
आखिर में अल्लाह तआला याद दिलाता है कि तुम सबको एक दिन मेरी तरफ लौटना है। फिर मैं तुम्हें बताऊँगा कि तुम दुनिया में क्या-क्या करते रहे — अच्छा या बुरा — और हर एक को उसके कर्मों का पूरा बदला दूँगा। यह याद दिलाना इसलिए है कि इंसान अपने अमल में सुधार करे और अल्लाह की नाराज़गी से बचे।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम में माता-पिता का सम्मान और उनकी सेवा कितनी बड़ी फज़ीलत है — यहाँ तक कि अल्लाह ने उनके साथ भलाई का हुक्म दिया, भले ही वे गैर-मुस्लिम हों। लेकिन साथ ही यह भी सिखाया कि अल्लाह की इबादत और तौहीद किसी भी रिश्ते से बढ़कर है। यही इस्लाम का खूबसूरत ताल्लुक है — मुहब्बत भी और हक़ भी। जो इंसान अल्लाह की राह पर चलता है और अपने माता-पिता के साथ भलाई करता है, अल्लाह उसे दुनिया और आख़िरत दोनों में इज़्ज़त देता है। याद रखिए, अल्लाह की राह ही वह रास्ता है जो हमें सच्ची कामयाबी तक पहुँचाता है।
📜 आयत 13-17 — लुकमान
अनुवाद — लुकमान 15
सूरा लुकमान आयत 15 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अगर तेरे माँ बाप तुझे इस बात पर मजबूर…सूरा आयत 15/34 — लुकमान لقمان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: लुकमान सुनें, लुकमान अनुवाद, लुकमान mp3, लुकमान pdf. आयत 13–17. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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