अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَقِمِ الصَّلَاةَ: नमाज़ को उसके सही तरीके, रुक्न (अर्कान) और शर्तों के साथ पूरा-पूरा अदा करो।
- بِالْمَعْرُوفِ: हर अच्छे काम और नेक बात का आदेश देना।
- عَنِ الْمُنكَرِ: हर बुरे काम और गलत बात से रोकना।
- وَاصْبِرْ: धैर्य और सब्र रखना।
- عَزْمِ الْأُمُورِ: उन कामों में से जिन्हें अल्लाह ने बड़ी मज़बूती और पक्के इरादे के साथ अनिवार्य किया है।
तफ़सीर (व्याख्या):
हज़रत लुकमान (अलैहिस्सलाम) अपने बेटे को नसीहत करते हुए कहते हैं: “ऐ मेरे प्यारे बेटे!” यह पुकार दिल के करीब लाने वाली और मुहब्बत भरी है, ताकि नसीहत दिल में उतर जाए। वे उसे सबसे पहले नमाज़ की ताकीद करते हैं — नमाज़ को उसके पूरे अर्कान, शर्तों और वाजिबात के साथ अदा करो, क्योंकि नमाज़ ही वह रीढ़ है जो इंसान को अल्लाह से जोड़ती है और बुराईयों से रोकती है।
फिर वे उसे अच्छे कामों का आदेश देने और बुरे कामों से रोकने की शिक्षा देते हैं — यानी दूसरों को भलाई की तरफ बुलाओ और बुराई से बचाओ, लेकिन इस काम में नरमी, हिकमत और अच्छे अंदाज़ को अपनाओ। साथ ही वे उसे सब्र की नसीहत देते हैं: “और जो मुसीबत या तकलीफ तुझे इस राह में पहुँचे — चाहे लोगों की तरफ से ताने आएँ, या अल्लाह की तरफ से कोई इम्तिहान हो — उस पर सब्र कर।” क्योंकि जो सच्चाई और भलाई की राह पर चलता है, उसे मुश्किलों का सामना करना ही पड़ता है, और सब्र ही उसका हथियार है।
फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है: “ये चीज़ें (नमाज़, अम्र बिल-मारूफ़, नही अनिल-मुनकर और सब्र) उन अहम कामों में से हैं जिन्हें अल्लाह ने अपने बन्दों पर पक्के इरादे और सख्त हुक्म के साथ फ़र्ज़ किया है।” यानी इनमें कोई ढील या कमी नहीं चलती — ये वो अज़ीम काम हैं जिन पर इंसान का दुनिया और आख़िरत का भला टिका हुआ है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि एक सच्चा मुसलमान सिर्फ़ अपनी ही नमाज़ और अपनी ही इबादत तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह समाज का एक ज़िम्मेदार और सुधारक सदस्य होता है। वह जहाँ भी बुराई देखता है, उसे रोकने की कोशिश करता है, और जहाँ भलाई का मौक़ा देखता है, उसे आगे बढ़ाता है। और जब वह ऐसा करता है तो उसे यक़ीन होता है कि अल्लाह उसके साथ है, और उसकी मेहनत और सब्र कभी बेकार नहीं जाएगा। यही वो रास्ता है जो इंसान को अल्लाह का प्यारा बन्दा बनाता है और समाज में अमन व सुकून लाता है। आओ, हम भी इन नसीहतों को अपनी ज़िन्दगी में अपनाएँ और अपने घर, अपने समाज को बेहतर बनाने में अपना हिस्सा अदा करें।
📜 आयत 15-19 — लुकमान
अनुवाद — लुकमान 17
सूरा लुकमान आयत 17 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ बेटा नमाज़ पाबन्दी से पढ़ा कर और (लोगों से)…सूरा आयत 17/34 — लुकमान لقمان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: लुकमान सुनें, लुकमान अनुवाद, लुकमान mp3, लुकमान pdf. आयत 15–19. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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