Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- سَخَّرَ – वश में कर दिया, अधीन कर दिया
- أَسْبَغَ – पूरा-पूरा दिया, भरपूर प्रदान किया
- ظَاهِرَةً – प्रत्यक्ष, जो दिखाई देती हैं
- بَاطِنَةً – छिपी हुई, जो आँखों से नहीं दिखतीं
- يُجَادِلُ – झगड़ता है, तर्क-वितर्क करता है
- مُنِيرٍ – रोशन करने वाला, स्पष्ट
विस्तृत तफसीर:
ऐ लोगो! क्या तुमने कभी आँखें खोलकर देखा नहीं कि अल्लाह ने तुम्हारे लिए आसमानों की हर चीज़ को वश में कर दिया है? सूरज जो रोशनी और गर्मी देता है, चाँद जो रातों को उजाला करता है, तारे जो रास्ते दिखाते हैं, बादल जो पानी बरसाते हैं – यह सब कुछ तुम्हारी सेवा में लगा दिया गया है। और ज़मीन की हर चीज़ भी तुम्हारे लिए ही बनाई गई है – चौपाए, दरख़्त, नदियाँ, पहाड़, खनिज पदार्थ – सब कुछ तुम्हारे फ़ायदे के लिए ही है।
फिर अल्लाह ने अपनी नेअमतें (अनुग्रह) तुम पर पूरी तरह उँडेल दीं – कुछ नेअमतें ज़ाहिर हैं जिन्हें तुम देख सकते हो, जैसे तुम्हारे शरीर की बनावट, सुंदर रूप, स्वस्थ आँखें, कान, हाथ-पैर, और यह सारी कायनात जो तुम्हारे सामने फैली है। और कुछ नेअमतें बातिन (छिपी) हैं, जो आँखों से नहीं दिखतीं, जैसे अक़्ल, समझ, दिल की सफ़ाई, ईमान की तौफ़ीक़, और वह ज्ञान जो अल्लाह ने तुम्हें दिया है। यहाँ तक कि जो नेअमतें तुम्हारे बारे में तुम्हें भी मालूम नहीं हैं, वह भी अल्लाह ने तुम्हें दे रखी हैं।
इतनी बड़ी मेहरबानी और एहसान के बावजूद, कुछ लोग ऐसे हैं जो अल्लाह के बारे में झगड़ते हैं – उसकी वहदानियत (एकता) और उसकी इबादत पर एतराज़ करते हैं – बिना किसी इल्म के, बिना किसी हिदायत के, और बिना किसी रोशन किताब के जो उनके दावे की गवाही दे। वह सिर्फ़ अपने बुज़ुर्गों की नक़ल करते हैं, अंधी पैरवी करते हैं, और अपनी जिहालत में ही पड़े रहते हैं।
प्यारे भाइयो! यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि जिस रब ने हमें इतनी नेअमतें दी हैं, क्या उसका शुक्र अदा करना हमारा फ़र्ज़ नहीं? जब हम सुबह उठते हैं और अपने शरीर को स्वस्थ पाते हैं, जब हम अपने घर, परिवार, रोज़ी और इल्म को देखते हैं – तो क्या यह सब किसी और का करम है? यह अल्लाह का करम है जिसने हर चीज़ को हमारे लिए मुसख़्खर (वशीभूत) कर दिया।
इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह के शुक्रगुज़ार बनें, उसकी इबादत में कोई कसर न छोड़ें, और उन लोगों की तरह न बनें जो बिना इल्म के झगड़ते हैं। अल्लाह ने हमें अक़्ल दी है, क़ुरआन जैसी रोशन किताब दी है, और रसूल ﷺ जैसा रहनुमा दिया है – यह सबसे बड़ी नेअमत है। जो लोग इन नेअमतों को पहचान लें और अल्लाह के आगे सर झुका दें, वही असली कामयाब हैं। और जो लोग इन नेअमतों के बावजूद झगड़ते हैं, वह अपने नुक़सान के सिवा कुछ नहीं पाते।
अल्लाह हमें शुक्र करने की तौफ़ीक़ दे और हमें सीधे रास्ते पर चलाए। आमीन।
📜 आयत 18-22 — सूरा लुकमान
अनुवाद — लुकमान 20
सूरा लुकमान आयत 20 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या तुम लोगों ने इस पर ग़ौर नहीं किया कि…सूरा आयत 20/34 — सूरा लुकमान لقمان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा लुकमान सुनें, सूरा लुकमान अनुवाद, सूरा लुकमान mp3, सूरा लुकमान pdf. आयत 18–22. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


