लुकमान · 20/34
अनुवाद उच्चारण — लुकमान
أَلَمْ تَرَوْا أَنَّ اللَّهَ سَخَّرَ لَكُم مَّا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ وَأَسْبَغَ عَلَيْكُمْ نِعَمَهُ ظَاهِرَةً وَبَاطِنَةً ۗ وَمِنَ النَّاسِ مَن يُجَادِلُ فِي اللَّهِ بِغَيْرِ عِلْمٍ وَلَا هُدًى وَلَا كِتَابٍ مُّنِيرٍ ۝٢٠
Alam taraw annal laaha sakhkhara lakum maa fis sa maawaati wa maa fil ardi wa asbaha `alaikum ni`amahoo zaahiratanw wa baatinah; wa minan naasi many yujaadilu fil laahi bighayri `ilminw wa laa hudanw wa laa Kitaabim muneer
📖 हिंदी अर्थ
क्या तुम लोगों ने इस पर ग़ौर नहीं किया कि जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा ही ने यक़ीनी तुम्हारा ताबेए कर दिया है और तुम पर अपनी ज़ाहिरी और बातिनी नेअमतें पूरी कर दीं और बाज़ लोग (नुसर बिन हारिस वगैरह) ऐसे भी हैं जो (ख्वाह मा ख्वाह) ख़ुदा के बारे में झगड़ते हैं (हालॉकि उनके पास) न इल्म है और न हिदायत है और न कोई रौशन किताब है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سَخَّرَ – वश में कर दिया, अधीन कर दिया
  • أَسْبَغَ – पूरा-पूरा दिया, भरपूर प्रदान किया
  • ظَاهِرَةً – प्रत्यक्ष, जो दिखाई देती हैं
  • بَاطِنَةً – छिपी हुई, जो आँखों से नहीं दिखतीं
  • يُجَادِلُ – झगड़ता है, तर्क-वितर्क करता है
  • مُنِيرٍ – रोशन करने वाला, स्पष्ट

विस्तृत तफसीर:

ऐ लोगो! क्या तुमने कभी आँखें खोलकर देखा नहीं कि अल्लाह ने तुम्हारे लिए आसमानों की हर चीज़ को वश में कर दिया है? सूरज जो रोशनी और गर्मी देता है, चाँद जो रातों को उजाला करता है, तारे जो रास्ते दिखाते हैं, बादल जो पानी बरसाते हैं – यह सब कुछ तुम्हारी सेवा में लगा दिया गया है। और ज़मीन की हर चीज़ भी तुम्हारे लिए ही बनाई गई है – चौपाए, दरख़्त, नदियाँ, पहाड़, खनिज पदार्थ – सब कुछ तुम्हारे फ़ायदे के लिए ही है।

फिर अल्लाह ने अपनी नेअमतें (अनुग्रह) तुम पर पूरी तरह उँडेल दीं – कुछ नेअमतें ज़ाहिर हैं जिन्हें तुम देख सकते हो, जैसे तुम्हारे शरीर की बनावट, सुंदर रूप, स्वस्थ आँखें, कान, हाथ-पैर, और यह सारी कायनात जो तुम्हारे सामने फैली है। और कुछ नेअमतें बातिन (छिपी) हैं, जो आँखों से नहीं दिखतीं, जैसे अक़्ल, समझ, दिल की सफ़ाई, ईमान की तौफ़ीक़, और वह ज्ञान जो अल्लाह ने तुम्हें दिया है। यहाँ तक कि जो नेअमतें तुम्हारे बारे में तुम्हें भी मालूम नहीं हैं, वह भी अल्लाह ने तुम्हें दे रखी हैं।

इतनी बड़ी मेहरबानी और एहसान के बावजूद, कुछ लोग ऐसे हैं जो अल्लाह के बारे में झगड़ते हैं – उसकी वहदानियत (एकता) और उसकी इबादत पर एतराज़ करते हैं – बिना किसी इल्म के, बिना किसी हिदायत के, और बिना किसी रोशन किताब के जो उनके दावे की गवाही दे। वह सिर्फ़ अपने बुज़ुर्गों की नक़ल करते हैं, अंधी पैरवी करते हैं, और अपनी जिहालत में ही पड़े रहते हैं।

प्यारे भाइयो! यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि जिस रब ने हमें इतनी नेअमतें दी हैं, क्या उसका शुक्र अदा करना हमारा फ़र्ज़ नहीं? जब हम सुबह उठते हैं और अपने शरीर को स्वस्थ पाते हैं, जब हम अपने घर, परिवार, रोज़ी और इल्म को देखते हैं – तो क्या यह सब किसी और का करम है? यह अल्लाह का करम है जिसने हर चीज़ को हमारे लिए मुसख़्खर (वशीभूत) कर दिया।

इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह के शुक्रगुज़ार बनें, उसकी इबादत में कोई कसर न छोड़ें, और उन लोगों की तरह न बनें जो बिना इल्म के झगड़ते हैं। अल्लाह ने हमें अक़्ल दी है, क़ुरआन जैसी रोशन किताब दी है, और रसूल ﷺ जैसा रहनुमा दिया है – यह सबसे बड़ी नेअमत है। जो लोग इन नेअमतों को पहचान लें और अल्लाह के आगे सर झुका दें, वही असली कामयाब हैं। और जो लोग इन नेअमतों के बावजूद झगड़ते हैं, वह अपने नुक़सान के सिवा कुछ नहीं पाते।

अल्लाह हमें शुक्र करने की तौफ़ीक़ दे और हमें सीधे रास्ते पर चलाए। आमीन।



📜 आयत 18-22 — लुकमान

18وَلَا تُصَعِّرْ خَدَّكَ لِلنَّاسِ وَلَا تَمْشِ فِي الْأَرْضِ مَرَحًا ۖ إِنَّ اللَّهَ لَا يُحِبُّ كُلَّ مُخْتَالٍ فَخُورٍ
और लोगों के सामने (गुरुर से) अपना मुँह न फुलाना और ज़मीन पर अकड़कर न चलना क्योंकि ख़ुदा किसी अकड़ने वाले और इतराने वाले को दोस्त नहीं रखता और अपनी चाल ढाल में मियाना रवी एख्तेयार करो
19وَاقْصِدْ فِي مَشْيِكَ وَاغْضُضْ مِن صَوْتِكَ ۚ إِنَّ أَنكَرَ الْأَصْوَاتِ لَصَوْتُ الْحَمِيرِ
और दूसरो से बोलने में अपनी आवाज़ धीमी रखो क्योंकि आवाज़ों में तो सब से बुरी आवाज़ (चीख़ने की वजह से) गधों की है
20أَلَمْ تَرَوْا أَنَّ اللَّهَ سَخَّرَ لَكُم مَّا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ وَأَسْبَغَ عَلَيْكُمْ نِعَمَهُ ظَاهِرَةً وَبَاطِنَةً ۗ وَمِنَ النَّاسِ مَن يُجَادِلُ فِي اللَّهِ بِغَيْرِ عِلْمٍ وَلَا هُدًى وَلَا كِتَابٍ مُّنِيرٍ
क्या तुम लोगों ने इस पर ग़ौर नहीं किया कि जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा ही ने यक़ीनी तुम्हारा ताबेए कर दिया है और तुम पर अपनी ज़ाहिरी और बातिनी नेअमतें पूरी कर दीं और बाज़ लोग (नुसर बिन हारिस वगैरह) ऐसे भी हैं जो (ख्वाह मा ख्वाह) ख़ुदा के बारे में झगड़ते हैं (हालॉकि उनके पास) न इल्म है और न हिदायत है और न कोई रौशन किताब है
21وَإِذَا قِيلَ لَهُمُ اتَّبِعُوا مَا أَنزَلَ اللَّهُ قَالُوا بَلْ نَتَّبِعُ مَا وَجَدْنَا عَلَيْهِ آبَاءَنَا ۚ أَوَلَوْ كَانَ الشَّيْطَانُ يَدْعُوهُمْ إِلَىٰ عَذَابِ السَّعِيرِ
और जब उनसे कहा जाता है कि जो (किताब) ख़ुदा ने नाज़िल की है उसकी पैरवी करो तो (छूटते ही) कहते हैं कि नहीं हम तो उसी (तरीक़े से चलेंगे) जिस पर हमने अपने बाप दादाओं को पाया भला अगरचे शैतान उनके बाप दादाओं को जहन्नुम के अज़ाब की तरफ बुलाता रहा हो (तो भी उन्ही की पैरवी करेंगे)
22۞ وَمَن يُسْلِمْ وَجْهَهُ إِلَى اللَّهِ وَهُوَ مُحْسِنٌ فَقَدِ اسْتَمْسَكَ بِالْعُرْوَةِ الْوُثْقَىٰ ۗ وَإِلَى اللَّهِ عَاقِبَةُ الْأُمُورِ
और जो शख्स ख़ुदा के आगे अपना सर (तस्लीम) ख़म करे और वह नेकोकार (भी) हो तो बेशक उसने (ईमान की) मज़बूत रस्सी पकड़ ली और (आख़िर तो) सब कामों का अन्जाम ख़ुदा ही की तरफ है
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अनुवाद — लुकमान 20

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Tuesday, August 18, 2026

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