लुकमान · 21/34
अनुवाद उच्चारण — लुकमान
وَإِذَا قِيلَ لَهُمُ اتَّبِعُوا مَا أَنزَلَ اللَّهُ قَالُوا بَلْ نَتَّبِعُ مَا وَجَدْنَا عَلَيْهِ آبَاءَنَا ۚ أَوَلَوْ كَانَ الشَّيْطَانُ يَدْعُوهُمْ إِلَىٰ عَذَابِ السَّعِيرِ ۝٢١
Wa izaa qeela lahumut-tabi`oo maaa anzalal laahu qaaloo bal nattabi`u maa wajadnaa `alaihi aabaaa`anaa; awalaw kaanash Shaitaanu yad`oohum ilaa `azaabis sa`eer
📖 हिंदी अर्थ
और जब उनसे कहा जाता है कि जो (किताब) ख़ुदा ने नाज़िल की है उसकी पैरवी करो तो (छूटते ही) कहते हैं कि नहीं हम तो उसी (तरीक़े से चलेंगे) जिस पर हमने अपने बाप दादाओं को पाया भला अगरचे शैतान उनके बाप दादाओं को जहन्नुम के अज़ाब की तरफ बुलाता रहा हो (तो भी उन्ही की पैरवी करेंगे)
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • السَّعِير: भड़कती हुई आग, जो नरक की सबसे भयानक आग है।
  • يَدْعُوهُمْ: उन्हें बुलाता है, उन्हें अपनी ओर खींचता है।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब इन लोगों से, जो अल्लाह की तौहीद (एकता) और उसकी इबादत में झगड़ते हैं, कहा जाता है कि "उस चीज़ का पालन करो जो अल्लाह ने अपने नबी मुहम्मद ﷺ पर उतारी है" — यानी क़ुरआन और सुन्नत को अपनाओ, तो ये लोग अहंकार और हठधर्मी के साथ जवाब देते हैं: "नहीं, हम तो उसी रास्ते पर चलेंगे जिस पर हमने अपने बाप-दादाओं को पाया है।" यानी वे शिर्क, बुत-परस्ती और पुरानी रस्मों को ही अपना धर्म मानते हैं, चाहे वह कितना ही गलत और विनाशकारी क्यों न हो।

अल्लाह तआला इस पर उन्हें डांटते हुए फरमाता है: "क्या वे अपने बाप-दादाओं का अनुसरण करेंगे, चाहे शैतान उन्हें जलती हुई आग (नरक) के अज़ाब की ओर ही क्यों न बुला रहा हो?" यानी उनके बाप-दादे भी गुमराह थे, और शैतान उन्हीं के रास्ते पर चलकर इन्हें भी उसी आग की तरफ ले जा रहा है जो भड़कती हुई है। क्या अंधी पैरवी इतनी प्यारी है कि वे अपने पूर्वजों की गलतियों पर अड़े रहें, भले ही उनका अंजाम जहन्नुम की आग हो?

यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई का पैमाना अल्लाह की वही (प्रकाशना) है, न कि पूर्वजों की परंपराएँ। अगर हमारे बुज़ुर्गों का रास्ता क़ुरआन और सुन्नत के खिलाफ है, तो उसे छोड़ना ही बुद्धिमानी है। अल्लाह ने हमें अक्ल और समझ दी है ताकि हम सच और झूठ में फर्क करें। शैतान का काम ही यही है कि वह इंसान को खूबसूरत बातों से धोखा देकर नरक की तरफ ले जाए। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने बुज़ुर्गों की अच्छी बातों का सम्मान करें, लेकिन सच्चाई को हमेशा सबसे ऊपर रखें। क़ुरआन और रसूल ﷺ की शिक्षाएँ ही हमारी नजात (मुक्ति) का ज़रिया हैं — यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया की बेहतरी और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 19-23 — लुकमान

19وَاقْصِدْ فِي مَشْيِكَ وَاغْضُضْ مِن صَوْتِكَ ۚ إِنَّ أَنكَرَ الْأَصْوَاتِ لَصَوْتُ الْحَمِيرِ
और दूसरो से बोलने में अपनी आवाज़ धीमी रखो क्योंकि आवाज़ों में तो सब से बुरी आवाज़ (चीख़ने की वजह से) गधों की है
20أَلَمْ تَرَوْا أَنَّ اللَّهَ سَخَّرَ لَكُم مَّا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ وَأَسْبَغَ عَلَيْكُمْ نِعَمَهُ ظَاهِرَةً وَبَاطِنَةً ۗ وَمِنَ النَّاسِ مَن يُجَادِلُ فِي اللَّهِ بِغَيْرِ عِلْمٍ وَلَا هُدًى وَلَا كِتَابٍ مُّنِيرٍ
क्या तुम लोगों ने इस पर ग़ौर नहीं किया कि जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा ही ने यक़ीनी तुम्हारा ताबेए कर दिया है और तुम पर अपनी ज़ाहिरी और बातिनी नेअमतें पूरी कर दीं और बाज़ लोग (नुसर बिन हारिस वगैरह) ऐसे भी हैं जो (ख्वाह मा ख्वाह) ख़ुदा के बारे में झगड़ते हैं (हालॉकि उनके पास) न इल्म है और न हिदायत है और न कोई रौशन किताब है
21وَإِذَا قِيلَ لَهُمُ اتَّبِعُوا مَا أَنزَلَ اللَّهُ قَالُوا بَلْ نَتَّبِعُ مَا وَجَدْنَا عَلَيْهِ آبَاءَنَا ۚ أَوَلَوْ كَانَ الشَّيْطَانُ يَدْعُوهُمْ إِلَىٰ عَذَابِ السَّعِيرِ
और जब उनसे कहा जाता है कि जो (किताब) ख़ुदा ने नाज़िल की है उसकी पैरवी करो तो (छूटते ही) कहते हैं कि नहीं हम तो उसी (तरीक़े से चलेंगे) जिस पर हमने अपने बाप दादाओं को पाया भला अगरचे शैतान उनके बाप दादाओं को जहन्नुम के अज़ाब की तरफ बुलाता रहा हो (तो भी उन्ही की पैरवी करेंगे)
22۞ وَمَن يُسْلِمْ وَجْهَهُ إِلَى اللَّهِ وَهُوَ مُحْسِنٌ فَقَدِ اسْتَمْسَكَ بِالْعُرْوَةِ الْوُثْقَىٰ ۗ وَإِلَى اللَّهِ عَاقِبَةُ الْأُمُورِ
और जो शख्स ख़ुदा के आगे अपना सर (तस्लीम) ख़म करे और वह नेकोकार (भी) हो तो बेशक उसने (ईमान की) मज़बूत रस्सी पकड़ ली और (आख़िर तो) सब कामों का अन्जाम ख़ुदा ही की तरफ है
23وَمَن كَفَرَ فَلَا يَحْزُنكَ كُفْرُهُ ۚ إِلَيْنَا مَرْجِعُهُمْ فَنُنَبِّئُهُم بِمَا عَمِلُوا ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلِيمٌ بِذَاتِ الصُّدُورِ
और (ऐ रसूल) जो काफिर बन बैठे तो तुम उसके कुफ्र से कुढ़ों नही उन सबको तो हमारी तरफ लौट कर आना है तो जो कुछ उन लोगों ने किया है (उसका नतीजा) हम बता देगें बेशक ख़ुदा दिलों के राज़ से (भी) खूब वाक़िफ है
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अनुवाद — लुकमान 21

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Tuesday, August 18, 2026

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