अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَعْصِمُكُمْ (यअसिमुकुम): तुम्हें बचाए, सुरक्षित रखे, रोक दे।
- سُوءًا (सूअन): बुराई, तकलीफ, हानि — जैसे मौत या हार।
- رَحْمَةً (रहमतन): दया, भलाई, सुरक्षा और विजय।
- وَلِيًّا (वलिय्यन): मददगार, संरक्षक, साथ देने वाला।
- نَصِيرًا (नसीरन): सहायक, रक्षक।
तफसीर (व्याख्या):
ऐ नबी! इन मुनाफ़िक़ों (कपटियों) से कह दीजिए — वे लोग जो जिहाद से भागते हैं और अपनी जान बचाने की कोशिश करते हैं — "बताओ, अगर अल्लाह तुम्हारे साथ कोई बुराई करना चाहे — जैसे मौत, हार या कोई मुसीबत — तो कौन है जो तुम्हें अल्लाह से बचा सके? और अगर अल्लाह तुम पर दया करना चाहे — यानी सुरक्षा, विजय और भलाई देना चाहे — तो कौन है जो उसकी रहमत को रोक सके?"
यानी, अल्लाह ही सब कुछ करने वाला है। वही नुक़सान पहुँचाने वाला है और वही फ़ायदा देने वाला है। कोई ताकत, कोई इंसान, कोई हथियार या कोई किला — कुछ भी अल्लाह की मर्ज़ी के आगे काम नहीं आ सकता। अगर अल्लाह ने चाहा तो कोई तुम्हें बचा नहीं सकता, और अगर अल्लाह ने चाहा तो कोई तुम्हें नुक़सान नहीं पहुँचा सकता।
फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ये मुनाफ़िक़ — जो अल्लाह के दीन से दूर भागते हैं और अपनी जान बचाने की फ़िक्र में लगे हैं — उन्हें अल्लाह के सिवा न कोई दोस्त मिलेगा जो उनका हाथ पकड़े, और न कोई मददगार मिलेगा जो उन्हें अल्लाह की पकड़ से बचा सके। वे जितना भी भागें, जितनी भी चालाकी करें, अल्लाह की क़ुदरत से बाहर नहीं जा सकते।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें सिखाती है कि हमारी पूरी ज़िंदगी अल्लाह के हाथ में है। जब हम यह समझ लेते हैं कि नुक़सान और फ़ायदा, ज़िंदगी और मौत, इज़्ज़त और रुसवाई — सब कुछ अल्लाह के इख्तियार में है, तो हमारा दिल सिर्फ़ अल्लाह से जुड़ता है। हम किसी इंसान से नहीं डरते और किसी इंसान से उम्मीद नहीं रखते।
यही तो सच्ची ईमान की निशानी है — कि बंदा अल्लाह पर भरोसा करे, उसी से मदद माँगे, और यह यक़ीन रखे कि अल्लाह जो चाहेगा वही होगा। जो शख्स अल्लाह पर भरोसा करता है, अल्लाह उसके लिए काफ़ी है। और जो अल्लाह से दूर भागता है, उसे कहीं पनाह नहीं मिलेगी।
तो आओ, हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह के हवाले कर दें, उसकी राह में क़ुर्बानी दें, और यक़ीन रखें कि अल्लाह हमारा वली (संरक्षक) और नसीर (सहायक) है। जिसका वली अल्लाह हो, उसे किसी और की ज़रूरत नहीं। और जिसे अल्लाह ने छोड़ दिया, उसे कोई नहीं बचा सकता।
📜 आयत 15-19 — अल-अहज़ाब
अनुवाद — अल-अहज़ाब 17
सूरा अल-अहज़ाब आयत 17 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम उनसे कह दो कि अगर खुदा तुम्हारे…सूरा आयत 17/73 — अल-अहज़ाब الأحزاب (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अहज़ाब सुनें, अल-अहज़ाब अनुवाद, अल-अहज़ाब mp3, अल-अहज़ाब pdf. आयत 15–19. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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