Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الْفِرَارُ (फ़िरार): भागना, पलायन करना
- الْمَوْتِ (अल-मौत): मृत्यु
- الْقَتْلِ (अल-क़त्ल): मारा जाना, युद्ध में वध होना
- لَا تُمَتَّعُونَ (ला तुमत्तऊन): तुम्हें आनंद नहीं दिया जाएगा, तुम लाभान्वित नहीं होगे
- إِلَّا قَلِيلًا (इल्ला क़लीला): थोड़े समय के लिए, बहुत कम अवधि
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप इन मुनाफ़िक़ों (कपटियों) से कह दीजिए जो जिहाद से भागने की कोशिश कर रहे हैं और मौत या क़त्ल के डर से युद्ध के मैदान से पलायन करना चाहते हैं — "याद रखो, यह भागना तुम्हें कभी लाभ नहीं पहुँचाएगा। यदि तुम मौत या मारे जाने के भय से भागोगे भी, तो भी तुम्हारी मृत्यु तुम्हें आकर रहेगी, क्योंकि अल्लाह ने हर प्राणी की आयु और मृत्यु का समय पहले ही निर्धारित कर दिया है। जिसका समय आ गया, वह कहीं भी हो, मरकर रहेगा — चाहे वह युद्ध के मैदान में हो या अपने घर की सुरक्षित दीवारों के भीतर।
और यदि तुम भाग भी गए, तो इस भागने के बाद तुम्हें दुनिया में केवल थोड़े ही दिनों का आनंद मिलेगा — बस उतना ही जितनी तुम्हारी नियत आयु शेष है। यह अवधि आख़िरत की अनंत जीवन की तुलना में बिल्कुल नगण्य और क्षणभंगुर है। तो क्या यह समझदारी है कि इन थोड़े दिनों के लिए तुम अल्लाह की आज्ञा से भागो, उसके दीन की मदद से पीछे हटो, और फिर भी तुम्हें वह मिलेगा जो तुम्हारे भाग्य में लिखा है?
याद रखो, मौत से भागना कभी किसी को नहीं बचा सकता। अल्लाह की इच्छा के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता। तो फिर मुसलमान को क्या करना चाहिए? उसे अल्लाह पर भरोसा करते हुए, उसके मार्ग में जिहाद करना चाहिए, क्योंकि यही सच्ची इज़्ज़त और कामयाबी का रास्ता है। जो अल्लाह की राह में शहीद होता है, वह वास्तव में जीवित है और अपने रब के पास आनंदित है। मृत्यु से डरना नहीं चाहिए, बल्कि उस दिन के लिए तैयारी करनी चाहिए जब हम अपने रब के सामने खड़े होंगे।
इस आयत में हमारे लिए बड़ी सीख है — हमें अपने जीवन को अल्लाह की आज्ञाकारिता में बिताना चाहिए, उसके दीन की सेवा करनी चाहिए, और यह विश्वास रखना चाहिए कि जो कुछ भी होता है, अल्लाह की इच्छा से होता है। जो व्यक्ति अल्लाह पर भरोसा करता है, अल्लाह उसके लिए काफी है। और जो अल्लाह की राह में अपनी जान कुर्बान कर देता है, उसके लिए जन्नत में ऐसा मुकाम है जिसे किसी आँख ने नहीं देखा, किसी कान ने नहीं सुना और किसी दिल ने नहीं सोचा।
📜 आयत 14-18 — सूरा अल-अहज़ाब
अनुवाद — अल-अहज़ाब 16
सूरा अल-अहज़ाब आयत 16 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल उनसे) कह दो कि अगर तुम मौत का…सूरा आयत 16/73 — सूरा अल-अहज़ाब الأحزاب (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अहज़ाब सुनें, सूरा अल-अहज़ाब अनुवाद, सूरा अल-अहज़ाब mp3, सूरा अल-अहज़ाब pdf. आयत 14–18. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-अहज़ाब
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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