अल-अहज़ाब · 16/73
अनुवाद उच्चारण — अल-अहज़ाब
قُل لَّن يَنفَعَكُمُ الْفِرَارُ إِن فَرَرْتُم مِّنَ الْمَوْتِ أَوِ الْقَتْلِ وَإِذًا لَّا تُمَتَّعُونَ إِلَّا قَلِيلًا ۝١٦
Qul lany y anfa`akumul firaaru in farartum minal mawti awil qatli wa izal laa tumatta`oona illaa qaleelaa
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल उनसे) कह दो कि अगर तुम मौत का क़त्ल (के ख़ौफ) से भागे भी तो (यह) भागना तुम्हें हरगिज़ कुछ भी मुफ़ीद न होगा और अगर तुम भागकर बच भी गए तो बस यही न की दुनिया में चन्द रोज़ा और चैनकर लो
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الْفِرَارُ (फ़िरार): भागना, पलायन करना
  • الْمَوْتِ (अल-मौत): मृत्यु
  • الْقَتْلِ (अल-क़त्ल): मारा जाना, युद्ध में वध होना
  • لَا تُمَتَّعُونَ (ला तुमत्तऊन): तुम्हें आनंद नहीं दिया जाएगा, तुम लाभान्वित नहीं होगे
  • إِلَّا قَلِيلًا (इल्ला क़लीला): थोड़े समय के लिए, बहुत कम अवधि

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप इन मुनाफ़िक़ों (कपटियों) से कह दीजिए जो जिहाद से भागने की कोशिश कर रहे हैं और मौत या क़त्ल के डर से युद्ध के मैदान से पलायन करना चाहते हैं — "याद रखो, यह भागना तुम्हें कभी लाभ नहीं पहुँचाएगा। यदि तुम मौत या मारे जाने के भय से भागोगे भी, तो भी तुम्हारी मृत्यु तुम्हें आकर रहेगी, क्योंकि अल्लाह ने हर प्राणी की आयु और मृत्यु का समय पहले ही निर्धारित कर दिया है। जिसका समय आ गया, वह कहीं भी हो, मरकर रहेगा — चाहे वह युद्ध के मैदान में हो या अपने घर की सुरक्षित दीवारों के भीतर।

और यदि तुम भाग भी गए, तो इस भागने के बाद तुम्हें दुनिया में केवल थोड़े ही दिनों का आनंद मिलेगा — बस उतना ही जितनी तुम्हारी नियत आयु शेष है। यह अवधि आख़िरत की अनंत जीवन की तुलना में बिल्कुल नगण्य और क्षणभंगुर है। तो क्या यह समझदारी है कि इन थोड़े दिनों के लिए तुम अल्लाह की आज्ञा से भागो, उसके दीन की मदद से पीछे हटो, और फिर भी तुम्हें वह मिलेगा जो तुम्हारे भाग्य में लिखा है?

याद रखो, मौत से भागना कभी किसी को नहीं बचा सकता। अल्लाह की इच्छा के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता। तो फिर मुसलमान को क्या करना चाहिए? उसे अल्लाह पर भरोसा करते हुए, उसके मार्ग में जिहाद करना चाहिए, क्योंकि यही सच्ची इज़्ज़त और कामयाबी का रास्ता है। जो अल्लाह की राह में शहीद होता है, वह वास्तव में जीवित है और अपने रब के पास आनंदित है। मृत्यु से डरना नहीं चाहिए, बल्कि उस दिन के लिए तैयारी करनी चाहिए जब हम अपने रब के सामने खड़े होंगे।

इस आयत में हमारे लिए बड़ी सीख है — हमें अपने जीवन को अल्लाह की आज्ञाकारिता में बिताना चाहिए, उसके दीन की सेवा करनी चाहिए, और यह विश्वास रखना चाहिए कि जो कुछ भी होता है, अल्लाह की इच्छा से होता है। जो व्यक्ति अल्लाह पर भरोसा करता है, अल्लाह उसके लिए काफी है। और जो अल्लाह की राह में अपनी जान कुर्बान कर देता है, उसके लिए जन्नत में ऐसा मुकाम है जिसे किसी आँख ने नहीं देखा, किसी कान ने नहीं सुना और किसी दिल ने नहीं सोचा।

🎧 सुनें

📜 आयत 14-18 — अल-अहज़ाब

14وَلَوْ دُخِلَتْ عَلَيْهِم مِّنْ أَقْطَارِهَا ثُمَّ سُئِلُوا الْفِتْنَةَ لَآتَوْهَا وَمَا تَلَبَّثُوا بِهَا إِلَّا يَسِيرًا
और अगर ऐसा ही लश्कर उन लोगों पर मदीने के एतराफ से आ पड़े और उन से फसाद (ख़ाना जंगी) करने की दरख्वास्त की जाए तो ये लोग उसके लिए (फौरन) आ मौजूद हों
15وَلَقَدْ كَانُوا عَاهَدُوا اللَّهَ مِن قَبْلُ لَا يُوَلُّونَ الْأَدْبَارَ ۚ وَكَانَ عَهْدُ اللَّهِ مَسْئُولًا
और (उस वक्त) अपने घरों में भी बहुत कम तवक्क़ुफ़ करेंगे (मगर ये तो जिहाद है) हालाँकि उन लोगों ने पहले ही खुदा से एहद किया था कि हम दुश्मन के मुक़ाबले में (अपनी) पीठ न फेरेंगे और खुदा के एहद की पूछगछ तो (एक न एक दिन) होकर रहेगी
16قُل لَّن يَنفَعَكُمُ الْفِرَارُ إِن فَرَرْتُم مِّنَ الْمَوْتِ أَوِ الْقَتْلِ وَإِذًا لَّا تُمَتَّعُونَ إِلَّا قَلِيلًا
(ऐ रसूल उनसे) कह दो कि अगर तुम मौत का क़त्ल (के ख़ौफ) से भागे भी तो (यह) भागना तुम्हें हरगिज़ कुछ भी मुफ़ीद न होगा और अगर तुम भागकर बच भी गए तो बस यही न की दुनिया में चन्द रोज़ा और चैनकर लो
17قُلْ مَن ذَا الَّذِي يَعْصِمُكُم مِّنَ اللَّهِ إِنْ أَرَادَ بِكُمْ سُوءًا أَوْ أَرَادَ بِكُمْ رَحْمَةً ۚ وَلَا يَجِدُونَ لَهُم مِّن دُونِ اللَّهِ وَلِيًّا وَلَا نَصِيرًا
(ऐ रसूल) तुम उनसे कह दो कि अगर खुदा तुम्हारे साथ बुराई का इरादा कर बैठे तो तुम्हें उसके (अज़ाब) से कौन ऐसा है जो बचाए या भलाई ही करना चाहे (तो कौन रोक सकता है) और ये लोग खुदा के सिवा न तो किसी को अपना सरपरस्त पाएँगे और न मद्दगार
18۞ قَدْ يَعْلَمُ اللَّهُ الْمُعَوِّقِينَ مِنكُمْ وَالْقَائِلِينَ لِإِخْوَانِهِمْ هَلُمَّ إِلَيْنَا ۖ وَلَا يَأْتُونَ الْبَأْسَ إِلَّا قَلِيلًا
तुममें से जो लोग (दूसरों को जिहाद से) रोकते हैं खुदा उनको खूब जानता है और (उनको भी खूब जानता है) जो अपने भाई बन्दों से कहते हैं कि हमारे पास चले भी आओ और खुद भी (फक़त पीछा छुड़ाने को लड़ाई के खेत) में बस एक ज़रा सा आकर तुमसे अपनी जान चुराई
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अनुवाद — अल-अहज़ाब 16

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Tuesday, August 18, 2026

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