अल-अहज़ाब · 28/73
अनुवाद उच्चारण — अल-अहज़ाब
يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ قُل لِّأَزْوَاجِكَ إِن كُنتُنَّ تُرِدْنَ الْحَيَاةَ الدُّنْيَا وَزِينَتَهَا فَتَعَالَيْنَ أُمَتِّعْكُنَّ وَأُسَرِّحْكُنَّ سَرَاحًا جَمِيلًا ۝٢٨
Yaaa aiyuhan Nabiyyu qul li azwaajika i kuntunna turidnal hayaatad dunyaa wa zeenatahaa fata`aalaina umatti`kunna wa usarrihkunna saraahan jameela
📖 हिंदी अर्थ
ऐ रसूल अपनी बीवियों से कह दो कि अगर तुम (फक़त) दुनियावी ज़िन्दगी और उसकी आराइश व ज़ीनत की ख्वाहॉ हो तो उधर आओ मैं तुम लोगों को कुछ साज़ो सामान दे दूँ और उनवाने शाइस्ता से रूख़सत कर दूँ
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أُمَتِّعْكُنَّ: मैं तुम्हें जीवन-निर्वाह का सामान दूँ (जैसा कि तलाक़शुदा औरतों को दिया जाता है)।
  • وَأُسَرِّحْكُنَّ: और मैं तुम्हें अच्छे ढंग से छोड़ दूँ (यानी तलाक़ दे दूँ)।
  • سَرَاحًا جَمِيلًا: ऐसा छोड़ना जिसमें कोई कष्ट, झगड़ा या बुराई न हो — पूरी नेकी और भलाई के साथ।

तफ़सीर:

ऐ नबी! अपनी पवित्र पत्नियों से कहो — जब उन्होंने सांसारिक सुख-सुविधाओं में अधिकता की माँग की थी — कि अगर तुम दुनिया की ज़िंदगी और उसकी चमक-दमक को चाहती हो, तो आओ, मैं तुम्हें कुछ सांसारिक सामान दे दूँ और तुम्हें इस तरह रिहा कर दूँ जिसमें कोई तकलीफ़ या नुक़सान न हो। यानी तुम्हें अच्छे ढंग से तलाक़ दे दूँ, ताकि तुम अपनी मर्ज़ी से दुनिया की ख़्वाहिशें पूरी कर सको।

यह आयत नबी ﷺ की पत्नियों के लिए एक बड़ा इम्तिहान था। उनके सामने दो रास्ते रखे गए — एक दुनिया की ज़िंदगी और उसकी सजावट, और दूसरा अल्लाह और उसके रसूल की रज़ा। यह कोई साधारण मामला नहीं था, बल्कि यह उनके ईमान और इख़्लास की परख थी। लेकिन अल्लाह ने अपने नबी की पाक बीवियों को वह तौफ़ीक़ दी कि उन्होंने दुनिया की क्षणभंगुर चमक को ठुकराकर अल्लाह और उसके रसूल को चुना। यह उनके उच्च दर्जे और पाकीज़गी की गवाही है।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि मोमिन का नज़रिया दुनिया की चमक-दमक से ऊपर उठकर आख़िरत की कामयाबी पर होना चाहिए। दुनिया की ज़िंदगी चंद रोज़ की है, उसकी ज़ीनत धोखा देने वाली है, लेकिन अल्लाह की रज़ा और उसके रसूल की मुहब्बत ही असली सरमाया है। जो लोग अल्लाह और उसके रसूल को चुनते हैं, अल्लाह उन्हें दुनिया में भी भलाई देता है और आख़िरत में भी — और यही सबसे बड़ी कामयाबी है।

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अगर किसी रिश्ते में दुनियावी मतलब हावी हो जाए और ईमानी रूह कमज़ोर पड़ जाए, तो उसे अच्छे ढंग से खत्म करना बेहतर है बजाय इसके कि उसमें ज़ुल्म और तकलीफ़ जारी रहे। इस्लाम ने हमेशा रिश्तों में भलाई, नेकी और इंसाफ़ का हुक्म दिया है — चाहे वह रिश्ता निभाया जाए या उसे खत्म किया जाए।

🎧 सुनें

📜 आयत 26-30 — अल-अहज़ाब

26وَأَنزَلَ الَّذِينَ ظَاهَرُوهُم مِّنْ أَهْلِ الْكِتَابِ مِن صَيَاصِيهِمْ وَقَذَفَ فِي قُلُوبِهِمُ الرُّعْبَ فَرِيقًا تَقْتُلُونَ وَتَأْسِرُونَ فَرِيقًا
और अहले किताब में से जिन लोगों (बनी कुरैज़ा) ने उन (कुफ्फार) की मदद की थी खुदा उनको उनके क़िलों से (बेदख़ल करके) नीचे उतार लाया और उनके दिलों में (तुम्हारा) ऐसा रोब बैठा दिया कि तुम उनके कुछ लोगों को क़त्ल करने लगे
27وَأَوْرَثَكُمْ أَرْضَهُمْ وَدِيَارَهُمْ وَأَمْوَالَهُمْ وَأَرْضًا لَّمْ تَطَئُوهَا ۚ وَكَانَ اللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرًا
और कुछ को क़ैदी (और गुलाम) बनाने और तुम ही लोगों को उनकी ज़मीन और उनके घर और उनके माल और उस ज़मीन (खैबर) का खुदा ने मालिक बना दिया जिसमें तुमने क़दम तक नहीं रखा था और खुदा तो हर चीज़ पर क़ादिर वतवाना है
28يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ قُل لِّأَزْوَاجِكَ إِن كُنتُنَّ تُرِدْنَ الْحَيَاةَ الدُّنْيَا وَزِينَتَهَا فَتَعَالَيْنَ أُمَتِّعْكُنَّ وَأُسَرِّحْكُنَّ سَرَاحًا جَمِيلًا
ऐ रसूल अपनी बीवियों से कह दो कि अगर तुम (फक़त) दुनियावी ज़िन्दगी और उसकी आराइश व ज़ीनत की ख्वाहॉ हो तो उधर आओ मैं तुम लोगों को कुछ साज़ो सामान दे दूँ और उनवाने शाइस्ता से रूख़सत कर दूँ
29وَإِن كُنتُنَّ تُرِدْنَ اللَّهَ وَرَسُولَهُ وَالدَّارَ الْآخِرَةَ فَإِنَّ اللَّهَ أَعَدَّ لِلْمُحْسِنَاتِ مِنكُنَّ أَجْرًا عَظِيمًا
और अगर तुम लोग खुदा और उसके रसूल और आखेरत के घर की ख्वाहॉ हो तो (अच्छी तरह ख्याल रखो कि) तुम लोगों में से नेकोकार औरतों के लिए खुदा ने यक़ीनन् बड़ा (बड़ा) अज्र व (सवाब) मुहय्या कर रखा है
30يَا نِسَاءَ النَّبِيِّ مَن يَأْتِ مِنكُنَّ بِفَاحِشَةٍ مُّبَيِّنَةٍ يُضَاعَفْ لَهَا الْعَذَابُ ضِعْفَيْنِ ۚ وَكَانَ ذَٰلِكَ عَلَى اللَّهِ يَسِيرًا
ऐ पैग़म्बर की बीबियों तुममें से जो कोई किसी सरीही ना शाइस्ता हरकत की का मुरतिब हुई तो (याद रहे कि) उसका अज़ाब भी दुगना बढ़ा दिया जाएगा और खुदा के वास्ते (निहायत) आसान है
अल-अहज़ाबकुरान सूची
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अनुवाद — अल-अहज़ाब 28

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Tuesday, August 18, 2026

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