सबा · 3/54
अनुवाद उच्चारण — सबा
وَقَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا لَا تَأْتِينَا السَّاعَةُ ۖ قُلْ بَلَىٰ وَرَبِّي لَتَأْتِيَنَّكُمْ عَالِمِ الْغَيْبِ ۖ لَا يَعْزُبُ عَنْهُ مِثْقَالُ ذَرَّةٍ فِي السَّمَاوَاتِ وَلَا فِي الْأَرْضِ وَلَا أَصْغَرُ مِن ذَٰلِكَ وَلَا أَكْبَرُ إِلَّا فِي كِتَابٍ مُّبِينٍ ۝٣
Wa qaalal lazeena kafaroo laa taateenas Saa`ah; qul balaa wa Rabbee lataatiyannakum `Aalimul Ghaib; laa ya`zubu `anhu misqaalu zarratin fis samaawaati wa laa fil ardi wa laaa asgharu min zaalika wa laaa akbaru illaa fee kitaabim mubeen
📖 हिंदी अर्थ
और कुफ्फार कहने लगे कि हम पर तो क़यामत आएगी ही नहीं (ऐ रसूल) तुम कह दो हॉ (हॉ) मुझ को अपने उस आलेमुल ग़ैब परवरदिगार की क़सम है जिससे ज़र्रा बराबर (कोई चीज़) न आसमान में छिपी हुई है और न ज़मीन में कि क़यामत ज़रूर आएगी और ज़र्रे से छोटी चीज़ और ज़र्रे से बडी (ग़रज़ जितनी चीज़े हैं सब) वाजेए व रौशन किताब लौहे महफूज़ में महफूज़ हैं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • السَّاعَةُ (अस-साआह): क़ियामत, प्रलय का दिन।
  • بَلَى (बला): हाँ, अवश्य (क़सम के साथ पुष्टि के लिए)।
  • عَالِمِ الْغَيْبِ (आलिमुल-ग़ैब): छिपी हुई चीज़ों का ज्ञान रखने वाला।
  • يَعْزُبُ (य'ज़ुबु): दूर होना, छिपा रहना, ग़ायब होना।
  • مِثْقَالُ ذَرَّةٍ (मिस्क़ालु ज़र्राह): एक चींटी के बराबर वज़न, अत्यंत सूक्ष्म कण।
  • كِتَابٍ مُبِينٍ (किताबिन मुबीन): स्पष्ट किताब, यानी लौह-ए-महफ़ूज़।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब नबी करीम ﷺ ने लोगों को क़ियामत के आने और मौत के बाद दोबारा जीवित होने की ख़बर दी, तो काफ़िरों ने अहंकार और मज़ाक़ के अंदाज़ में कहा: "ये क़ियामत तो हमारे पास आएगी ही नहीं!" वे इसे महज़ एक कल्पना समझते थे और उस पर हँसते थे।

अल्लाह तआला ने अपने नबी ﷺ को सिखाया कि उन्हें जवाब दें: "हाँ، मेरे रब की क़सम! वह क़ियामत तुम्हारे पास अवश्य आएगी।" यह कोई ऐसी चीज़ नहीं जो अल्लाह के क़ुदरत से बाहर हो। वह आलिमुल-ग़ैब है—हर छिपी चीज़ का ज्ञान रखने वाला। उसके इल्म से न तो आसमानों में और न ही ज़मीन में एक ज़र्रा (चींटी के बराबर) भी छिपा है, और न ही उससे छोटी या बड़ी कोई चीज़। हर चीज़ उसके पूर्ण ज्ञान में है और लौह-ए-महफ़ूज़ (स्पष्ट किताब) में दर्ज है।

यह अल्लाह की बेपनाह क़ुदरत और इल्म की दलील है। जब वह हर छोटे-बड़े कण से वाक़िफ है، तो उसके लिए मुर्दों को दोबारा ज़िंदा करना और क़ियामत का दिन लाना क्या मुश्किल है? यह उसके लिए बिल्कुल आसान है।

इस आयत में हमारे लिए बड़ी नसीहत है: जो लोग क़ियामत को झुठलाते हैं، वह दरअसल अल्लाह की क़ुदरत को नहीं समझते। लेकिन जो ईमान लाते हैं، नेक अमल करते हैं، उनके लिए अल्लाह ने मग़फ़िरत (क्षमा) और करीम रिज़्क़ (जन्नत) का वादा किया है। यह वादा उतना ही सच है जितना सच क़ियामत का आना है।

आओ، हम इस हक़ीक़त पर यक़ीन करें और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ बनाएं، ताकि उस दिन हम उन लोगों में से हों जिन्हें जन्नत की ख़ुशख़बरी दी जाएगी। अल्लाह हमें सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 1-5 — सबा

1الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي لَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ وَلَهُ الْحَمْدُ فِي الْآخِرَةِ ۚ وَهُوَ الْحَكِيمُ الْخَبِيرُ
हर क़िस्म की तारीफ उसी खुदा के लिए (दुनिया में भी) सज़ावार है कि जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) उसी का है और आख़ेरत में (भी हर तरफ) उसी की तारीफ है और वही वाक़िफकार हकीम है
2يَعْلَمُ مَا يَلِجُ فِي الْأَرْضِ وَمَا يَخْرُجُ مِنْهَا وَمَا يَنزِلُ مِنَ السَّمَاءِ وَمَا يَعْرُجُ فِيهَا ۚ وَهُوَ الرَّحِيمُ الْغَفُورُ
(जो) चीज़ें (बीज वग़ैरह) ज़मीन में दाख़िल हुई है और जो चीज़ (दरख्त वग़ैरह) इसमें से निकलती है और जो चीज़ (पानी वग़ैरह) आसामन से नाज़िल होती है और जो चीज़ (नज़ारात फरिश्ते वग़ैरह) उस पर चढ़ती है (सब) को जानता है और वही बड़ा बख्शने वाला है
3وَقَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا لَا تَأْتِينَا السَّاعَةُ ۖ قُلْ بَلَىٰ وَرَبِّي لَتَأْتِيَنَّكُمْ عَالِمِ الْغَيْبِ ۖ لَا يَعْزُبُ عَنْهُ مِثْقَالُ ذَرَّةٍ فِي السَّمَاوَاتِ وَلَا فِي الْأَرْضِ وَلَا أَصْغَرُ مِن ذَٰلِكَ وَلَا أَكْبَرُ إِلَّا فِي كِتَابٍ مُّبِينٍ
और कुफ्फार कहने लगे कि हम पर तो क़यामत आएगी ही नहीं (ऐ रसूल) तुम कह दो हॉ (हॉ) मुझ को अपने उस आलेमुल ग़ैब परवरदिगार की क़सम है जिससे ज़र्रा बराबर (कोई चीज़) न आसमान में छिपी हुई है और न ज़मीन में कि क़यामत ज़रूर आएगी और ज़र्रे से छोटी चीज़ और ज़र्रे से बडी (ग़रज़ जितनी चीज़े हैं सब) वाजेए व रौशन किताब लौहे महफूज़ में महफूज़ हैं
4لِّيَجْزِيَ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ ۚ أُولَٰئِكَ لَهُم مَّغْفِرَةٌ وَرِزْقٌ كَرِيمٌ
ताकि जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और (अच्छे) काम किए उनको खुदा जज़ाए खैर दे यही वह लोग हैं जिनके लिए (गुनाहों की) मग़फेरत और (बहुत ही) इज्ज़त की रोज़ी है
5وَالَّذِينَ سَعَوْا فِي آيَاتِنَا مُعَاجِزِينَ أُولَٰئِكَ لَهُمْ عَذَابٌ مِّن رِّجْزٍ أَلِيمٌ
और जिन लोगों ने हमारी आयतों (के तोड़) में मुक़ाबिले की दौड़-धूप की उन ही के लिए दर्दनाक अज़ाब की सज़ा होगी
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अनुवाद — सबा 3

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सूरा आयत 3/54 — सबा سبأ (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सबा सुनें, सबा अनुवाद, सबा mp3, सबा pdf. आयत 1–5. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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