अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لِيَجْزِيَ: ताकि वह बदला दे।
- الَّذِينَ آمَنُوا: जो ईमान लाए।
- عَمِلُوا الصَّالِحَاتِ: अच्छे कर्म किए।
- مَغْفِرَةٌ: क्षमा, गुनाहों की माफी।
- رِزْقٌ كَرِيمٌ: सम्मानित और उत्तम आजीविका (यानी जन्नत)।
तफसीर:
अल्लाह तआला ने अपने इल्म और लौह-ए-महफूज़ में हर चीज़ को दर्ज कर रखा है, यहाँ तक कि आसमानों और ज़मीन में एक ज़र्रा-बराबर चीज़ भी उससे छिपी नहीं है, न छोटी और न बड़ी। यह सब कुछ इसलिए है ताकि वह उन लोगों को बदला दे जो अल्लाह पर ईमान लाए और अच्छे कर्म करते रहे। यही वे लोग हैं जिनके लिए उसकी ओर से मगफिरत (गुनाहों की क्षमा) है और करीम रिज़्क़ (सम्मानित आजीविका) है, जो कि जन्नत है।
यह आयत मोमिनीन के लिए खुशखबरी है कि उनका ईमान और नेक अमल कभी ज़ाया नहीं होगा। अल्लाह ने उनके लिए दो बड़ी नेअमतें तैयार की हैं: एक यह कि उनके सारे गुनाह माफ कर दिए जाएँगे, और दूसरी यह कि उन्हें ऐसा इनाम मिलेगा जो किसी आँख ने नहीं देखा, किसी कान ने नहीं सुना और किसी दिल ने नहीं सोचा। यह अल्लाह का वादा है जो सच्चा और अटल है।
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह का इल्म हर चीज़ पर हावी है और उसकी रहमत उसके बंदों पर बेहद व्यापक है। जो लोग ईमान लाते हैं और अच्छे कर्म करते हैं, उनके लिए अल्लाह के पास माफी और बेहतरीन इनाम है। यह हमारे लिए एक प्रेरणा है कि हम अपने ईमान को मजबूत करें और अपने अमल को सुधारें, क्योंकि अल्लाह की रहमत और उसका इनाम उन्हीं के लिए है जो उस पर भरोसा करें और उसकी राह में नेक काम करें। याद रखें, दुनिया की कोई भी चीज़ उस इनाम के मुकाबले में नहीं है जो अल्लाह ने अपने नेक बंदों के लिए तैयार किया है।
📜 आयत 2-6 — सबा
अनुवाद — सबा 4
सूरा सबा आयत 4 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ताकि जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और (अच्छे) काम…सूरा आयत 4/54 — सबा سبأ (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सबा सुनें, सबा अनुवाद, सबा mp3, सबा pdf. आयत 2–6. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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