अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يَلِجُ – अंदर जाना, प्रवेश करना
- يَعْرُجُ – ऊपर चढ़ना, आरोहण करना
- الرَّحِيمُ – अत्यंत दयालु (जो अपने बंदों पर असीम रहमत करता है)
- الْغَفُورُ – बड़ा क्षमाशील (गुनाहों को माफ करने वाला)
तफसीर:
अल्लाह तआला अपने बंदों को उसके असीम ज्ञान की याद दिलाता है, जो हर चीज़ को घेरे हुए है। वह जानता है जो कुछ भी ज़मीन के अंदर जाता है—चाहे वह बारिश का पानी हो जो ज़मीन की गहराइयों में समा जाता है, या मुर्दे जो क़ब्रों में दफ़न किए जाते हैं, या खज़ाने और दफ़न की हुई चीज़ें जो ज़मीन के पेट में छिपी होती हैं। और वही जानता है जो कुछ ज़मीन से निकलता है—चाहे वह पौधे और फ़सलें हों जो ज़मीन से उगती हैं, या पानी के चश्मे और कुएँ जो ज़मीन से फूटते हैं, या खनिज पदार्थ और धातुएँ जो ज़मीन से निकाली जाती हैं, या क़यामत के दिन मुर्दे जो क़ब्रों से उठाए जाएँगे।
इसी तरह, वह जानता है जो कुछ आसमान से उतरता है—चाहे वह बारिश की बूँदें हों, या फ़रिश्ते जो अल्लाह के हुक्म से उतरते हैं, या वही और किताबें जो नबियों पर नाज़िल होती हैं, या रिज़्क़ और रोज़ी जो अल्लाह अपने बंदों के लिए मुक़द्दर करता है, या बिजली की कड़क और उल्कापिंड जो शैतानों को भगाने के लिए फेंके जाते हैं। और वही जानता है जो कुछ आसमान की तरफ़ चढ़ता है—चाहे वह फ़रिश्तों का चढ़ना हो, या बंदों के अच्छे आमाल हों जो उसकी बारगाह में पेश होते हैं, या बंदों की रूहें जो मौत के वक़्त आसमान की तरफ़ उठाई जाती हैं।
फिर अल्लाह तआला अपने दो खूबसूरत नामों का ज़िक्र करता है: वह रहीम है यानी अपने बंदों पर बेहद मेहरबान है, उन पर रहमत करता है और उन्हें उनकी कमज़ोरियों के बावजूद नेमतें देता है। वह उन पर जल्दी अज़ाब नहीं भेजता, बल्कि उन्हें तौबा का मौक़ा देता है। और वह ग़फूर है यानी बड़ा क्षमाशील है, वह उन लोगों के गुनाह माफ कर देता है जो उसकी तरफ़ रुजू करते हैं, तौबा करते हैं और उस पर भरोसा करते हैं।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह का इल्म हर चीज़ को घेरे हुए है—ज़मीन के अंदर की चीज़ें, ज़मीन से निकलने वाली चीज़ें, आसमान से उतरने वाली चीज़ें और आसमान की तरफ़ चढ़ने वाली चीज़ें। जब हमें यक़ीन हो कि अल्लाह सब कुछ जानता है, तो हमें अपने आमाल में सुधार करना चाहिए, क्योंकि हमारा हर अमल उसके इल्म में है। और जब हमें यक़ीन हो कि वह रहीम और ग़फूर है, तो हमें उसकी रहमत से कभी निराश नहीं होना चाहिए, बल्कि गुनाहों से तौबा करके उसकी तरफ़ रुजू करना चाहिए। यही सच्ची कामयाबी का रास्ता है—अल्लाह के इल्म पर यक़ीन, उसकी रहमत से उम्मीद, और उसकी मग़फिरत की तलाश।
📜 आयत 1-4 — सबा
अनुवाद — सबा 2
सूरा सबा आयत 2 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (जो) चीज़ें (बीज वग़ैरह) ज़मीन में दाख़िल हुई है और…सूरा आयत 2/54 — सबा سبأ (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सबा सुनें, सबा अनुवाद, सबा mp3, सबा pdf. आयत 1–4. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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