सबा · 2/54
अनुवाद उच्चारण — सूरा सबा
يَعْلَمُ مَا يَلِجُ فِي الْأَرْضِ وَمَا يَخْرُجُ مِنْهَا وَمَا يَنزِلُ مِنَ السَّمَاءِ وَمَا يَعْرُجُ فِيهَا ۚ وَهُوَ الرَّحِيمُ الْغَفُورُ ۝٢
Ya`lamu maa yaliju fil ardi wa maa yakhruju minhaa wa maa yanzilu minas samaaa`i wa maa ya`ruju feehaa; wa Huwar Raheemul Ghafoor
📖 हिंदी अर्थ
(जो) चीज़ें (बीज वग़ैरह) ज़मीन में दाख़िल हुई है और जो चीज़ (दरख्त वग़ैरह) इसमें से निकलती है और जो चीज़ (पानी वग़ैरह) आसामन से नाज़िल होती है और जो चीज़ (नज़ारात फरिश्ते वग़ैरह) उस पर चढ़ती है (सब) को जानता है और वही बड़ा बख्शने वाला है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يَلِجُ – अंदर जाना, प्रवेश करना
  • يَعْرُجُ – ऊपर चढ़ना, आरोहण करना
  • الرَّحِيمُ – अत्यंत दयालु (जो अपने बंदों पर असीम रहमत करता है)
  • الْغَفُورُ – बड़ा क्षमाशील (गुनाहों को माफ करने वाला)

तफसीर:

अल्लाह तआला अपने बंदों को उसके असीम ज्ञान की याद दिलाता है, जो हर चीज़ को घेरे हुए है। वह जानता है जो कुछ भी ज़मीन के अंदर जाता है—चाहे वह बारिश का पानी हो जो ज़मीन की गहराइयों में समा जाता है, या मुर्दे जो क़ब्रों में दफ़न किए जाते हैं, या खज़ाने और दफ़न की हुई चीज़ें जो ज़मीन के पेट में छिपी होती हैं। और वही जानता है जो कुछ ज़मीन से निकलता है—चाहे वह पौधे और फ़सलें हों जो ज़मीन से उगती हैं, या पानी के चश्मे और कुएँ जो ज़मीन से फूटते हैं, या खनिज पदार्थ और धातुएँ जो ज़मीन से निकाली जाती हैं, या क़यामत के दिन मुर्दे जो क़ब्रों से उठाए जाएँगे।

इसी तरह, वह जानता है जो कुछ आसमान से उतरता है—चाहे वह बारिश की बूँदें हों, या फ़रिश्ते जो अल्लाह के हुक्म से उतरते हैं, या वही और किताबें जो नबियों पर नाज़िल होती हैं, या रिज़्क़ और रोज़ी जो अल्लाह अपने बंदों के लिए मुक़द्दर करता है, या बिजली की कड़क और उल्कापिंड जो शैतानों को भगाने के लिए फेंके जाते हैं। और वही जानता है जो कुछ आसमान की तरफ़ चढ़ता है—चाहे वह फ़रिश्तों का चढ़ना हो, या बंदों के अच्छे आमाल हों जो उसकी बारगाह में पेश होते हैं, या बंदों की रूहें जो मौत के वक़्त आसमान की तरफ़ उठाई जाती हैं।

फिर अल्लाह तआला अपने दो खूबसूरत नामों का ज़िक्र करता है: वह रहीम है यानी अपने बंदों पर बेहद मेहरबान है, उन पर रहमत करता है और उन्हें उनकी कमज़ोरियों के बावजूद नेमतें देता है। वह उन पर जल्दी अज़ाब नहीं भेजता, बल्कि उन्हें तौबा का मौक़ा देता है। और वह ग़फूर है यानी बड़ा क्षमाशील है, वह उन लोगों के गुनाह माफ कर देता है जो उसकी तरफ़ रुजू करते हैं, तौबा करते हैं और उस पर भरोसा करते हैं।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह का इल्म हर चीज़ को घेरे हुए है—ज़मीन के अंदर की चीज़ें, ज़मीन से निकलने वाली चीज़ें, आसमान से उतरने वाली चीज़ें और आसमान की तरफ़ चढ़ने वाली चीज़ें। जब हमें यक़ीन हो कि अल्लाह सब कुछ जानता है, तो हमें अपने आमाल में सुधार करना चाहिए, क्योंकि हमारा हर अमल उसके इल्म में है। और जब हमें यक़ीन हो कि वह रहीम और ग़फूर है, तो हमें उसकी रहमत से कभी निराश नहीं होना चाहिए, बल्कि गुनाहों से तौबा करके उसकी तरफ़ रुजू करना चाहिए। यही सच्ची कामयाबी का रास्ता है—अल्लाह के इल्म पर यक़ीन, उसकी रहमत से उम्मीद, और उसकी मग़फिरत की तलाश।



📜 आयत 1-4 — सूरा सबा

1الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي لَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ وَلَهُ الْحَمْدُ فِي الْآخِرَةِ ۚ وَهُوَ الْحَكِيمُ الْخَبِيرُ
हर क़िस्म की तारीफ उसी खुदा के लिए (दुनिया में भी) सज़ावार है कि जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) उसी का है और आख़ेरत में (भी हर तरफ) उसी की तारीफ है और वही वाक़िफकार हकीम है
2يَعْلَمُ مَا يَلِجُ فِي الْأَرْضِ وَمَا يَخْرُجُ مِنْهَا وَمَا يَنزِلُ مِنَ السَّمَاءِ وَمَا يَعْرُجُ فِيهَا ۚ وَهُوَ الرَّحِيمُ الْغَفُورُ
(जो) चीज़ें (बीज वग़ैरह) ज़मीन में दाख़िल हुई है और जो चीज़ (दरख्त वग़ैरह) इसमें से निकलती है और जो चीज़ (पानी वग़ैरह) आसामन से नाज़िल होती है और जो चीज़ (नज़ारात फरिश्ते वग़ैरह) उस पर चढ़ती है (सब) को जानता है और वही बड़ा बख्शने वाला है
3وَقَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا لَا تَأْتِينَا السَّاعَةُ ۖ قُلْ بَلَىٰ وَرَبِّي لَتَأْتِيَنَّكُمْ عَالِمِ الْغَيْبِ ۖ لَا يَعْزُبُ عَنْهُ مِثْقَالُ ذَرَّةٍ فِي السَّمَاوَاتِ وَلَا فِي الْأَرْضِ وَلَا أَصْغَرُ مِن ذَٰلِكَ وَلَا أَكْبَرُ إِلَّا فِي كِتَابٍ مُّبِينٍ
और कुफ्फार कहने लगे कि हम पर तो क़यामत आएगी ही नहीं (ऐ रसूल) तुम कह दो हॉ (हॉ) मुझ को अपने उस आलेमुल ग़ैब परवरदिगार की क़सम है जिससे ज़र्रा बराबर (कोई चीज़) न आसमान में छिपी हुई है और न ज़मीन में कि क़यामत ज़रूर आएगी और ज़र्रे से छोटी चीज़ और ज़र्रे से बडी (ग़रज़ जितनी चीज़े हैं सब) वाजेए व रौशन किताब लौहे महफूज़ में महफूज़ हैं
4لِّيَجْزِيَ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ ۚ أُولَٰئِكَ لَهُم مَّغْفِرَةٌ وَرِزْقٌ كَرِيمٌ
ताकि जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और (अच्छे) काम किए उनको खुदा जज़ाए खैर दे यही वह लोग हैं जिनके लिए (गुनाहों की) मग़फेरत और (बहुत ही) इज्ज़त की रोज़ी है
सबाकुरान सूची
54आयत
मक्कीअवतरण स्थान
2आयत

अनुवाद — सबा 2

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Tuesday, September 29, 2026

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