सबा · 49/54
अनुवाद उच्चारण — सूरा सबा
قُلْ جَاءَ الْحَقُّ وَمَا يُبْدِئُ الْبَاطِلُ وَمَا يُعِيدُ ۝٤٩
Qul jaaa`al haqqu wa maa yubdi`ul baatilu wa maa yu`eed
📖 हिंदी अर्थ
(अब उनसे) कह दो दीने हक़ आ गया और इतना तो भी (समझो की) बातिल (माबूद) शुरू-शुरू कुछ पैदा करता है न (मरने के बाद) दोबारा ज़िन्दा कर सकता है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الحَقّ: सत्य, इस्लाम, वह दीन जो अल्लाह की ओर से आया।
  • البَاطِل: असत्य, शिर्क, वह चीज़ जो अल्लाह की इबादत के अलावा हो।
  • مَا يُبْدِئُ وَمَا يُعِيدُ: न तो कुछ शुरू कर सकता है और न ही दोबारा लौटा सकता है, यानी उसका कोई वजूद और असर बाकी नहीं।

तफ़सीर:

ऐ नबी! आप इन मुशरिकों से कह दीजिए कि सत्य आ गया है—यानी अल्लाह का दीन, इस्लाम, और उसके सारे अहकाम जो रहमत और हिदायत लेकर आए हैं। यह सत्य अपने पूरे रौब और ताकत के साथ ज़ाहिर हो चुका है। और अब बातिल (असत्य) का वजूद मिट चुका है; उसके पास न तो कोई ताकत है कि वह कुछ नया शुरू कर सके और न ही वह अपनी खोई हुई हुकूमत को लौटा सकता है। शिर्क और कुफ्र की जड़ें उखड़ गईं, उसका असर खत्म हो गया, और अब उसके पास न कुछ पेश करने की सलाहियत है और न ही किसी चीज़ को दोबारा ज़िंदा करने की।

यह आयत मुसलमानों के लिए बशारत (खुशखबरी) है कि सच्चाई की फ़तह हमेशा रहेगी, चाहे बातिल की कोशिशें कितनी भी बड़ी क्यों न हों। अल्लाह का दीन कभी हारता नहीं, क्योंकि वही हक़ है, और हक़ के आगे बातिल की कोई हक़ीक़त नहीं। जब दिल में ईमान की रोशनी आ जाती है, तो शिर्क और गुमराही का अंधेरा छंट जाता है। याद रखिए, यह वादा अल्लाह का है—हक़ आ गया और बातिल ने अपनी सारी ताकत खो दी। इसलिए मोमिन को चाहिए कि वह इस हक़ पर डटा रहे, क्योंकि अल्लाह की मदद हक़ के साथ है, और बातिल का अंजाम हमेशा ज़वाल (बर्बादी) है।



📜 आयत 47-51 — सूरा सबा

47قُلْ مَا سَأَلْتُكُم مِّنْ أَجْرٍ فَهُوَ لَكُمْ ۖ إِنْ أَجْرِيَ إِلَّا عَلَى اللَّهِ ۖ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ شَهِيدٌ
(ऐ रसूल) तुम (ये भी) कह दो कि (तबलीख़े रिसालत की) मैंने तुमसे कुछ उजरत माँगी हो तो वह तुम्हीं को (मुबारक) हो मेरी उजरत तो बस खुदा पर है और वही (तुम्हारे आमाल अफआल) हर चीज़ से खूब वाक़िफ है
48قُلْ إِنَّ رَبِّي يَقْذِفُ بِالْحَقِّ عَلَّامُ الْغُيُوبِ
(ऐ रसूल) तुम उनसे कह दो कि मेरा बड़ा गैबवाँ परवरदिगार (मेरे दिल में) दीन हक़ को बराबर ऊपर से उतारता है
49قُلْ جَاءَ الْحَقُّ وَمَا يُبْدِئُ الْبَاطِلُ وَمَا يُعِيدُ
(अब उनसे) कह दो दीने हक़ आ गया और इतना तो भी (समझो की) बातिल (माबूद) शुरू-शुरू कुछ पैदा करता है न (मरने के बाद) दोबारा ज़िन्दा कर सकता है
50قُلْ إِن ضَلَلْتُ فَإِنَّمَا أَضِلُّ عَلَىٰ نَفْسِي ۖ وَإِنِ اهْتَدَيْتُ فَبِمَا يُوحِي إِلَيَّ رَبِّي ۚ إِنَّهُ سَمِيعٌ قَرِيبٌ
(ऐ रसूल) तुम ये भी कह दो कि अगर मैं गुमराह हो गया हूँ तो अपनी ही जान पर मेरी गुमराही (का वबाल) है और अगर मैं राहे रास्त पर हूँ तो इस ''वही'' के तुफ़ैल से जो मेरा परवरदिगार मेरी तरफ़ भेजता है बेशक वह सुनने वाला (और बहुत) क़रीब है
51وَلَوْ تَرَىٰ إِذْ فَزِعُوا فَلَا فَوْتَ وَأُخِذُوا مِن مَّكَانٍ قَرِيبٍ
और (ऐ रसूल) काश तुम देखते (तो सख्त ताज्जुब करते) जब ये कुफ्फार (मैदाने हशर में) घबराए-घबराए फिरते होंगे तो भी छुटकारा न होगा
सबाकुरान सूची
54आयत
मक्कीअवतरण स्थान
49आयत

अनुवाद — सबा 49

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Thursday, October 1, 2026

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