फातिर · 34/45
अनुवाद उच्चारण — सूरा फातिर
وَقَالُوا الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي أَذْهَبَ عَنَّا الْحَزَنَ ۖ إِنَّ رَبَّنَا لَغَفُورٌ شَكُورٌ ۝٣٤
Wa qaalul hamdu lillaahil lazeee azhaba `annal hazan; inna Rabbanaa la Ghafoorun Shakoor
📖 हिंदी अर्थ
और ये लोग (खुशी के लहजे में) कहेंगे खुदा का शुक्र जिसने हम से (हर क़िस्म का) रंज व ग़म दूर कर दिया बेशक हमारा परवरदिगार बड़ा बख्शने वाला (और) क़दरदान है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَذْهَبَ: दूर कर दिया, हटा दिया।
  • الْحَزَنَ: हर प्रकार का दुःख, चिंता और भय।
  • لَغَفُورٌ: बहुत क्षमा करने वाला।
  • شَكُورٌ: अच्छे कर्मों को स्वीकार करने वाला और उनका अच्छा बदला देने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब अल्लाह के नेक बंदे जन्नत में दाखिल होंगे और उसकी अनगिनत नेमतों को अपनी आँखों से देखेंगे, तो उनके दिल शुक्र और खुशी से भर जाएँगे। उस वक़्त उनकी ज़बान से यही निकलेगा: "तमाम तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं जिसने हमसे हर दुःख और ग़म को दूर कर दिया।" यानी जो डर उन्हें जहन्नम के अज़ाब का था, जो चिंता उन्हें अपने गुनाहों की थी, जो परेशानी इस दुनिया में उन्हें झेलनी पड़ी थी—वह सब कुछ अब ख़त्म हो गया। अल्लाह ने उनके दिलों से हर उस चीज़ का सदमा हटा दिया जो उन्हें उदास कर सकती थी।

फिर वे कहेंगे: "बेशक हमारा रब बहुत क्षमा करने वाला और कद्रदान है।" वह ग़फ़ूर है—हमारी ग़लतियों और कमियों को माफ़ करने वाला; और वह शकूर है—हमारी छोटी-छोटी नेकियों को कबूल करके उन्हें कई गुना बढ़ाकर इनाम देने वाला। यही वजह है कि उसने हमें अपने फज़ल से जन्नत के इस हमेशा रहने वाले घर में उतारा, जहाँ न कोई थकान होगी, न कोई मेहनत, न कोई दर्द।

यह वही लोग हैं जिन्हें अल्लाह ने अपनी किताब (क़ुरआन) का वारिस बनाया, उन्हें सुनहरे कंगन और मोतियों से सजाया जाएगा, और उनका लिबास रेशम का होगा। यह सब उनके सब्र, ईमान और अच्छे आमाल का नतीजा है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बताती है कि जन्नत की असली खुशी सिर्फ़ खाने-पीने और आराम में नहीं है, बल्कि सबसे बड़ी खुशी यह है कि अल्लाह हमारे दिलों से हर ग़म मिटा देगा। इस दुनिया में हर इंसान किसी न किसी दुःख से जूझ रहा है—कोई बीमारी से, कोई ग़रीबी से, कोई अकेलेपन से। लेकिन अल्लाह का वादा है कि जो लोग उस पर ईमान लाएँगे और नेक काम करेंगे, उनके लिए एक ऐसा दिन आएगा जब हर दर्द हमेशा के लिए ख़त्म हो जाएगा।

तो आओ, हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की राह में लगाएँ, उसकी इबादत करें, उसके बताए रास्ते पर चलें, और उससे यह दुआ माँगें कि हमें भी उन लोगों में शामिल करे जो जन्नत में यह कलमा पढ़ेंगे: "अल्हम्दुलिल्लाहिल्लज़ी अज़्हबा अन्नल हज़न।" यही सबसे बड़ी कामयाबी है—ऐसी कामयाबी जिसके बाद कोई ग़म नहीं, कोई डर नहीं, सिर्फ़ सुकून और खुशी।



📜 आयत 32-36 — सूरा फातिर

32ثُمَّ أَوْرَثْنَا الْكِتَابَ الَّذِينَ اصْطَفَيْنَا مِنْ عِبَادِنَا ۖ فَمِنْهُمْ ظَالِمٌ لِّنَفْسِهِ وَمِنْهُم مُّقْتَصِدٌ وَمِنْهُمْ سَابِقٌ بِالْخَيْرَاتِ بِإِذْنِ اللَّهِ ۚ ذَٰلِكَ هُوَ الْفَضْلُ الْكَبِيرُ
फिर हमने अपने बन्दगान में से ख़ास उनको कुरान का वारिस बनाया जिन्हें (अहल समझकर) मुन्तख़िब किया क्योंकि बन्दों में से कुछ तो (नाफरमानी करके) अपनी जान पर सितम ढाते हैं और कुछ उनमें से (नेकी बदी के) दरमियान हैं और उनमें से कुछ लोग खुदा के इख़तेयार से नेकों में (औरों से) गोया सबकत ले गए हैं (इन्तेख़ाब व सबक़त) तो खुदा का बड़ा फज़ल है
33جَنَّاتُ عَدْنٍ يَدْخُلُونَهَا يُحَلَّوْنَ فِيهَا مِنْ أَسَاوِرَ مِن ذَهَبٍ وَلُؤْلُؤًا ۖ وَلِبَاسُهُمْ فِيهَا حَرِيرٌ
(और उसका सिला बेहिश्त के) सदा बहार बाग़ात हैं जिनमें ये लोग दाख़िल होंगे और उन्हें वहाँ सोने के कंगन और मोती पहनाए जाएँगे और वहाँ उनकी (मामूली) पोशाक ख़ालिस रेशमी होगी
34وَقَالُوا الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي أَذْهَبَ عَنَّا الْحَزَنَ ۖ إِنَّ رَبَّنَا لَغَفُورٌ شَكُورٌ
और ये लोग (खुशी के लहजे में) कहेंगे खुदा का शुक्र जिसने हम से (हर क़िस्म का) रंज व ग़म दूर कर दिया बेशक हमारा परवरदिगार बड़ा बख्शने वाला (और) क़दरदान है
35الَّذِي أَحَلَّنَا دَارَ الْمُقَامَةِ مِن فَضْلِهِ لَا يَمَسُّنَا فِيهَا نَصَبٌ وَلَا يَمَسُّنَا فِيهَا لُغُوبٌ
जिसने हमको अपने फज़ल (व करम) से हमेशगी के घर (बेहिश्त) में उतारा (मेहमान किया) जहाँ हमें कोई तकलीफ छुयेगी भी तो नहीं और न कोई थकान ही पहुँचेगी
36وَالَّذِينَ كَفَرُوا لَهُمْ نَارُ جَهَنَّمَ لَا يُقْضَىٰ عَلَيْهِمْ فَيَمُوتُوا وَلَا يُخَفَّفُ عَنْهُم مِّنْ عَذَابِهَا ۚ كَذَٰلِكَ نَجْزِي كُلَّ كَفُورٍ
और जो लोग काफिर हो बैठे उनके लिए जहन्नुम की आग है न उनकी कज़ा ही आएगी कि वह मर जाए और तकलीफ से नजात मिले और न उनसे उनके अज़ाब ही में तख़फीफ की जाएगी हम हर नाशुक्रे की सज़ा यूँ ही किया करते हैं
फातिरकुरान सूची
45आयत
मक्कीअवतरण स्थान
34आयत

अनुवाद — फातिर 34

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Wednesday, September 30, 2026

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