Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- दारुल-मुक़ामा: वह स्थान जहाँ हमेशा रहना हो, कभी वहाँ से जाना न हो।
- नसब: थकान, मेहनत और परिश्रम।
- लुग़ूब: थकावट और कमज़ोरी, जो अत्यधिक परिश्रम के बाद आती है।
तफ़सीर:
यह आयत उन मोमिनों की ज़बानी है जिन्हें अल्लाह तआला ने अपने किताब (क़ुरआन) का वारिस बनाया और उन्हें जन्नत में दाख़िल किया। वे जन्नत में दाख़िल होकर अल्लाह की तारीफ़ करते हुए कहते हैं: "वही अल्लाह जिसने हमें अपने फज़ल और करम से हमेशा रहने की जगह (जन्नत) में उतारा।" यह जगह ऐसी है जहाँ से कभी निकलना नहीं, न मौत है, न बुढ़ापा, न दर्द, न ग़म। यह सब कुछ अल्लाह का ख़ालिस फज़ल है, न कि हमारी किसी क़ाबिलियत या अमल का बदला। अगर अल्लाह की रहमत और मेहरबानी न होती, तो हमारे आमाल इस क़ाबिलियत ही नहीं रखते थे कि हमें इस मुक़ाम तक पहुँचाया जाए।
फिर वे कहते हैं: "इस जन्नत में न हमें कोई थकान छूएगी और न ही कोई मशक़्क़त।" यानी जन्नत की हर नेमत में सुकून और आराम है। वहाँ न दिन की गर्मी है, न रात की सर्दी, न भूख-प्यास का तकलीफ़देह एहसास, न कोई काम करने की थकान, न कोई बीमारी और न ही कमज़ोरी। हर तरफ़ ख़ुशी, सुकून और आराम ही आराम है। यह अल्लाह का वो इनाम है जो उसने अपने नेक बंदों के लिए तैयार किया है।
यह आयत हमें बताती है कि दुनिया की मेहनत-मशक़्क़त और तकलीफ़ें कुछ दिनों की हैं। जो इंसान अल्लाह की राह में सब्र करता है, उसका अंजाम यही है कि उसे ऐसी जगह मिलेगी जहाँ हर तरह की तकलीफ़ से छुटकारा मिलेगा। यही असली कामयाबी है। अल्लाह तआला अपने बंदों से बेपनाह मुहब्बत करता है और चाहता है कि वे उसकी इबादत करें और उसकी राह पर चलें, ताकि उन्हें यह अज़ीमुश्शान इनाम मिले। जन्नत की याद दिलाकर अल्लाह हमें बताता है कि दुनिया की मुश्किलें और परेशानियाँ कुछ दिनों की हैं, और उनके बदले में मिलने वाली नेमतें हमेशा रहने वाली हैं। इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह की राह में मेहनत करें, उसकी इबादत में कोई कसर न छोड़ें, और उसकी रहमत से उम्मीद रखें। अल्लाह बड़ा रहम करने वाला और बड़ा एहसान करने वाला है।
📜 आयत 33-37 — सूरा फातिर
अनुवाद — फातिर 35
सूरा फातिर आयत 35 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जिसने हमको अपने फज़ल (व करम) से हमेशगी के घर…सूरा आयत 35/45 — सूरा फातिर فاطر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा फातिर सुनें, सूरा फातिर अनुवाद, सूरा फातिर mp3, सूरा फातिर pdf. आयत 33–37. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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