अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- جُنْدٍ: सेना, यहाँ अर्थ है फ़रिश्तों की टोली।
- مِن بَعْدِهِ: उसके बाद, अर्थात उस (ईमानवाले व्यक्ति) के मारे जाने के बाद।
- مُنزِلِينَ: उतारने वाले, अर्थात फ़रिश्तों को उतारने वाले।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब उस नेक इंसान ने अपनी क़ौम को ईमान की दावत दी और उन्हें अल्लाह के अज़ाब से डराया, तो उसकी क़ौम ने उसे झुठलाया और शहीद कर दिया। लेकिन अल्लाह तआला ने उसकी क़ौम को सज़ा देने के लिए आसमान से फ़रिश्तों की कोई फ़ौज नहीं उतारी, और न ही अल्लाह की सुन्नत (रीति) यही है कि वह किसी उम्मत को हलाक करने के लिए फ़रिश्तों को उतारे। अल्लाह के लिए यह ज़रूरी नहीं था कि वह उन्हें सज़ा देने के लिए फ़रिश्तों की भारी सेना भेजे, क्योंकि उसकी क़ुदरत (शक्ति) इससे कहीं बढ़कर है। उसने उन्हें सिर्फ़ एक ज़ोरदार चिंघाड़ (सैहा) से हलाक कर दिया, जो एक फ़रिश्ते के द्वारा हुई। यह अल्लाह की रहमत और उसकी हिकमत (बुद्धिमत्ता) का तक़ाज़ा था कि वह बंदों पर आसानी करे और उन्हें सज़ा देने के लिए फ़रिश्तों को न उतारे, बल्कि एक साधारण सा अज़ाब भेज दे जो उन्हें तबाह कर दे।
यहाँ से हमें यह सबक़ मिलता है कि अल्लाह की क़ुदरत के आगे कोई चीज़ मुश्किल नहीं है। वह चाहे तो एक पल में किसी ज़ालिम क़ौम को ख़त्म कर दे, बिना किसी बड़े साज़ो-सामान के। यह अल्लाह का इन्साफ़ भी है और उसकी रहमत भी कि वह अपने बंदों पर बोझ नहीं डालता। हमें चाहिए कि हम अल्लाह की क़ुदरत पर भरोसा रखें और उसकी नाफ़रमानी से बचें, क्योंकि उसका अज़ाब बहुत सख्त है, लेकिन उसकी रहमत भी बहुत वसीअ (व्यापक) है। यही अल्लाह का तरीक़ा रहा है कि वह अपने नबियों और नेक बंदों की मदद करता है और ज़ालिमों को उनके किए की सज़ा देता है, चाहे वह सज़ा किसी भी सूरत में हो। हमें चाहिए कि हम अल्लाह के दीन को अपनाएँ और उसके रसूलों की पैरवी करें, ताकि हम उसके अज़ाब से बच सकें और उसकी रहमत के हक़दार बन सकें।
📜 आयत 26-30 — यासीन
अनुवाद — यासीन 28
सूरा यासीन आयत 28 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने उसके मरने के बाद उसकी क़ौम पर उनकी…सूरा आयत 28/83 — यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यासीन सुनें, यासीन अनुवाद, यासीन mp3, यासीन pdf. आयत 26–30. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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